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वैज्ञानिकों ने 10 साल में तैयार किया 2 हजार साल पुराना इत्र, मिस्र की महारानी क्लियोपेट्रा लगाती थी
वैज्ञानिकों की एक टीम ने 2 हजार साल पुरानी विधि से वो इत्र तैयार किया है जिसे मिस्र की राजकुमारी क्लियोपट्रा लगाती थीं। इसे हवाई (नॉर्थ अमेरिका) के दो विश्वद्यालयों के शोधकर्ताओं ने मिलकर बनाया है। शोधकर्ताओं का कहना है यह आज के इत्र जैसा नहीं है। यह काफी गाढ़ा है और जैतून के तेल जैसा दिखता है।
जैतून के तेल से दिखने वाले इस इत्र को बनाने में करीब 10 साल यानी एक दशक का समय लगा है। इस इत्र को बनाने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने कई विधियों का अध्ययन किया गया। इत्र बनाने के लिए इलायची, जैतून के तेल, दालचीनी और लोबान का इस्तेमाल किया गया है। इस इत्र की खुशबू बेहद तेज है कि इसका असर काफी समय तक रहता है।

शोधकर्ता प्रो. लिटमैन का कहना है कि दो हजार साल पुरानी विधि से इत्र तैयार करना और इसे सूंघना बेहद अलग अनुभव था, जिसका इस्तेमाल कभी क्लियोपेट्रा करती थीं। शोधकर्ताओं ने इस इत्र को इजिप्ट के तेल-एल तिमाई में रखा था। वर्तमान में इसे अमेरिका के नेशनल जियोग्राफिक म्यूजियम में प्रदर्शनी के लिए रखा गया है।
एक शोधकर्ता एटलस ऑब्सक्यूरा के मुताबिक यह प्राचीन मिस्र का सबसे कीमती इत्र था। इसकी खोज मिस्र में तीसरी शताब्दी में हुई थी। उस दौर में इसे सुरक्षित रखने के लिए जो बोतलें बनाई जाती थीं उसकी मिट्टी विदेश से आती थी।
क्लियोपेट्रा करती थी इस्तेमाल
जहां इस इत्र की खोज हुई थी, वहां एक भट्टी थी और कुछ सोने-चांदी के जेवरात भी पाए गए। माना जा रहा है कि इत्र के बदले जेवरातों का लेन-देन किया जाता था। शोधकर्ताओं का दावा है कि इत्र को वैसा ही तैयार किया गया है, जैसा क्लियोपेट्रा इस्तेमाल करती रही होंगी। कैलिफोर्निया के परफ्यूम कारोबारी मेंडे आफटेल का कहना है कि मिस्री राजा बेहद अलग किस्म के इत्र का इस्तेमाल करते थे।



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