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Eye Flu Myths vs Facts : आंखों को देखने से भी हो जाता है आई फ्लू? Conjunctivitis से जुड़े ये है 5 मिथक
Eye Flu Myths vs Facts : दिल्ली सहित देश के कई अन्य हिस्सों में इन दिनों आई फ्लू यानी कंजंक्टिवाइटिस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आंखों में दर्द, लालिमा, जलन और चुभन की शिकायत लेकर डॉक्टर के पास पहुंच रहे हैं।
कंजंक्टिवाइटिस को पिंक आइज के नाम से भी जाना जाता है। आई फ्लू के बढ़ते मामलों के साथ ही लोगों में इसे लेकर कई तरह की अफवाहें सुनने को मिल रही है। जिन्हें दूर करना बेहद जरूरी है। आज इस आर्टिकल में आई फ्लू से जुड़े इन्हीं मिथकों के बारे में जानेंगे।

मिथक: चंद्रयान-3 लॉन्च के कारण हो रहा है आंखों का संक्रमण?
फैक्टः इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट में इस बात की चर्चा तेज है कि राजधानी में बढ़े आई फ्लू के मामलों के लिए चंद्रयान-3 लॉन्चिंग एक कारण हो सकता है। क्या वास्तव में इसका कोई संबंध है?
कंजंक्टिवाइटिस वायरस या बैक्टीरिया के कारण होने वाला संक्रमण है, यह संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने के कारण होती है। चंद्रयान-3 लॉन्चिंग से इसका कोई संबंध है ही नहीं। इस तरह की अफवाहों पर लोगों को बिल्कुल भरोसा नहीं करना चाहिए।
मिथकः क्या सिर्फ आंखों में देखने से हो जाता है कंजक्टिवाइटिस?
फैक्टः यह आई फ्लू से जुड़ा एक सबसे आम मिथक है। आपने अक्सर लोगों से सुना होगा कि संक्रमित व्यक्ति की आंख में देखने मात्र से आपको आईफ्लू हो सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह से गलत है, क्योंकि कंजक्टिवाइटिस केवल संक्रमित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाले तरल के सीधे संपर्क से फैलता है।
मिथकः क्या केवल बच्चों की ही आई फ्लू होता है?
फैक्टः कंजक्टिवाइटिस के मामले बच्चों में ज्यादा देखने को मिलते हैं, लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल भी नहीं है कि यह सिर्फ बच्चों का संक्रमण है। आई फ्लू किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। ये संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से होता है।
मिथकः अगर आप अपनी आंखें नहीं रगड़ेंगे, तो आई फ्लू नहीं होगा?
फैक्टः ये बात भी सरासर गलत है। अगर आप संक्रमित व्यक्ति के द्वारा यूज किए गए किसी वस्तु को हाथ लगाते हैं और फिर अपनी आंखों को छूते हैं तो आपको आई फ्लू हो सकता है। किसी भी दूषित वस्तु या पदार्थ के संपर्क में आने से आंखें संक्रमित हो जाती हैं, जैसे अनुचित तरीके से साफ किए गए कॉन्टैक्ट लेंस, मेकअप, या यहां तक कि आई-ड्रॉप डिस्पेंसर की नोक, जिसका इस्तेमाल हाल ही में किसी संक्रमित ने किया था।
मिथकः कंजंक्टिवाइटिस का कोई इलाज नहीं है?
फैक्टः कंजक्टिवाइटिस एक माइल्ड इन्फेक्शन है, जो अपने आप ठीक होने में कुछ समय लेता है। हालांकि, कुछ आई ड्रॉप जैसे उपचार मौजूद हैं, जो असुविधा, सूखापन और सूजन को कम कर सकते हैं। डॉक्टर से सलाह लेकर आई ड्रॉप को इस्तेमाल में लें।
मिथकः अगर आपकी आंखें लाल हैं, तो यह कंजंक्टिवाइटिस ही है?
फैक्टः लाल आंखें कंजक्टिवाइटिस के अलावा कई चीजों का संकेत हो सकती हैं। एलर्जी, ड्राई आई सिंड्रोम और जलन पैदा करने वाले तत्व आंख के सफेद हिस्से के लाल होने का कारण बन सकते हैं। आंखों की लाली के पीछे कंजंक्टिवाइटिस के अलावा और भी गंभीर कारण हो सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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