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क्या आप जानते हैं चंद्र ग्रहण के दौरान जन्म लेने वाले बच्चे कैसे होते है? जानें क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र
Chandra Grahan 2025: 7 सितंबर 2025 को साल का दूसरा और पूर्ण चंद्र ग्रहण है। ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण काल को बेहद संवेदनशील समय माना गया है। माना जाता है कि इस अवधि का असर न केवल प्रकृति और इंसानों पर पड़ता है, बल्कि उस समय जन्म लेने वाले बच्चों के स्वभाव और भविष्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है। लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि चंद्र ग्रहण के दौरान जन्म लेने वाले बच्चों का भविष्य कैसा होता है? खासतौर पर उन लोगों के लिए जिनके घर में ग्रहण के आसपास बच्चे का जन्म होने वाला हो।
अब ग्रहण नजदीक है तो लोगों की सर्चिंग चालू हो गई है कि ग्रहण में जन्म लेने वाले बच्चे कैसे होते हैं। अगर आपका भी यही सवाल है तो जवाब हमारे पास है। आइए जानते हैं, ज्योतिष शास्त्र चंद्र ग्रहण के समय जन्म लेने वाले बच्चों के बारे में क्या कहता है।
कैसे होते हैं ग्रहण काल में जन्में बच्चे?
ज्योतिष के ज्ञाता गोविंद शास्त्री ने बताया कि ग्रहण काल में चाहे वो चंद्र ग्रहण हो या सूर्य ग्रहण। सूतक लगने से लेकर मोक्ष काल तक अगर आपके घर में, परिवार में या रिश्तेदारी में किसी बच्चे का जन्म होता है तो वो बच्चा कई तरह के विकारों के साथ पैदा होता है। या तो वो मानसिक रोगी होगा, या उसके शरीर का कोई अंग नहीं होगा, या फिर ज्यादा होगा।

ग्रहण में जन्मे बच्चों की आयु कितनी होती है?
ज्योतिष ने ग्रहण काल में जन्म लेने वाले बच्चों की उम्र के बारे में भी बताते हुए कहा कि ऐसे बच्चे कम आयु के होते हैं। ऐसे बच्चे बचपन से ही किसी ऐसे असाध्य रोग से ग्रसित हो सकते हैं जिसका इलाज ही न हो। ऐसे में जब भी गर्भाधान करने का प्लान बनाएं उससे पहले तिथि और नक्षत्र का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि जिस नक्षत्र में बच्चा गर्भ में आता है उसी में उसका जन्म होता है। ऐसे में जब भी पति-पत्नी शारीरिक संबंध बच्चे की प्लानिंग के लिए बना रहे हों तो ये जरूर पता कर लें कि अगर उस दौरान गर्भ धारण होता है तो उसका जन्म किस समय होगा। हालांकि किसी का जन्म और मृत्यु निश्चित नहीं है। मगर व्यक्ति को अपनी ओर से सावधान रहना जरूरी है।
गर्भाधान के समय इन बातों का रखें ध्यान
शास्त्रों में गर्भाधान को लेकर भी विशेष प्रावधान हैं। माना जाता है कि अमावस्या, पंचक काल, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान कभी भी गर्भधारण नहीं करना चाहिए। इसके अलावा दिन के समय ब्रह्म मुहूर्त में और शाम के समय भी गर्भधारण नहीं करना चाहिए। ज्योतिष ने बताया कि शाम के समय यदि गर्भाधान होता है तो राक्षस प्रवृत्ति का बच्चा जन्म लेता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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