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सिंगल पेरेंट डेटिंग के सामान्य डर
अगर आप सिंगल पेरेंट हैं और एक बच्चे की परवरिश भी कर रहे हैं, तो इस बात की पूरी संभावना है कि आप डेटिंग से दूर ही रहते होंगे। अगर आप के मन में डेटिंग का ख्याल आता भी होगा तो आप इसके बारे में कई बार सोचते होंगे। चूंकि अब आपकी जिंदगी में पहले की तुलना में काफी बदलाव आ गया है, इसलिए डेटिंग का फैसला कर पाना आसान नहीं होता है। दोबारा डेटिंग करने को लेकर ऐसे कई सामान्य डर हैं, जिसका सामना हर सिंगल पेरेंट को करना पड़ता है।
जब आपके बच्चे हो जाते हैं तो आपकी दुनिया बदल जाती है और चीजें पहले जैसी नहीं रह जाती है। बतौर सिंगल पेरेंट आपको कई डर से जूझना पड़ता है। आपको कई डर का खुलकर सामना करना पड़ता है और अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाने के लिए साकारात्मक सोचना पड़ता है। हालांकि अगर आपके बच्चे हैं तो डेटिंग का समीकरण और भी बिगड़ जाता है। अगर आप डेटिंग के डर से पार पाना चाहते हैं तो आपको अपने माइंडसेट को बदलना होगा।
सबसे बड़ा डर तो यही होता है कि क्या आपके बच्चे आपके नए पार्टनर को स्वीकार करेंगे। ज्यादातर सिंगल पेरेंट को सबसे बड़ा डर इसी बात का रहता है कि बच्चों की क्या प्रतिक्रिया होगी और वे आपके डेटिंग के फैसले को किस तरह से लेंगे। इसके बाद अगर आप अपने प्रिय पार्टनर को खो देते हैं तो अपराध बोध का भी डर रहता है।

1. बच्चे: जब आपके बच्चे हो जाते हैं तो आपकी पूरी दुनिया उन्हीं के ईद—गिर्द सिमट जाती है। आप कोई भी फैसला लेने से पहले अपने बच्चों के हित के बारे में सोचने लगते हैं और कुछ भी ऐसा नहीं करते जिससे बच्चों पर बुरा असर पड़े। डेटिंग का मामला इससे अलग नहीं है। जब भी सिंगल पेरेंट के लिए डेटिंग की बात आती है तो हर किसी का डर अलग—अलग होता है कि उनके बच्चे इस बात पर किस तरह से रिएक्ट करेंगे।
2. आपका पार्टनर और बच्चे: पल भर को अगर आप डेटिंग के लिए बच्चों का डर छोड़ भी दें इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आपके बच्चे आपके नए पार्टनर को स्वीकार कर लेंगे। हो सकता है आपके अलगाव के कारण वह परेशान हो। ऐसे में आपके नए पार्टनर को आपके बच्चे द्वारा अस्वीकार किए जाने का डर बेहद सामान्य है।
3. पर्याप्त समय न देने का डर: सिंगल पेरेंट हो जाने के बाद आप पर काम का बोझ बढ़ जाता है और आप बच्चों के साथ व्यस्त हो जाते हैं। इस स्थिति में यह डर बेहद सामान्य है कि आप जिसके साथ डेटिंग कर रहे हैं, उन्हें पर्याप्त समय दे पाएंगे या नहीं।
4. प्राथमिकता का डर: इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपकी डेटिंग कितनी आगे तक पहुंच गई है, आपकी प्राथमिकता हमेशा आपके बच्चे ही होनी चाहिए। किसी समय जब हमें बच्चे और अपने पार्टनर के बीच चुनाव करना पड़ता है तो यह बहुत मुश्किल काम होता है। भले ही आपका पार्टनर कितनो ही समझदार क्यों न हो, फिर भी इस बात की कोई गारंटी नहीं कि अंजाम अच्छा ही होगा।
5. चीजों के गलत होने का डर: अगर आप सिंगल पेरेंट है और पिछले पार्टनर के साथ आपका अनुभव अच्छा नहीं रहा है, तो कहीं न कहीं नए पार्टनर को लेकर भी आपके मन डर बना रहेगा। कई सिंगल पेरेंट इस मामले में विशेषज्ञों की राय भी लेते हैं।



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