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धनतेरस के दिन क्यों खरीदी जाती है साबुत धनिया?
धनतेरस के साथ ही दिवाली उत्सव की शुरुआत हो जाती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन धनतेरस का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, यमराज, कुबेर, लक्ष्मी और गणेशजी की पूजा होती है। धनतेरस के दिन सोना, पीतल, नए बर्तन आदि खरीदने की परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन पीली वस्तुएं खरीदना शुभ होता है। धनतेरस के मौके पर साबुत धनिया खरीदने का भी चलन है। जानते हैं ऐसा क्यों किया जाता है।

आमतौर पर धनतेरस के अवसर पर लोग सोना या पीतल की वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। वहीं जो लोग अपने कम बजट के चलते ये दोनों ही सामान नहीं खरीद पाते हैं वो साबुत धनिया खरीदते हैं। हालांकि यह कम लोगों के बीच ही प्रचलित है।
धनिया खरीदने के पीछे दूसरे कारण भी माने गए हैं। धनतेरस के मौके पर खड़ा धनिया खरीदना शुभता का प्रतीक माना जाता है। ग्रामीण इलाकों में धनतेरस के दिन धनिये के नए बीज खरीदे जाते हैं। शहरों में साबुत धनिया खरीदा जाता है और उसे पीसकर गुड़ के साथ मिलाकर 'नैवेद्य' तैयार किया जाता है।

लोगों की ऐसी आस्था है कि धनतेरस के शुभ दिन पर लक्ष्मी माता और भगवान धन्वंतरि को धनिया चढ़ाने से मनोकामना पूरी होती है। धनतेरस के बाद इस धनिया का प्रसाद बनाया जाता है और लोगों को बांटा जाता है। धनिया को संपन्नता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है इसलिए धनतेरस पर थोड़ी सी धनिया जरूर खरीदें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताए गए रत्नों के लाभ पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिषीय अनुभवों पर आधारित हैं। हर इंसान पर इसका असर अलग हो सकता है। किसी भी रत्न को पहनने से पहले किसी योग्य ज्योतिषी या रत्न विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें। यह लेख सिर्फ जानकारी देने के उद्देश्य से है और इसे प्रोफेशनल सलाह का विकल्प न समझें।



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