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Marriage Tips For Men: शादी करने का कर रहे हैं विचार तो हर भारतीय पुरुष को ध्यान में रखनी चाहिए ये अहम बातें
शादी को लेकर भारतीय समाज में जो परंपराएं चली आ रही हैं, उसमें से कई पंरंपराओं को अब तक खत्म हो जाना चाहिए था। लेकिन लोगों की सोंच ने कभी इसे समाप्त नहीं होने दिया। और ऐसा लगता है कि जैसे-जैसे लोग तरक्की करते जा रहे हैं शादी को लेकर नियम और परंपराएं भी बढ़ती जा रही हैं, नाम बस बदलते जा रहे हैं।

आज भी भारत में शादियां माता-पिता की मर्जी से होती हैं, अरेंज मैरिज को लोग अधिक प्राथमिकता देते हैं। आज भी पसंद की शादी को अच्छा नहीं माना जाता है। बहू का मतलब घर में काम करने वाली महिला तक ही सीमित है, भले ही घर की बहू कितनी भी पढ़ी लिखी क्यों ना हो और एक नौकरी भी करती हो, लेकिन उसे घर के सारे काम तो करने की पड़ेंगे, इस तरह की सोंच लोगों ने पहले से बनाकर रखी है।
लेकिन अगर भारतीय पुरुष अपने विचारों और रवैये में बदलाव ले आएं तो देश में शादी को लेकर बनीं परंपराएं खत्म हो सकती हैं। अगर आप एक समझदार और पढ़े लिखे पुरुष हैं तो यहां पर हम कुछ ऐसी बातें शेयर करने जा रहे हैं जो शादी करने से पहले हर भारतीय पुरुष को ध्यान में रखी जानी चाहिए, इससे वो अपने परिवार के साथ ही देश की तरक्की में भी योगदान दे सकता है-

-पुरूष सिर्फ इस बात को ना सोंच कर शादी करे कि अब उसे अपना वंश आगे बढ़ाना है तो शादी कर लें। शादी करना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। शादी को लेकर गलत फैसला आपकी लाइफ भी खराब कर सकता है। इसलिए सिर्फ समाज और परिवार की बातों में आकर शादी का फैसला ना लें। इस फैसले को बहुत ही सोंच विचार कर करें। आपके साथ ही एक और जिंदगी आपकी लाइफ का हिस्सा हो जाती है, जो आप पर निर्भर होती है, आपका प्यार, विश्वास उसे चाहिए होता है। इसलिए ये फैसला सोंच विचार कर लें।

-आज के वक्त में एक नियम बन चुका है कि शादी के लिए लड़की के घर वालों को लड़के वालों को दहेज तो देना ही पड़ेगा, भले ही लड़की कितनी भी पढ़ी-लिखी और नौकरी करने वाली हो। ससुराल वाले अक्सर ये कहते मिल जाते हैं कि दहेज तो लड़की के पिता ने अपनी बेटी को दिया है, ऐश तो वहीं करेगी। क्या ये बिल्कुल सच है ? दहेज की वजह से ना जानें कितनी लड़कियों को प्रताड़ित किया जाता है, उनका शोषण होता है, यहां तक की उनको मार भी दिया जाता है। ये लड़के की जिम्मेदारी है कि वो इसके खिलाफ अपने घर में आवाज उठाए और बिना दहेज की शादी की बाद कहे।

-आज भी देश में कुंवारी लड़की की वर्जिनिटी लोगों के लिए मायने रखती है। अगर शादी के बाद पता चलता है कि लड़की वर्जिन नहीं है तो उसे ससुराल के साथ ही समाज भी दरकिनार करने लग जाता है। वो सिर्फ लड़की की वर्जिनिटी से उसके चरित्र को दागदार बना देता है। भले खुद के चरित्र पर ना जानें कितने दाग हों। ये एक पुरूष की समझदारी ही होगी कि अगर उसकी पत्नी उसे शादी के वक्त वर्जिन ना लगे तो वो उससे इस संबंध में बात करें। अक्सर लड़कियों की वर्जिनिटी स्पोर्ट्स, किसी चोट के कारण या फिर बचपन में किसी बीमारी की वजह से भी झिल्ली टूट जाती है।

-लड़के वालों के मन में ये बात बसी हुई है कि शादी के वक्त सारा खर्च तो लड़की के माता पिता ही उठाएंगे। क्या ये सही है ? लोगों को इस बात का अहसास होते हुए भी उनके ऊपर कितना बोझ होता है, फिर भी उनका दिल इस बात से नहीं पिघलता है। लेकिन लड़का इस बारें में लड़की के घर वालों से बात कर सकता है और अपनी बडप्पन और समझदारी दिखाते हुए सारे खर्च में बराबर के भागीदार होने की बात कर सकता है।

-शादी के बाद लड़की के उपर उसका सरनेम बदलने का दबाव डालना क्या ये सही है ? जो सरनेम वो अपने पैदा होने के बाद से लगाती आई है एक झटके में आप उसे बदलने की कोशिश करते हैं। लड़की अपने सरनेम के साथ भी आपके परिवार का हिस्सा हो सकती है। क्या सरनेम बदलने से वो भी बदल जाएगी ? अपनी होने वाली पत्नी को अपने सरनेम बदलने को लेकर किसी तरह से दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।



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