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इस कथा के बिना अधूरी है स्कंदमाता की पूजा, जानिए सही विधि, आरती और माता का भोग
Navratri Day 5 Skandamata Katha-Aarti: शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन स्कंदमाता माता को समर्पित होता है। मां स्कंदमाता, भगवान कार्तिकेय की माता, ज्ञान और शक्ति की अवतार हैं। उनके दर्शन और पूजन से घर में सुख-शांति, वैभव और संतान सुख की प्राप्ति होती है। उनके हाथों में कमल, गदा, शंख और वरमुद्रा हैं, और उनका वाहन शेर है। माता का गोद उनके पुत्र स्कंद से भरा रहता है, जो संकट और शत्रु के समय भक्तों की रक्षा करता है। इस दिन स्कंदमाता की कथा पढ़ना, उनका भोग अर्पित करना और आरती करना विशेष महत्व रखता है।
यह पूजा न केवल भक्त के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सुरक्षा लाती है, बल्कि मानसिक शांति और परिवार में प्रेम और समृद्धि का संचार भी करती है। आइए जानते हैं स्कंदमाता की संपूर्ण कथा, पूजा विधि, आरती और माता का भोग विस्तार से बताएंगे, ताकि आप नवरात्रि के इस पावन दिन माता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें।

पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, स्कंदमाता का जन्म देवी पार्वती से हुआ। उन्होंने अपने पुत्र स्कंद का पालन-पोषण करते हुए उसे महान योद्धा और देवताओं की रक्षा करने वाला बनाया। देवी स्कंदमाता का रूप अत्यंत सुंदर, ज्ञान और शक्ति से परिपूर्ण है। उनके दर्शन से घर में सुख-शांति, वैभव और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
कथा यह भी कहती है कि जब शत्रु या संकट आता है, तब माता अपने पुत्र के माध्यम से भक्तों की रक्षा करती हैं। यही कारण है कि नवरात्रि के चौथे दिन उनकी पूजा विशेष महत्व रखती है।
आरती पाठ (Skandamata Aarti)
आरती स्कंदमाता माता की कीजै।
भक्तजन सुखी भवें, कष्ट दूर हों आजै।।
जय जय स्कंदमाता माता,
शक्ति रूपिणी सुख प्रदाता।।
कमल पद्मा विभूषित,
सिंह वाहन सदा सहित।।
शत्रु भय हरो माता,
भक्तजनन पर कृपा रोटा।।
भाल चंद्रमा शोभित सदा,
सर्व मंगल करो माताजी कृपा गदा।।
जय जय स्कंदमाता माता,
भक्तजन सुखी, घर मंगलमय होता।।
पूजा का महत्व
माता की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।
भक्तों के दुख और कष्ट दूर होते हैं।
संतान सुख और परिवार में आपसी प्रेम बढ़ता है।
मानसिक शांति और ऊर्जा का संचार होता है।
स्कंदमाता का भोग (Skandamata Bhog)
स्कंदमाता माता के लिए भोग अर्पित करना उनके प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का महत्वपूर्ण तरीका है। पारंपरिक रूप से उनके भोग में मीठा, फल और विशेष नवरात्रि व्यंजन शामिल होते हैं। उन्हें मालपुआ, मीठा हलवा आदि का भोग लगाया जाता है। माता को भोग लगाने के लिए सबसे पहले माता की प्रतिमा या चित्र के सामने धूप-दीप जलाएं। कमल, अक्षत और फूल अर्पित करें और उन्हें भोग लगाए। ऐसा माना जाता है कि माता को प्रसन्न करने के लिए भक्त उन्हें भोग लगाते हैं और मां उनकी सारी मनोकामना पूर्ण करती हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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