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मुस्लिम वेडिंग की रस्में होती हैं बहुत खास, जानें निकाह से लेकर वलीमे तक के रिवाज़
मुस्लिम वेडिंग में बहुत सारी खूबसूरत और मजेदार और रस्में होती हैं। ये रस्मे तीन तरह की होती हैं। शादी से पहले की रस्में, शादी की रस्में और शादी के बाद की रस्में। मुस्लिम शादी वास्तव में दुनिया की सबसे रोमांचक और कलरफुल शादियों में से एक है। समारोह को दूल्हा-दुल्हन, उनके परिवारों और मेहमानों के लिए यादगार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती है। मुस्लिम शादियां हिंदू शादियों की तरह ही होती हैं लेकिन उनकी रस्में काफी अलग होती हैं। जिस तरह से हिंदू विवाह में सात फेरे होते होते हैं, उसी तरह से मुस्लिम शादी में निकाह सबसे अहम होता है, जो शादी का आधार होता है। इसके अलावा आप खूबसूरत हाथ की कढ़ाई, डिजाइन पैटर्न के साथ सबसे खूबसूरत शादी के जोड़े जो दुल्हन पहनती है। मुस्लिम शादी में खाना तो लाजवाब होता है। कि आप शादी के दिनों के बाद भी इसके बारे में सोचेंगे।
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लाखों मुसलिम्स हैं। उनकी शादी के रीति-रिवाजों थोड़े बहुत ही अलग होते हैं। आइए एक नजर डालते हैं उनकी सभी रस्मों पर-

मुस्लिम प्री-वेडिंग - शादी की रस्में
सलात अल-इस्तिखारा
मुस्लिम कम्युनिटी में अरेंज मैरिज कॉमन है। पेरेंट्स अपने बच्चों के लिए सम्मानजनक और जिम्मेदार साथी खोजते हैं। सही मेल मिल जाने के बाद, दोनों परिवारों के बीच मीटिंग होती है, शादी की बातचीत को अंतिम रूप देने के बाद, शादी की तारीख इस्लामिक मंथ की डेट पर तय हो जाती है।

इमाम जामिन
इमाम ज़ामिन सलातुल इश्तिकारा के ठीक बाद होता है। इस दूसरे प्री-वेडिंग रस्म दुल्हे की खैरियत के लिए बांधा जाता है, उसे बुरी नजर से बचाने के लिए भी बांधा जाता है। इसमें दूल्हे की मां का दुल्हन के घर आना-जाना शामिल है।

मंगनी
इसे सगाई समारोह के रूप में भी जाना जाता है। यहां दोनों परिवार दूल्हा और दुल्हन के मिलन की घोषणा करते हैं। दोनों परिवारों के रिश्तेदारों और करीबी दोस्त एक फिक्स डेट पर अंगूठी के आदान-प्रदान की रस्म देखने के लिए आमंत्रित होते हैं।

मांझा समारोह
ये मुस्लिम शादी की रस्म हल्दी की रस्म के समान है। दुल्हन पीले रंग के कपड़े पहनती है और दूल्हे के परिवार द्वारा दी जाने वाली हल्दी के लेप उसे लगाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इससे उनकी त्वचा में नैचुरल ग्लो आता है। इसके बाद एक शादीशुदा दोस्त शादी तक हर जगह दुल्हन का साथ देता है। यह बहुत सारे गायन और मनोरंजन के साथ एक उत्सव है।

मेहंदी की रस्म
यह मुस्लिम विवाह समारोह शादी से एक या दो दिन पहले किया जाता है। यह मुख्य रूप से एक महिला समारोह है जहां दुल्हन के हाथ और पैर मेहंदी / मेंहदी से सजे होते हैं। फिर से खूब नाच-गाना होता है। इस घटना के बाद, उम्मीद की जाती है कि वह शादी तक अपना घर नहीं छोड़ेगी।

मुस्लिम शादी की रस्में
बारात
दूल्हा घोड़े या कार में शादी की जगह पर आता है। पूरे रास्ते में उसका परिवार और दोस्त उसके साथ जाते हैं। ढोल की धुन, म्यूजिक और डांस शामिल होते हैं। दूल्हा और उसका परिवार दुल्हन के लिए गिफ्ट्स लेकर आते हैं। उनके आगमन पर, दूल्हा और दुल्हन का भाई शर्बत शेयर करते हैं।

निकाह
ये मुसलमानों के बीच मेन रस्म समारोह है। कभी-कभी दूल्हा-दुल्हन को अलग-अलग कमरों में बिठा दिया जाता है या उनके बीच में पर्दा लगा दिया जाता है। काज़ी दुल्हन से पूछता है कि क्या वह दूल्हे से शादी करने के लिए तैयार है। इसी तरह से दुल्हे से भी पूछा जाता है। जब दोनों निकाह कबूल कर लेते है तो लोग एक दूसरे को गले लगते है और मुबारकबाद देते हैं।

मेहर
वो मनी अमाउंट होता है जो दूल्हा शादी के बाद दुल्हन को देता है। राशि तय की जाती है और मेहर की पेशकश की जाती है। ये इस्लाम में लड़की को उसके शौहर से दिया जाना वाला हक है। जो कोई खत्म नहीं कर सकता है।

पोस्ट - शादी की रस्में
रुखसत
ये मुस्लिम शादी उस समय को बताता है जब दुल्हन अपने परिवार से विदा लेती है। दुल्हन का पिता हमेशा उसकी रक्षा करने के लिए अपने बेटी का हाथ उसके शौहर को देता है।

वालिमा
यह मुस्लिम विवाह समारोह शादी के बाद का स्वागत समारोह है जिसे दूल्हे के परिवार द्वारा आयोजित किया जाता है। यह एक खुशी का अवसर है जहां दोस्तों और परिवार को दो परिवारों के बीच बंधन का जश्न मनाने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
(Photo Courtesy-Pinterest.com)



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