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21 साल बाद लौटा चांदीपुरा वायरस, 48 घंंटे में गई 6 जान, ये 2 लक्षण देखते ही डॉक्टर के पास भागे
Chandipura virus in Gujarat: causes, Symptoms : गुजरात में 'चांदीपुरा' नामक खतरनाक वायरस ने दस्तक दे दी है। साबरकांठा व अरावली जिलों में संक्रमितों बच्चों के मामले मिले हैं।
दावा किया जा रहा है कि इस वायरस के चलते 5 दिन के अंदर 6 बच्चों की मौत हो गई। संक्रमित बच्चों के सैंपल जांच के लिए पुणे भेजे गए थे। वहीं, इस वायरस की पुष्टि होने पर राज्य अलर्ट मोड पर आ गया है।
गुजरात ही नहीं इससे सटे राजस्थान के उदयपुर जिले में भी दो बच्चों में चांदीपुरा वायरस के लक्षण मिले है। जिसके बाद दोनों राज्यों में मेडिकल टीम को तैनात कर दिया गया है। एक्सपर्ट्स बताते हैं कि चांदीपुरा वायरस काफी खतरनाक है। यह सीधा दिमाग पर अटैक करता है और समय प इलाज न मिलने से मरीज की मौत पक्की है। दो राज्यों में केस मिलने के बाद इसके फैलने की संभावना बढ़ गई है।

आइए इसी बीच जानते हैं कि आखिर ये चांदीपुरा वायरस क्या है और इससे किसको सबसे ज्यादा खतरा है? इसके लक्षण और बचाव क्या है?
क्या है ये चांदीपुरा वायरस और कैसे फैलता है (What is Chandipura Virus)
चांदीपुरा वायरस से बुखार होता है, जिसके लक्षण फ्लू या इंसेफेलाइटिस के समान ही नजर आते हैं। पीड़ित मरीज के दिमाग में सूजन आना उसके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। यह वायरस मच्छरों, मक्खियों और कीट के जरिए फैलता है। वहीं गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री रुशिकेश पटेल ने बताया है कि यह बीमारी वेक्टर से संक्रमित सैंडफ्लाई के डंक से होती है। यह एक तरह का इन्सेक्ट है। ज्यादात्तर ग्रामीण तबको चांदीपुरा वायरस के केस देखने को मिलते हैं।
59 साल पुराना है चांदीपुरा वायरस
वैसे आपको बता दें कि चांदीपुरा कोई नया वायरस नहीं है। 1965 में महाराष्ट्र में पहला मामला दर्ज किया गया था। गुजरात में हर साल इस वायरस के मामले दर्ज होते हैं।' साल 2003 में आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र में चांदीपुरा वायरस से 329 बच्चे संक्रमित हुए थे, जिसमें से 183 की मौत हो गई थी। अब 21 साल बाद ये वायरस फिर से लौट आया है।
बच्चों को सबसे ज्यादा खतरा
चांदीपुरा वायरस बच्चों को अपना शिकार बनाता है। अभी तक इस वायरस से जितनी मौतें हुई है, ये सभी बच्चे ही है। स्वास्थ्य मंत्री रुशिकेश पटेल ने बताया, 'यह वायरस 9 महीने से 14 साल के बच्चों को ज्यादा प्रभावित करता है। फिलहाल इससे निपटने के लिए संक्रमित मामलों के इलाकों में मच्छरों और अन्य कीटों को मारने के लिए कीटनाशकों और पेस्टीसाइड्स का छिड़काव किया जा रहा है।
चांदीपुरा वायरस के लक्षण (Chandipura Virus Symptoms)
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विवेक शर्मा बताते हैं कि चांदीपुर वायरस के लक्षण इंसेफेलाइटिस के समान होते हैं। संक्रमित बच्चों में बुखार, उल्टी, दस्त और मिर्गी का दौरा पड़ने जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
लेकिन उल्टी और दस्त होना बच्चों में मुख्य शुरुआती लक्षण होते है। इसके अलावा मामला गंभीर होने पर बच्चों के दिमाग में सूजन आ जाती है, जिससे बच्चों को दिमागी दौरे आने लगते हैं, जो मुत्यु की असल वजह बनता है। डॉक्टर का कहना है कि ये लक्षण दिखने पर पैरेंट्स बिल्कुल हल्के में न लें। तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
चांदीपुरा वायरस से बचाव के तरीके (Chandipura Virus Prevention)
- मच्छरों के पनपने वाली जगहों पर कीटनाशकों और पेस्टीसाइड्स का छिड़काव करें।
- मच्छरों से बच्चों को बचाने के लिए पूरी बाजे के कपड़े पहनाए।
- मच्छरदानी लगाकर सोएं।
- घर के आसपास गंदा पानी इक्ट्ठा न होने दें।
- शुरुआती लक्षण दिखने पर सावधानी बरतें और डॉक्टर से मिलें।
कैसे मिला इस वायरस को चांदीपुरा नाम?
इस वायरस से जुड़ा सबसे पहला मामला 1965 में महाराष्ट्र के चांदीपुरा गांव में मिला था। उस समय 15 साल तक के कई बच्चों की इस वायरस से मौत हुई थी। तब पूरे चांदीपुरा गांव में इस रहस्यमयी बीमारी को लेकर लोगों में खौफ हो गया था। संक्रमितों के ब्लड सैंपल की जांच के बाद पता इस वायरस के बारे में पता चला तब से इसका नाम चांदीपुरा पड़ गया।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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