Latest Updates
-
क्यों मनाते हैं International Olympic Day? जानें इसका इतिहास, महत्व और इस साल की खास थीम -
कौन हैं WhatsApp के नए CEO कुणाल शाह? न इंजीनियरिंग, न MBA डिग्री, फिर भी करोड़ों में है नेट वर्थ -
Mahesh Navami 2026: महेश नवमी आज, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ माह का आखिरी बड़ा मंगल आज, इन उपायों को करने से मिलेगी हनुमान जी की विशेष कृपा -
Happy Mahesh Navami 2026 Wishes: महेश जिनका नाम है...महेश नवमी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 23 June 2026: मंगलवार को इन 4 राशियों पर बरसेगी बजरंगबली की कृपा, जानें अपना भाग्य -
शाम 7 बजे के बाद गलती से भी मत करना ये 5 काम, बढ़ता है हार्ट अटैक का रिस्क -
बिना मारे चूहों को घर से भगाने का देसी तरीका! आटे में मिलाकर रख दें ये एक चीज, फिर कभी नहीं आएंगे नजर -
Pahadi Crispy Snack Singal Recipe: घर पर बनाएं उत्तराखंड का पारंपरिक और कुरकुरा स्वाद -
कौन हैं पंकज त्रिपाठी के भाई बिजेंद्र नाथ तिवारी? आखिर क्यों हुआ जानलेवा हमला, गंभीर हालत में AIIMS में भर्ती
Maha Kumbh 2025: इस साल का महाकुंभ है ख़ास, पौष पूर्णिमा और रवि योग के दुर्लभ संयोग के साथ होगा इसका आगाज़
Maha Kumbh 2025: प्रयागराज, भारत में 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक होने वाला महाकुंभ मेला न केवल भारत की समृद्ध संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि यह एक विशाल आध्यात्मिक आयोजन भी है, जो दुनियाभर के भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
12 सालों में एक बार गंगा, यमुना और सरस्वती नदियों के पवित्र संगम पर आयोजित यह त्योहार आस्था, भक्ति और परंपरा का अनोखा संगम है। महाकुंभ के दौरान गंगा स्नान को बेहद पवित्र माना जाता है। यह मान्यता है कि इस स्नान से पापों का क्षय होता है और मोक्ष प्राप्ति का मार्ग खुलता है।

2025 का महाकुंभ (Maha Kumbh 2025 Kab Se Shuru Hai)
2025 का महाकुंभ मेला खास है क्योंकि इसका पहला दिन दो शुभ योगों से सुसज्जित है। पहला है पौष पूर्णिमा, जिसे दान और स्नान का पर्व माना जाता है। इस दिन स्नान और दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। दूसरा शुभ योग है रवि योग, जो सुबह 7:15 बजे से 10:38 बजे तक रहेगा। ये दोनों संयोग महाकुंभ के पहले दिन को और अधिक पवित्र और फलदायी बनाते हैं।
मुख्य स्नान पर्व की तिथियां (Mahakumbh 2025 Snan Dates)
महाकुंभ 2025 में छह प्रमुख स्नान पर्व होंगे, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक लाभ का बड़ा अवसर हैं:
1. 13 जनवरी - पौष पूर्णिमा: पवित्रता और आत्मशुद्धि के लिए महत्वपूर्ण।
2. 14 जनवरी - मकर संक्रांति: इस दिन स्नान और दान से पापों का क्षय होता है। गर्म कपड़े, तिल, गुड़ और भोजन दान करने की परंपरा है।
3. 29 जनवरी - मौनी अमावस्या: यह दिन मोक्ष प्राप्ति के लिए खास है। इस दिन मौन धारण और उपवास करने का महत्व है।
4. 3 फरवरी - वसंत पंचमी: वसंत ऋतु के स्वागत का पर्व। इस दिन स्नान से विशेष पुण्य मिलता है।
5. 12 फरवरी - माघी पूर्णिमा: पहले से ही शुभ मानी जाने वाली इस पूर्णिमा पर महाकुंभ का महत्व इसे और खास बनाता है।
6. 26 फरवरी - महाशिवरात्रि: यह महाकुंभ का अंतिम स्नान पर्व है। इस दिन उपवास और भगवान शिव की आराधना की जाती है।
ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का महत्व (Maha Kumbh Snan Timings)
इन विशेष दिनों पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान को सबसे लाभकारी माना गया है। ब्रह्म मुहूर्त सुबह सूरज उगने से पहले का समय होता है, जो आध्यात्मिक लाभ के लिए आदर्श माना जाता है। इन तिथियों के लिए ब्रह्म मुहूर्त के समय इस प्रकार हैं:
- 13 और 14 जनवरी: सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक।
- 29 जनवरी: सुबह 5:25 बजे से 6:18 बजे तक।
- 3 फरवरी: सुबह 5:23 बजे से 6:16 बजे तक।
- 12 फरवरी: सुबह 5:19 बजे से 6:10 बजे तक।
- 26 फरवरी: सुबह 5:09 बजे से 5:59 बजे तक।
महाकुंभ का महत्व (Significance of Maha Kumbh in Hindi)
महाकुंभ मेला भारतीय परंपराओं और धार्मिक आस्था का प्रतीक है। गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर आयोजित यह मेला करोड़ों श्रद्धालुओं को एक साथ जोड़ता है। इसके पवित्र स्नान और शुभ तिथियां आध्यात्मिक शुद्धिकरण और पुनर्नविकरण का अवसर प्रदान करती हैं। जैसे-जैसे ये तिथियां करीब आती हैं, दुनियाभर से आने वाले भक्तों के बीच उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का स्तर बढ़ता जा रहा है। महाकुंभ का हर पल आस्था और भक्ति से ओतप्रोत होता है, जो श्रद्धालुओं को अलौकिक शांति और आशीर्वाद का अनुभव कराता है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications