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Dua e Ashura: मोहर्रम महीने की आशूरा पर पढ़ी जाती है ये दुआ, आप भी जरूर देखें दुआ यौमे आशूरा
Dua e Ashura: मुहर्रम की 9वीं और 10वीं तारीख को मनाया जाने वाला आशूरा का दिन इस्लामी कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण घटना है। इस दिन रोजा रखा जाता है और विशेष नमाज और दुआ आदि अदा की जाती हैं। दुनिया भर के मुसलमान इस पवित्र दिन को मनाने के लिए एकत्र होते हैं।
आशूरा के दिन मुसलमान ज़ियारत आशूरा, दुआ अलकामा और सूरह इखलास जैसी विशेष प्रार्थनाएं करते हैं। मुहर्रम की पहली दस रातों के दौरान ईशा की नमाज़ के बाद कलिमा तौहीद पढ़ने की सलाह दी जाती है। इस दिन कई तरह की नफ़िल नमाज़ें भी अदा की जाती हैं।

ज़ुहर की नमाज़ से पहले, मुसलमानों को 4 रकात नफ़िल नमाज़ पढ़नी चाहिए, उसके बाद 6 रकात नमाज़ 3 सलाम के साथ और फिर 4 रकात नफ़िल नमाज़ पढ़नी चाहिए। इन अतिरिक्त नमाज़ों का बहुत महत्व है और पवित्र कुरान में इनका उल्लेख किया गया है।
ऐतिहासिक घटना
आशूरा पैगंबर मुहम्मद के पोते हुसैन इब्न अली की शहादत की याद में भी मनाया जाता है, जो 680 ई. में कर्बला की लड़ाई में मारे गए थे। यह घटना दुनिया भर के मुसलमानों के लिए गहरा ऐतिहासिक महत्व रखती है।
मुसलमान सार्वजनिक जुलूसों और सभाओं के लिए एकत्र होते हैं, जहां भाषण दिए जाते हैं, कुरान का पाठ किया जाता है, और हुसैन इब्न अली के बलिदान के सम्मान में प्रार्थना की जाती है।
दुआ ए आशूरा (Ashura Ki Dua)
एक बार पढ़ें
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
या क़ाबि ल तौबति आदमा यौमा आशूराअ
या फारिजा करबी ज़िन्नूनी यौमा आशूराअ
या जामी अ़ शमली याक़ूबा यौमा आशूराअ
या सामी अ़ दाअ़वती मूसा व् हारूना यौमा आशूराअ
या मुगि सा इब्राहिमा मिनन्नारी यौमा आशूराअ
या राफ़ीआ़ इदरीसा इलस्समाई यौमा आशूराअ
या मुजी बा दाअ़वती सालिहिन फिन्नाक़ती यौमा आशूराअ
या नासि रा सय्यीदिना मुह़म्मदिन सल्लल्लाहु तआ़ला अलैहि वा आलिही वसल्लमा यौमा आशूराअ
या रह़मानद्दुनिया वल आख़िरती व् रह़िमाहुमा सल्ली अ़ला सय्यीदिना मुह़म्मदिंव व् अ़ला आली सय्यीदिना मुह़म्मदिंव व सल्ली अ़ला जमी-इल अम्बियाई वल मुरसलीना वक़दी ह़ाजातिना फिद्दुनिया वल आख़िरती व अतिल उमरना फी ताअ़तीका व मह़ब्बातिका व रिदाका व अह़इना ह़यातन तय्यबतंव्वा तवफ़्फ़ना अ़लल-ईमानी वल इस्लामी बिरह़मतिका या अरह़मर्राह़िमीन
अल्लाहुम्मा बीइज़्ज़िल ह़सानी व् अखीही व उम्मीही व् अबिहि व जद्दीही व् बनिहि फर्रिज अ़न्ना मा नाह़नू फ़ीहि (फिर 7 बार ये दुआ पढ़ें।)
सुब्ह़ानल्लाही मिल-अलमिज़ानी व् मुन्तहल-इल्मी व् मबलग़र्रिदा व ज़ी-नतल अ़र्शी लामल जाअ वला मन जाअ मिनल्लाही इल्ला इलैहि । सुब्ह़ानल्लाही अ़दादश्शफई वल वतरि व अ़दादा कलीमा-तिल्लाहित्ताम्माती कुल्लीहा नसअलु-कस्सलामता बिरह़मतिका या अर-ह़मर्राह़िमीन । व हुवा ह़सबुना व निअ़मल वकील । निअ़मल मौला व निअ़मन्नसीर । वलाह़ौला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम । व सल्लल्लाहु तआ़ला अला सय्यीदिना मुह़म्मदिंव व्अ़ला आलिहि व सह़बिहि वअ़लल मु-मिनीना वल मु-मिनाती वल मुस्लिमीना वल मुस्लिमाति अ़दादा ज़र्रातिल वुजुदी व् अ़दादा मअ़लुमातिल्लाही वलह़म्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन । आमीन । सुम्मा आमीन ।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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