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लैब मेड डायमंड और नेचुरल डायमंड में क्या फर्क होता है ? जानें मिथ और फैक्ट्स
दुनिया की हर महिला की ख्वाहिश होती है कि उसके पास कम से कम डायमंड की एक जूलरी तो जरूर हो, लेकिन हीरे के कीमत ज्यादा होने की वजह से लोगों की ख्वाहिश पूरी नहीं हो पाती। आज के टाइम में असली डायमंड के साथ ही लैब में बनने वाले डायमंड विकसित किये जा रहे हैं। ये डायमंड ऑथेंटिक होते हैं जो खदान के बाहर और प्रयोगशाला के अंदर कटिंग एज साइटिंस्ट और टेक्नोलॉजी के साथ बनाए जाते हैं। लेकिन लैब में बनें डायमंड को लेकर कई मिथ भी फैले हुए हैे, लेकिन यहां पर लैब मेड डायमंड बारे में मिथक और फैक्ट्स को बताया जा रहा है-
हाल के कुछ सालों में डायमंड की जूलरी लेने वाले लोगों के बीच प्रयोगशाला में विकसित हीरे लोकप्रिय हो रहे हैं। हालांकि, इसको लेकर कई मिथक है, जिसमें कि लैब में बने हीरों से कनेक्ट है।

लैब मेड डायमंड : मिथ और फैक्ट्स
मिथक: प्रयोगशाला में बनने वाला डायमंड कृत्रिम डायमंड होता है ?
फैक्ट: प्रयोगशाला में विकसित हीरा उतना ही वास्तविक होता है, जितना कि खदानों से निकाला जाता है। हीरा चाहे खदान में पैदा हो या प्रयोगशाला में, दोनों एक ही कार्बन से बने होते हैं। लैब में विकसित डायमंड केमिकल और फिजकल कॉम्बिनेशन में खनन किए गए डायमंड की तरह ही होते हैं। फर्क सिर्फ इतना होता है कि जब नेचर हीरे के निर्माण करती है तो इसको बनाने में अरबों साल लग जाते हैं। लेकिन कटिंग एज साइंस इस प्रक्रिया को तेज कर सकता है और हीरे बनने में लगने वाले समय को काफी कम कर सकता है।

लैब मेड डायमंड : मिथ और फैक्ट्स
मिथक: प्रयोगशाला में तैयार किए गए डायमंड की कोई रीसेल वैल्यू नहीं है ?
फैक्ट: प्रयोगशाला में विकसित हीरों की रिसेल वैल्यू होती है। हीरा, हीरा होता है इसमें कोई दो राय नहीं है। चाहे हीरों खनन से निकले हो और लैब में तैयार किए गए डायमंड दोनों का अपना एक रिसेल मार्केट है। लैब में विकसित कई डायमंड ब्रांड ग्राहकों को बायबैक और एक्सचेंज के अवसर भी प्रदान करते हैं। ये लैब में विकसित हीरों के रिसेल के लिए बाजार को और बड़ा बनाता है।

लैब मेड डायमंड : मिथ और फैक्ट्स
मिथक: खनन किए गए डायमंड को लैब में तैयार किए गए हीरों से अलग करना आसान है
फैक्ट: नग्न आंखों से लैब में तैयार हीरे और खनन किए गए हीरे के बीच अंतर करना इतना आसान नहीं है। यहां तक कि एक्सपर्ट जेमोलॉजिस्ट भी अंतर नहीं पहचान सकते। जब तक कि हाई-टेक मशीनों द्वारा डायमंड की जांच न की जाए। ऐसी मशीनों का यूज हीरा प्रमाणन प्रयोगशालाओं में किया जाता है। खनन किए गए हीरों में अक्सर नाइट्रोजन के मामूली निशान होते हैं, जो प्रयोगशाला के हीरों में नहीं होते हैं। लेकिन इस अंतर का पता सिर्फ एक मशीन की मदद से लगाया जा सकता है।

लैब मेड डायमंड : मिथ और फैक्ट्स
मिथक: लैब में बने हीरे समय के साथ रंग खो देंगे
फैक्ट: नैचुरल हीरे के समान कैमिकल संरचना होती है, इसलिए हीरे के रंग या लुप्त होने का कोई सवाल ही नहीं है। 10 की हार्डनेस के आधार पर ये प्रमाणित हीरे हैं और आपकी तरह ही समय की कसौटी पर खरे उतरेंगे।
डायमंड क्या है?
जेमोलॉजिकल रूप से हीरा एक खनिज है जिसका केमिकल फार्मूला C (कार्बन) है। ये आइसोमेट्रिक सिस्टम में क्रिस्टलाइज्ड होता है। कंपेयर करने पर मिनिरल ग्रेफाइट में सी का केमिकल फार्मूला भी होता है। हालांकि, यह हेक्सागोनल सिस्टम में क्रिस्टलाइज्ड होता है और इसमें बहुत भिन्न गुण होते हैं।
(Reference-gemsociety.org)



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