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अमृत स्नान से पहले नागा साधु क्यों लगाते हैं पूरे शरीर में भस्म, जानें पौराणिक और वैज्ञानिक कारण
Mahakumbh 2025: नागा साधु, भगवान शिव के परम भक्त, अमृत स्नान से पहले अपने शरीर पर भस्म का लेप करते हैं।
भस्म, जिसे भभूत या राख भी कहा जाता है, सनातन धर्म में धार्मिक, आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसे वैराग्य और सांसारिक मोह-माया से मुक्त होने का प्रतीक माना गया है।

भस्म लगाने के पौराणिक कारण
भगवान शिव, जिन्हें भस्मधारी भी कहा जाता है, अपने शरीर पर भस्म रमाते हैं। नागा साधु शिव भक्ति में लीन रहने के लिए भस्म का उपयोग करते हैं। यह उन्हें सांसारिक बंधनों से दूर रखता है और आत्मिक शुद्धि का अनुभव कराता है। भस्म का लेप साधुओं को यह याद दिलाता है कि जीवन नश्वर है और केवल भक्ति ही जीवन का अंतिम सत्य है।
भस्म के वैज्ञानिक लाभ
1. त्वचा संक्रमण से बचाव: भस्म में ऐसे तत्व होते हैं जो हानिकारक बैक्टीरिया और जीवाणुओं को नष्ट करते हैं, जिससे त्वचा संक्रमण नहीं होता।
2. शरीर के तापमान को नियंत्रित करना: भस्म शरीर को ठंड और गर्मी दोनों से बचाने का काम करती है। यह एक इंसुलेटर की तरह कार्य करती है और साधुओं को कठोर मौसम में भी सहज रखती है।
3. शारीरिक और मानसिक संतुलन: भस्म का उपयोग साधुओं को ध्यान और साधना के दौरान एकाग्रता में मदद करता है।
भस्म बनाने की प्रक्रिया
भस्म तैयार करने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों का पालन किया जाता है।
- सामग्री: इसमें पीपल, पाखड़, बेलपत्र, केला और गाय के गोबर का उपयोग होता है।
- तैयारी: इन सामग्रियों को हवन कुंड में जलाकर राख बनाई जाती है। इस राख को छानकर कच्चे दूध में मिलाया जाता है और सात बार अग्नि में तपाकर तैयार किया जाता है। यह भस्म शुद्ध और पवित्र मानी जाती है।
महाकुंभ 2025 और नागा साधु
प्रयागराज में 2025 का महाकुंभ विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह आयोजन 144 साल बाद हो रहा है। यहां 40-45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। नागा साधुओं के अखाड़े पहले ही प्रयागराज पहुंच चुके हैं। श्रद्धालु संगम में स्नान कर अपने पाप धोने और साधुओं के आशीर्वाद लेने के लिए यहां आते हैं।
नागा साधु का भस्म लगाना न केवल उनकी धार्मिक परंपरा है, बल्कि यह उनके तप, भक्ति और शारीरिक स्वास्थ्य का भी हिस्सा है। महाकुंभ जैसे आयोजन में इन साधुओं को करीब से देखना सनातन संस्कृति और आस्था की गहराई को समझने का दुर्लभ अवसर प्रदान करता है। यह अनुभव जीवन में एक बार ही मिलता है, जिसे हर किसी को देखना चाहिए।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



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