Latest Updates
-
Gangaur Vrat 2026: 20 या 21 मार्च, किस दिन रखा जाएगा गणगौर व्रत? नोट करें तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त -
घर में लाल चीटियों का दिखना शुभ है या अशुभ? जानें शकुन शास्त्र के ये 5 बड़े संकेत -
गर्दन का कालापन दूर करने के लिए रामबाण हैं ये 5 देसी नुस्खे, आज ही आजमाएं -
आपके 'नन्हे कान्हा' और 'प्यारी राधा' के लिए रंगों जैसे खूबसूरत और ट्रेंडी नाम, अर्थ सहित -
15 या 16 मार्च कब है पापमोचिनी एकादशी? जानें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पारण का समय -
Women's Day 2026: चांद पर कदम, जमीन पर आज भी असुरक्षित है स्त्री; जानें कैसे बदलेगी नारी की किस्मत -
Women’s Day 2026: बचपन के हादसे ने बदली किस्मत, अपनी मेहनत के दम पर मिताली बनीं Supermodel -
Happy Women's Day 2026: महिला दिवस पर 'मां' जैसा प्यार देने वाली बुआ, मौसी और मामी को भेजें ये खास संदेश -
Rang Panchami 2026 Wishes: रंगों की फुहार हो…रंग पंचमी पर प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Women's Day 2026 Wishes for Mother: मेरी पहली 'सुपरवुमन' मेरी मां के नाम खास संदेश, जिसने दुनिया दिखाई
Diwali Puja in Periods: मासिक धर्म के दौरान दिवाली की पूजा करना शुभ या अशुभ?
Diwali Puja in Periods: दिवाली, जिसे दीपावली भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम के अयोध्या लौटने की खुशी में घर-घर दीप जलाए जाते हैं।
मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जिससे धन, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। दिवाली पर घरों की साफ-सफाई, सजावट, मिठाइयां बाँटना और पटाखे फोड़ने की परंपरा है। यह पर्व भाईचारे, परिवार और मित्रों के साथ खुशियां मनाने का अवसर भी है।

दिवाली के दिन कई तरह के नियमों का पालन किया जाता है ताकि देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त की आ सके। आइये इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि पीरियड्स के दौरान दिवाली की पूजा की जा सकती है या नहीं।
पीरियड्स में दिवाली पूजा कर सकते हैं या नहीं?
मासिक धर्म में पूजा करने को लेकर समाज में कई मान्यताएँ और धारणाएँ हैं, और यह विषय दिवाली जैसे महत्वपूर्ण त्योहार पर अधिक संवेदनशील बन जाता है। हिंदू धर्म के कई परंपरागत मान्यताओं में मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इसका मुख्य कारण यह माना जाता है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाएं शारीरिक रूप से कमजोर होती हैं, और उस समय उन्हें आराम की आवश्यकता होती है। इसी कारण, उन्हें पूजा से दूर रखा जाता है ताकि वे आराम कर सकें और अपनी सेहत का ख्याल रख सकें। ऐसे में महिलाओं को मानसिक पूजा करनी चाहिए और पूजा से जुड़े किसी भी सामान को हाथ नहीं लगाना चाहिए।
हालाँकि, बदलते समय के साथ इस विषय पर दृष्टिकोण भी बदला है। कुछ लोगों का मानना है कि मासिक धर्म एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जिसे भगवान द्वारा ही बनाया गया है और यह किसी भी प्रकार से अशुद्ध या अपवित्र नहीं है। इस नई सोच के अनुसार, महिलाएं मासिक धर्म में भी पूजा कर सकती हैं। वे मानते हैं कि पूजा का संबंध केवल बाहरी स्वच्छता से नहीं बल्कि आत्मिक शुद्धता से होता है, और यदि व्यक्ति का मन और भावना शुद्ध है, तो वह पूजा कर सकता है।
इसके अलावा, बहुत से आधुनिक परिवार और धार्मिक विशेषज्ञ भी इस धारणा के समर्थक हैं कि मासिक धर्म में पूजा-पाठ करना व्यक्तिगत चुनाव का मामला है। महिला की सुविधा और मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है कि वह पूजा करना चाहती है या नहीं। विशेषकर दिवाली के दौरान, जो कि खुशियों और ऊर्जा का पर्व है, महिलाएं यदि खुद को सक्षम महसूस करती हैं, तो वे पूजा कर सकती हैं।
अंततः, यह पूरी तरह से व्यक्तिगत विश्वास, परंपरा और सोच पर निर्भर करता है। आज के दौर में, जहां महिलाओं की स्वतंत्रता और स्वाभिमान को प्राथमिकता दी जाती है, वहां इस विषय पर व्यक्तिगत चुनाव और विश्वास को मान्यता दी जा रही है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











