Latest Updates
-
Kids Favourite Banana Pancake Recipe: घर पर बनाएं बेहद सॉफ्ट और हेल्दी पैनकेक -
Aaj Ka Rashifal 19 June 2026: शुक्रवार को इन 4 राशियों का खुलेगा किस्मत का ताला, धन लाभ के साथ मिलेगी बड़ी खुशखबरी -
Quick Dinner 10 Min Egg Bhurji Recipe: झटपट बनाएं चटपटी और मसालेदार अंडा भुर्जी -
International Yoga Day 2026: थायराइड से छुटकारा पाने के लिए रोज करें ये 5 योगासन, कुछ ही दिनों में दिखेगा असर -
Gajar Ka Murabba Recipe: सेहत और स्वाद का बेहतरीन संगम, जानें बनाने की आसान विधि -
Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, वरना अधूरा रह जाएगा व्रत -
Muharram 2026: कब है आशूरा? जानें मुहर्रम की 10वीं तारीख का धार्मिक महत्व और इतिहास -
Father’s Day 2026 Gift Ideas: पापा के लिए ढूंढ रहे हैं खास तोहफा? फादर्स डे पर दें ये 7 बेहतरीन गिफ्ट्स -
Quick 30 Minute Egg Biryani Recipe: घर पर बनाएं रेस्टोरेंट जैसा स्वाद -
कौन हैं सैंटी शर्मा, जिनकी Bigg Boss 20 में हो सकती है एंट्री? कॉकरोच जनता पार्टी की वजह से हुए थे वायरल
Dusra Surya Grahan 2024: पितृ पक्ष अमावस्या पर लगेगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण, जानें इसका प्रभाव
Dusra Surya Grahan 2024: इस साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार 2 अक्टूबर की रात को लगेगा। चूंकि यह रात में होगा, इसलिए यह भारत में दिखाई नहीं देगा। सूर्य ग्रहण के दौरान लगने वाला सूतक काल किसी भी शुभ कार्य पर रोक लगाता है। हालांकि, चूंकि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए सूतक काल लागू नहीं होगा।

सर्व पितृ अमावस्या का महत्व
सूर्य ग्रहण सर्व पितृ अमावस्या के साथ ही पड़ रहा है, जो श्राद्ध पक्ष का अंतिम दिन है। यह अवधि 17 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को समाप्त होगी। सनातन धर्म में इस दिन का बहुत महत्व है क्योंकि इस दिन पूर्वजों के सम्मान में श्राद्ध और तर्पण जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं।
सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर को रात 9:13 बजे शुरू होगा और 3 अक्टूबर को सुबह 3:17 बजे समाप्त होगा। इस प्रकार ग्रहण की कुल अवधि 7 घंटे 4 मिनट होगी। चूंकि यह रात में होगा, इसलिए यह पूरे भारत में दिखाई नहीं देगा।
कहां नजर आएगा साल का दूसरा सूर्य ग्रहण
हालांकि यह ग्रहण भारत में नहीं देखा जाएगा, लेकिन इसका असर उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका में देखने को मिलेगा। इन क्षेत्रों में इस खगोलीय घटना का पूरा असर देखने को मिलेगा।
सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश पृथ्वी तक नहीं पहुँच पाता। यह स्थिति केवल अमावस्या के दिन ही होती है। इसके विपरीत, चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन होता है।
धार्मिक महत्व
सूर्य ग्रहण का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। ग्रहण के दौरान पारंपरिक रीति-रिवाजों के तहत मंदिर के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। हालांकि, इस बार भारत में सूर्य ग्रहण अदृश्य होने के कारण इन रीति-रिवाजों का सख्ती से पालन नहीं किया जा सकेगा।
इन खगोलीय घटनाओं को समझने से हमें उनके सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व को समझने में मदद मिलती है। हालाँकि यह विशेष सूर्य ग्रहण अपने समय और दृश्यता संबंधी बाधाओं के कारण भारत में दैनिक जीवन को प्रभावित नहीं करेगा, लेकिन यह वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण घटना बनी हुई है।
नोट: यह सूचना इंटरनेट पर उपलब्ध मान्यताओं और सूचनाओं पर आधारित है। बोल्डस्काई लेख से संबंधित किसी भी इनपुट या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी और धारणा को अमल में लाने या लागू करने से पहले कृपया संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications