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National Handloom Day 2025: बनारसी साड़ी खरीदते हुए न बने ठगी के शिकार, इन तरीकों से करें असली की पहचान
How to check a pure Banarasi silk saree : भारतीय परंपराओं में साड़ी एक ऐसा परिधान है जो समय के साथ और भी खूबसूरत और लोकप्रिय होता जा रहा है। खासकर बनारसी सिल्क साड़ी, जो अपनी शानदार कारीगरी, चमकदार कपड़े और पारंपरिक डिजाइनों के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यह साड़ियां न सिर्फ खास मौकों पर पहनी जाती हैं बल्कि दुल्हनों की पहली पसंद भी होती हैं। लेकिन बढ़ती मांग के चलते नकली बनारसी साड़ियों का कारोबार भी तेजी से फैल रहा है, जो न सिर्फ कम गुणवत्ता वाली होती हैं बल्कि असली के दाम में बेची जाती हैं।
ऐसे में अगर आप भी बनारसी साड़ी खरीदने जा रही हैं, तो ठगी से बचने के लिए जरूरी है कि आप असली और नकली की पहचान करना जानें। यहां हम आपको 5 आसान तरीके बता रहे हैं जिससे आप असली बनारसी सिल्क साड़ी को आसानी से पहचान सकती हैं।

1. छूकर पहचानें बनारसी सिल्क की गर्माहट
असली बनारसी सिल्क को छूते ही उसकी गुणवत्ता का अहसास हो जाता है। यदि आप इसे कुछ देर तक उंगलियों से रगड़ेंगी तो हल्की गर्माहट महसूस होगी, क्योंकि असली रेशम में यह खासियत होती है। इसके अलावा यह साड़ियां रोशनी के हिसाब से अपना रंग भी बदलती हैं। अलग-अलग एंगल से देखने पर इनके रंग में बदलाव नजर आता है, जो नकली साड़ियों में नहीं होता।
2. पल्लू की लंबाई और डिजाइन को गौर से देखें
बनारसी साड़ी खरीदते समय उसका पल्लू जरूर जांचें। असली बनारसी साड़ी का पल्लू आमतौर पर 6 से 8 इंच लंबा होता है, जिसमें बारीक सिल्क धागों से बनी चमकदार कढ़ाई होती है। इसके बॉर्डर और पल्लू पर अमरू (आम का पत्ता), अंबी (पैसली डिज़ाइन) और डोमक जैसे पारंपरिक मोटिफ्स देखने को मिलते हैं, जो इस साड़ी की असल पहचान होते हैं।
3. जरोक्का पैटर्न और बारीक कढ़ाई का ध्यान रखें
असली बनारसी साड़ियों में एक खास पैटर्न होता है जिसे जरोक्का पैटर्न कहा जाता है। इसमें भारतीय शैली के बूटे, पैसली और मुगलिया डिजाइन शामिल होते हैं। ये पैटर्न रेशम के बारीक धागों से बनाए जाते हैं और बेहद रॉयल लुक देते हैं। साथ ही असली बनारसी साड़ियों में जरदोजी या ज़री का काम सोने और चांदी जैसे रंग के धागों से होता है, जो देखने में बेहद आकर्षक और कीमती लगता है।
4. अंगूठी ट्रिक से करें साड़ी की जांच
एक आसान लेकिन कारगर तरीका है अंगूठी ट्रिक। असली बनारसी साड़ी हल्की और मुलायम होती है, खासकर जब उसमें ज़्यादा ज़री का काम न हो। ऐसे में साड़ी को अंगूठी में से आसानी से पार किया जा सकता है। अगर साड़ी बिना अटकाव के अंगूठी में से निकल जाए, तो यह असली बनारसी सिल्क की निशानी हो सकती है।
5. जीआई टैग (GI Tag) और QR कोड जरूर जांचें
केंद्र सरकार द्वारा बनारसी साड़ियों को जीआई टैग (Geographical Indication Tag) दिया गया है, जिससे उनकी असल पहचान सुनिश्चित हो सके। जब भी आप साड़ी खरीदें तो उस पर लगा GI टैग और QR कोड जरूर जांचें। QR कोड स्कैन कर आप उस साड़ी से जुड़ी सारी जानकारी जान सकती हैं - जैसे कि वह कहां बनी है, कौन-से बुनकर ने बनाई है, और कौन-से कच्चे माल का इस्तेमाल हुआ है।



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