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स्टेट लंच के दौरान नीता अंबानी की साड़ी थी बहुत खास, सदियों पुराना है पटोला साड़ी का इतिहास
Patola Saree-प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी जब अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन के विशेष मेहमान थे, तब उनके सम्मान में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में देश विदेश की प्रतिष्ठित हस्तियों ने भी शिरकत की थी। इस दौरान नीता अंबानी के आउटफिट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। नीता अंबानी ने इस खास कार्यक्रम में मेहमान थीं। जो बहुत ही खूबसूरत आइवरी-गोल्ड बनारसी ब्रोकेड साड़ी में स्टनिंग लग रही थीं। इसके बाद वो पिंक पटोला साड़ी पहन कर गॉर्जियस नजर आईं, जो साड़ी उन्होंने कैरी की थी वो देश की कला को दर्शाती है, दशकों पुरानी भारतीय कारीगरी उस साड़ी में नजर आई जो नीता अंबानी ने कैरी की थी।

नीता अंबानी ने गुजरात के पाटन में बनने वाली पटोला साड़ी पहनी थी। ये पटोला साड़ी दशकों से भारतीय कला का प्रतिनिधित्व करती आ रही है, जो दिखाती है कि भारतीय हस्त कला कितनी समृद्ध है है।
आइये जानते हैं इस पटोला सााड़ी के इतिहास और विशेषताओं के बारें में-
-जो साड़ी नीता अंबानी ने कैरी की थी उसे पारंपरिक कारीगरों दुष्यन्त परमार और विपुर परमार ने करीब 6 महीने की मेहनत से तैयार किया था ये साड़ी प्योर रेशम से बुनी गई थी। इसकी जानकारी एनएमएसीसी द्वारा दी गई है।
-आपको बता दें कि पटोला गुजरात की एक तरह की रेशम से तैयार की गई साड़ी होती है। जिसको बुनने से पहले अलग अलग स्थानों पर गांठ बांध कर रंगा जाता है।
-गुजरात में दशकों से बनने वाली ये साड़ी का अपना ट्रेडमार्क है, इस वजह से से साड़ी काफी कॉस्टली होती है।
-इस साड़ी को बनाने के लिए जो फैब्रिक यूज होता है उसका रेशमी धागा कर्नाटक और वेस्ट बंगाल से लाया जाता है।
-पाटन पटोला साड़ी का इतिहास सोलंकी वंश के राजा कुमारपाल से है, जिन्होंने महाराष्ट्र के जलना से बाहर के करीब 700 पटोला बुनकरों को पाटन में बसने के लिए बुला लिया था।
-इस वंश के राजा खास तौर से पटोला सिल्क का पट्टा पहनते थे।
-आपको बता दें कि इस साड़ी को जीआई टैग भी मिला हुआ है।
-पटोला कपड़े की सबसे खास बात ये है कि इस साड़ी को आप दोनों तरफ से पहन सकते हैं। इसमें आप ये पहचान नहीं सकते की सीधा किधर है और उल्टा किधर है। इसकी कढ़ाई को डबल इकत कहा जाता है।
-पटोला साड़ी को ब्सट्रैक्ट डिजाइन और जियोमेट्रीक पैटर्न तरीके से तैयार किया जाता है।
-पटोला साड़ी में बनने वाले डिजाइन गुजरात की वास्तुकला से प्रेरित है।
-पाटन पटोला साड़ी भारत से बाहस सबसे ज्यादा इंडोनेशिया में पहनी जाती है, जो भारत से निर्यात होती है।
-पटोला नाम संस्कृत के शब्द 'पट्टकुल्ला' से निकाला गया है। पटोला का कपड़ा गुजराती मूल है, लेकिन इसका उल्लेख साउथ इंडिया के कई धार्मिक ग्रंथों में मिलता है।
-दक्षिण भारत के धार्मिक ग्रंथ नरसिंह पुराण में इससे बने कपड़ों का उल्लेख किया गया है।
Image Courtesy-Instagram



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