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Ramadan 2026: क्या रोजे की हालत में पति-पत्नी एक-दूसरे को 'Kiss' कर सकते हैं? जानें कपल के लिए रमजान में नियम
Ramadan Me Sambhog kar Sakte Hain Ya Nahin: इस्लाम धर्म में रमजान का महीना इबादत, सब्र और आत्म-संयम का प्रतीक है। इस पाक महीने में दुनिया भर के मुसलमान सहरी से इफ्तार तक अन्न और जल का त्याग कर रोजा रखते हैं। रोजा सिर्फ भूख और प्यास को सहने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी पांचों इंद्रियों और इच्छाओं पर नियंत्रण रखने की एक आध्यात्मिक साधना भी है। अक्सर शादीशुदा जोड़ों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या रोजे की हालत में पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति प्रेम का इजहार कर सकते हैं?
क्या 'Kiss' करने या गले लगाने से रोजा टूट जाता है? इन बारीकियों को समझना बेहद जरूरी है ताकि आपकी इबादत में कोई कमी न रहे। आइए, जानते हैं कुरान और सुन्नत की रोशनी में शादीशुदा जोड़ों के लिए रमजान के क्या नियम हैं।

क्या रोजे में 'Kiss' करना जायज है? (Is Kissing Allowed During Fast?)
इस्लामिक विद्वानों और हदीसों के संदर्भ में, रोजे के दौरान पति-पत्नी का एक-दूसरे को चूमना या प्यार जताना पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन इसके साथ कुछ महत्वपूर्ण शर्तें जुड़ी हैं जैसे कि यदि कोई व्यक्ति खुद पर नियंत्रण रख सकता है और उसे यकीन है कि यह क्रिया आगे शारीरिक संबंध तक नहीं बढ़ेगी, तो इसकी अनुमति है। यदि 'Kiss' करने से भावनाओं के अनियंत्रित होने और रोजा टूटने (शारीरिक संबंध बनने) का अंदेशा हो, तो इससे बचना ही 'बेहतर' और 'सुरक्षित' माना गया है।
शारीरिक संबंध को लेकर क्या है सख्त पाबंदी? (Rules on Intimacy)
इस्लाम में रमजान का महीना सबसे पाक महीना माना जाता है। इस दौरान पति-पत्नी को लेकर कई सारे नियम हैं। रमजान के महीने में रोजेदार के मन में सवाल उठता है कि क्या मियां-बीवी रोजे के दौरान शारीरिक संबंध बना सकते हैं या नहीं? बता दें कि रमजान के दौरान वैवाहिक संबंधों के नियम समय के अनुसार बदलते हैं। रोजे की हालत में दिन के समय शारीरिक संबंध बनाना पूरी तरह वर्जित और 'हराम' है। ऐसा करने से न केवल रोजा टूट जाता है, बल्कि इसके लिए 'कफ्फारा' (प्रायश्चित) देना अनिवार्य होता है। इसके अलावा इफ्तार के बाद से लेकर सहरी के समय तक पति-पत्नी के बीच शारीरिक संबंध जायज हैं। कुरान की सूरह अल-बकराह (आयत 187) में इसकी स्पष्ट अनुमति दी गई है।
अगर गलती से रोजा टूट जाए तो क्या है 'कफ्फारा'?
यदि कोई व्यक्ति रोजे के दौरान जानबूझकर शारीरिक संबंध बनाता है, तो इस्लाम में इसका कड़ा प्रायश्चित बताया गया है। ऐसा करने वाले को लगातार 60 रोजे रखने पड़ते हैं। यदि वह रोजा रखने में असमर्थ है, तो 60 मिस्कीनों (जरूरतमंदों) को खाना खिलाना पड़ता है।
रोजेदार कपल के लिए कुछ जरूरी सावधानियां
इंद्रिय संयम: रोजा रूह की पाकीजगी का नाम है, इसलिए दिन के समय ऐसी किसी भी क्रिया से बचें जो उत्तेजना पैदा करे।
इबादत पर ध्यान: रमजान का समय दुनियादारी से हटकर अल्लाह की इबादत में बिताने का होता है, अतः कपल्स को साथ मिलकर नमाज और कुरान की तिलावत पर ध्यान देना चाहिए।



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