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क्या आप वाकई भावनात्मक रुप से मेच्योर हैं, तो इन सवाल का जवाब दें
हम सभी यही मानते हैं कि जब व्यक्ति की उम्र बढ़ती जाती है तो वह अधिक समझदार होता चला जाता है। इतना ही नहीं, इमोशनली भी वह काफी मैच्योर हो जाता है। हालांकि, यह पूरी तरह से सच नहीं है। ऐसे बहुत से लोग होते हैं, जो कम उम्र में काफी मैच्योर होते हैं। वहीं, कुछ लोग उम्र बढ़ने पर इमोशनल लेवल पर उतने ही नादान होते हैं।
ऐसे लोगों का स्वभाव काफी अलग होता है और इसलिए उनकी हरकतों से ही लोग उनके बारे में जान जाते हैं। जो लोग इमोशनली मैच्योर नहीं होते हैं, वे अक्सर बिना सोचे-समझे किसी भी बात पर रिएक्ट कर देते हैं। ऐसे लोग अपने इमोशन्स को सही तरह से हैंडल करना नहीं जानते हैं।

तो चलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसे ही लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जो इमोशनली इममैच्योर लोगों में नजर आ सकते हैं-
माफी मांगने से मना करना
जो लोग इमोशनली मैच्योर नहीं होते हैं, वे अक्सर अपनी गलती पर भी माफी मांगने से इनकार करते हैं। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि माफ़ी मांगने से उनके अहंकार को ठेस पहुंचती है। ऐसे लोग किसी भी सिचुएशन को इमोशनली मैच्योर तरीके से हैंडल नहीं करते हैं। वे अपने व्यवहार की ज़िम्मेदारी लेने के बजाय इममैच्योर बिहेव करते हैं और माफी मांगने की जगह खुद के बचाव के लिए बहाने बनाते हैं।
हर चीज़ का जवाब होना
जो लोग इमोशनली मैच्योर होते हैं, वे अमूमन दूसरों की बातों को ध्यान से सुनते हैं और उनकी बात समझने की कोशिश करते हैं। वे भावनात्मक रूप से इतने मैच्योर होते हैं कि सामने वाले व्यक्ति के शब्दों की जगह उनकी भावनाओं को समझने का प्रयास करते हैं। वहीं जो लोग इमोशनली मैच्योर नहीं होते हैं, वे अपने व्यक्तित्व के आसपास एक शील्ड बनाकर रखते हैं। ऐसे लोग सामने वाले व्यक्ति की बात सुनने की कोशिश ही नहीं करते हैं। अगर उनसे कुछ कहा जाता है तो उनके पास हर चीज का जवाब होता है। वे कभी भी इस बात को स्वीकार नहीं करते हैं कि उन्हें उस विषय की जानकारी नहीं है। यह कहीं ना कहीं उनके अहंकार को भी आहत करता है।
चुप हो जाना
जो लोग इमोशनली मैच्योर होते हैं, वे किसी भी मुद्दे को ओपन कम्युनिकेशन के जरिए सुलझाने की कोशिश करते हैं। लेकिन जो लोग इमोशनली मैच्योर नहीं होते हैं, वे अक्सर किसी लड़ाई या झगड़े को सुलझाने की जगह एकदम चुप हो जाते हैं। इसे एक मैन्युपुलेटिव बिहेवियर माना जाता है। उन्हें लगता है कि ऐसा करके वे सामने वाले व्यक्ति को एक तरह की सजा दे रहे हैं। लेकिन उनका यह व्यवहार उनकी इममैच्योरिटी को दर्शाता है। इतना ही नहीं, इससे सामने वाले व्यक्ति की मेंटल हेल्थ पर भी काफी बुरा असर पड़ता है।
इमोशंस पर कोई कंट्रोल न होना
इमोशनली मैच्योर व्यक्ति को यह पता होता है कि उसे किस स्थिति में किस तरह बिहेव करना है। अगर उसके साथ कुछ ऐसा होता है, जो उसे पसंद नहीं होता है, तब भी वे सिचुएशन को इमोशनली मैच्योर तरीके से हैंडल करते हैं। वहीं, जो लोग इमोशनली मैच्योर नहीं होते हैं, उनका अपनी फीलिंग्स या इमोशंस पर कोई कंट्रोल नहीं होता। हो सकता है कि वे किसी भी छोटी सी बात पर रोने लगे या फिर एकदम से गुस्सा हो जाएं। यहां तक कि ऐसे लोग बोलने से पहले सोचते नहीं हैं।
हरवक्त अटेंशन चाहना
जो लोग इमोशनली मैच्योर नहीं होते हैं, उन्हें हमेशा ही दूसरों की अटेंशन की चाहत होती है और वे इसकी डिमांड करते रहते हैं। ऐसे लोग अक्सर ऐसी चीजें करते रहते हैं, जिससे उन्हें अपने आसपास के लोगों की अटेंशन मिले। अगर उन्हें अंटेशन नहीं मिलती है तो वे बेचारा होने का दिखावा करते हैं।



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