उसके कहने पर मैंने मुंह बंद रखा और वो मेरा यूज करता रहा..

मैं एक सीधी साधी साधारण सी चबी सी मलयाली लड़की हूं। मुझे पहली जॉब चेन्‍नई में मिली। मेरा बॉस बहुत ही खडूस किस्‍म का इंसान था। मैं उसे बिल्‍कुल पसंद नहीं करती थी। मुझे चिड़ होती थी जब कभी वो मेरे पास होते थे। हमारे बीच में ज्‍यादा बातचीत भी नहीं हुआ करती थी।

एक बार की बात है शुक्रवार को मैं काम खत्‍म करके निकलने वाली थी। इतने में मेरे बॉस आ गए है और वहां किसी काम की वजह से मुझे कुछ देर और रुकना पड़ा। बातों बात में उन्‍होंने बताया कि वो भी मलयाली है लेकिन उनका बचपन अहमदाबाद में गुजरा हैं। उन्‍होंने बताया कि चेन्‍नई में उनका कोई दोस्‍त नहीं है। इस बातचीत में वो मुझे बहुत ही सहज इंसान लगे।

ऐसे शुरु हुई बातें...

ऐसे शुरु हुई बातें...

इसके बाद थोड़ी देर होने के बाद उन्‍होंने मुझे लिफ्ट देने के लिए कहा मैंने उन्‍हें मना कर दिया। लेकिन उनके एक दो बार जोर देने पर मैंने भी हां कर दी। जब हम दोनों कार में थे, उन्‍होंने मुझे बहुत सारे अपने फेवरेट सॉन्‍ग्‍स के बारे में बताया। इस दौरान हमारे बीच कई बात हुई। घर पहुंचने के बाद भी उन्‍होंने मुझे मैसेज किए। अब मैसेज से हमारी बातें होने लगी थी। अब हर एक नई बातचीत के बाद वो मुझे ज्‍यादा बेहतर लगने लगे थे।

धीरे धीरे करीब आने लगे..

धीरे धीरे करीब आने लगे..

अब हम दोनों बहुत अच्‍छे दोस्‍त बन चुके थे तो उन्‍होंने मुझे हमारी दोस्‍ती के बारे में किसी को नहीं बताने के बारे में कहा, क्‍योंकि इसकी वजह ऑफिस में फालतू की बातें बन सकती थी। दिन कुछ हफ्तों में बदलें और हफ्तें महीनों में। अब हम डिनर के लिए रोजाना मिलने लगे, और मूवीज देखने जाने लगे। अब मेरा पूरा समय उनके साथ गुजरने लगा। अब पूरी दुनिया मेरे उनके ईद गिर्द घूमने लगती है बस मुझे लग रहा था अब वो ही मेरी जिंदगी का हिस्‍सा है।

हमारे रिश्‍ते का कोई नाम नहीं है..

हमारे रिश्‍ते का कोई नाम नहीं है..

एक बेहद करीब रिश्‍ता होने के बावजूद भी हमारे रिश्‍ता का कोई नाम नहीं था। हम दोनों अब दोस्‍त से बढ़कर थे। उन्‍होंने कभी मुझे आई लव यू नहीं कहा था लेकिन उसने मुझे इस बात पर यकीन दिला दिया था कि वो मुझसे बहुत प्‍यार करता है।

वो शादीशुदा था..

वो शादीशुदा था..

एक साल पहले हमारे एक कॉमन फ्रैंड ने बताया कि वो शादीशुदा है, उसकी एक बच्‍ची भी है। मेरी दुनिया जैसे बिखर गई। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं इस सिचुएशन के साथ कैसे डील करुं। मैंने आखिरकार उससे जाकर पूछ लिया। पहले तो वो टालता रहा, लेकिन मुझे सच बताया कि वो शादीशुदा था लेकिन अब वो अपनी पत्‍नी से अलग हो चुका है। उनका डिवोर्स चल रहा है, वो नहीं चाहता है कि कोई उसे डिवोर्सी बोले इसलिए उसने किसी को भी नहीं बताया। उसने जो कहां उसे सुनकर मैंने हां कर दी और हम फिर से वो ही रुटीन में आ गए। मैंने देखा कि एक महीने बाद हम लोग फिर से उसी रुटीन में लौट आए हैं।

उसने इग्‍नोर करना शुरु कर दिया..

उसने इग्‍नोर करना शुरु कर दिया..

ए‍क महीनें बाद उसने अब मुझे कॉल करना कम कर दिया और हम लोग पहले जैसे नहीं मिल पाते थे। हम सिर्फ ऑफिस में ही मिलते थे और काम की बातें होती थी। वो लेट आता था और जल्‍दी ऑफिस से निकल जाता था। फिर मुझे हमारे एक कॉमन फ्रैंड से मालूम चला उसके दूसरे अफेयर्स के बारे में। मैं अब धीरे धीरे सिर्फ काम पर ध्‍यान देना शुरु हो गई।

एक दिन..

एक दिन..

न्‍यू ईयर ईव से कुछ दिनों पहले हम सभी ऑफिस कुलीग वीकेंड ब्रेक के बाहर गए। वहां वो भी आया था। उसने खूब ज्‍यादा ड्रिंक लेने के बाद मेरे पास आकर कहा कि वो मुझे बहुत प्‍यार करता है। मैंने उसे सोने की सलाह दी तो उसने मुझसे कहा कि वो चेन्‍नई जाकर मेरे साथ ही न्‍यू ईयर सेलिब्रेट करेगा। जब हम सब वापस आए तो न्‍यू ईयर पर मैंने उसका बहुत इंतजार किया। मैंने उसे बहुत फोन किए, उसने मेरे फोन का कोई जवाव नहीं दिया। पूरी शाम इंतजार करने के बाद मैं अपनी रुम में रोते हुए ही निकाल दी।

फिर उसने फोन उठाया..

फिर उसने फोन उठाया..

मेरे खैर खबर पूछने के लिए मेरी दोस्‍त ने मुझे फोन किया और मेरी पूरी कहानी सुनने के बाद उसने मुझे अपने यहां आने के लिए कहा। मैं उसके घर की तरफ निकल गई और कैब में बैठकर मैंने फिर उसे फोन लगाया। इस बार उसने फोन उठाया और मुझ पर चिल्‍ला कर कहा " मैं किसी के साथ रहूं किसी के साथ भी रहूं, तुम कौन होती हो मुझसे पूछने वाली। "

ऑन ऑफ वाला रिलेशनशिप

ऑन ऑफ वाला रिलेशनशिप

कैब से उतरकर कुछ दूरी पर मेरे फ्रैंड का घर था। मैं वहां जाने लगी, उसकी बातें दिमाग में घूमने लगी। अचानक से एक बाइक वाले ने मुझे टक्‍कर मारकर निकल गया। कुछ देर में मेरे पास भीड़ इक्‍ट्ठी हो गई, थोड़ी देर में मेरी दोस्‍त आई वो मुझे घर ले गई। मेरी फ्रैंड ने उसे फोन करके बताया और उसने फोन करके मेरी तबीयत पूछी जब मैंने उससे मिलने आने को कहा तो उसने साफ साफ मना कर दिया। उसने कहा वो किसी और के साथ है। मैंने उसे उसका वादा याद दिलाया तो उसने मुझे सब भूलने की हिदायत दे दी। इस तरह हमारा ऑन ऑफ वाला रिलेशनशिप चलता रहा।

मैं सबसे दूर होती चली गई..

मैं सबसे दूर होती चली गई..

एक दिन वो मेरे सिस्‍टम पर अपना ईमेल साइन आउट करना भूल गया, मैंने उसके सारे फ्लर्ट चैट पढ़े उसकी गर्लफ्रैंड के साथ। मुझे मालूम चला कि वो अपनी एक फ्रैंड के साथ इंडिया में कहीं शॉर्ट ट्रिप पर भी गया था। उसके होटल और फ्लाइट बुकिंग से मालूम चला। इस दौरान मेरे पैरेंट्स मेरे लिए लड़का ढूंढने लगे। लेकिन मैंने कोई‍ दिलचस्‍पी नहीं ली उल्‍टा मैंने खुद को अकेला कर दिया।

एक प्रोजेक्‍ट पर मिला काम

एक प्रोजेक्‍ट पर मिला काम

इसके बाद हम दोनों को एक प्रोजेक्‍ट पर काम करने का मौका मिला। ये एक फोटोबुक थी। इस पर मुझे राइटर के तौर पर काम करना था और उसे फोटोज क्लिक करनी थी। इस सिलसिले में हम तीन महीनें तक बाहर रहें। हमारा काम लोगों को इतना पसंद आया कि उन्‍होंने हमें इसे इंटरनेशनल लेवल पर वापस काम करने को दिया। हालांकि मुझे इस जॉब के लिए कुछ अच्‍छी सैलेरी नहीं मिल रही थी। लेकिन उसके साथ रहने के लिए मैं यह जॉब करने लगी।

एक बार की बात है..

एक बार की बात है..

इस प्रोजेक्‍ट के लिए हम बाहर थे। हम दोनों एक 50 साल की बूढ़ी महिला के लिए काम करते थे। उसकी छोटी बहन भी उसके साथ रहती थी। हमें उनके यहां रुकना था काम खत्‍म होने तक। एक दिन मैंने देखा डिनर के बाद उसे उस बूढ़ी महिला के रुम में साथ सोने के लिए जाते हुए। मैं उस पूरी रात रोती रही। ऐसा एक महीने तक चलता रहा।

वो दोनों लिव इन रिलेशनशिप में थे

वो दोनों लिव इन रिलेशनशिप में थे

दुनिया में सबसे ज्‍यादा दर्द होता है कि आप जिसे सबसे ज्‍यादा प्‍यार करते हो उसे किसी और के साथ सोते हुए देखकर। 3 साल तक मैं ये सारी चीजें बर्दाश्‍त करती रही लेकिन अब हिम्‍मत नहीं थी। मैंने सोच लिया था कि अब ये जॉब छोड़कर मैं कहीं और जॉब करुंगी।

मैं बैंग्लोर आ गई

मैं बैंग्लोर आ गई

इसके बाद मैंने नई जॉब ली और बैंगलोर आ गई। फिर मैंने सुना उस औरत से उसका ब्रेकअप हो गया। वो अब दिल्‍ली में शिफ्ट हो चुका था। हम अभी भी टच में थे क्‍योंकि उस बुक की कुछ एडिटिंग बाकी थी। वो कभी कभी फोन करके मुझसे माफी मांग लिया करता था। लेकिन अब मैंने उसका फोन उठाना बंद कर दिया था। छह महीनें के बाद मैंने एक दिन उसका फोन उठाया, उसने कहा कि अगर मैं छह महीनें में 20 किलो वजन कम करती हूं तो वो मुझसे शादी कर लेगा। एक मिनट के बाद सोचा ये आदमी मुझसे प्‍यार करता है या मेरी शक्‍ल से। वजन कम करना मेरे लिए बहुत ही मुश्किल काम था क्‍योंकि मैं एक पीसीओडी की मरीज थी। मैंने उसके लिए वजन कम करना शुरु कर दिया।

फिर एक दिन..

फिर एक दिन..

एक दिन मुझे मालूम चला कि वो फिर से किसी दूसरी औरत के साथ दिल्‍ली में लिव इन में रहता है। ये बस आखिरी बार था। मैंने उसे आखिरी मैसेज किया और उसने भी गुडलक कहकर जवाब दे दिया। जब वो बुक रिलीज हुई तो उसने दावा किया कि वो ही लेखक है। उस बुक में मेरा नामोनिशान नहीं था। जिस इंसान को मैं दिलोजान से प्‍यार करती थी। उसने अपने फायदे के लिए मेरा पर्सनली और प्रोफेशनली फायदा उठाया।

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