Latest Updates
-
Dhaba Style Egg Curry Recipe: घर पर बनाएं ढाबे जैसी मसालेदार अंडा करी -
नसों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं सोनू निगम, हो रहे MRI-CT स्कैन लेकिन फिर भी करेंगे लाइव परफॉर्म -
गर्मियों में कई समस्याओं के लिए रामबाण है लीची की तरह दिखने वाला ये फल, जानें इसके फायदे -
Lohri Special Energy Til Pinni Recipe: सर्दियों में शरीर को गर्म रखने का आसान तरीका -
International Men's Health Week: पुरुषों की फर्टिलिटी बढ़ा सकते हैं ये 5 योगासन, जानें अभ्यास का तरीका -
डायबिटीज के मरीजों को किशमिश खानी चाहिए या नहीं? जानें कैसे और कितना करें सेवन -
लंबे-घने और मजबूत बालों का सीक्रेट है मेथी, इन 3 तरीकों से हेयर केयर रूटीन में शामिल -
Eid Special Mutton Biryani Recipe: इस आसान तरीके से घर पर पाएं रेस्टोरेंट जैसा स्वाद -
Vastu Shastra: ड्रेसिंग टेबल पर भूलकर भी न रखें ये 7 चीजें, वरना छिन जाएगी घर की सुख-शांति -
Maharana Pratap Jayanti 2026 Wishes: चेतक पर चढ़ जिसने...महाराणा प्रताप की जयंती पर भेजें ये खास शुभकामना संदेश
अल्कोहलिक और नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर, दोनों में से कौनसा वाला है ज्यादा खतरनाक और अंतर?
Alcoholic Vs Non-Alcoholic Fatty Liver : फैटी लिवर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। पहला, अल्कोहलिक फैटी लिवर (AFLD), जो अत्यधिक शराब के सेवन से होता है। दूसरा, नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD), जो खराब खानपान और जीवनशैली के चलते उन लोगों में भी होता है जो शराब का सेवन नहीं करते। शुरुआत में यह बीमारी मामूली लगती है, लेकिन समय पर ध्यान न दिया जाए तो यह गंभीर लिवर डैमेज और फेलियर का कारण बन सकती है।
लिवर पर जब फैट तय सीमा से अधिक जमा हो जाता है, तो उसे फैटी लिवर कहा जाता है। अगर इसका समय रहते इलाज न हो तो लिवर में सूजन (इंफ्लेमेशन), निशान (फाइब्रोसिस) और गंभीर मामलों में सिरोसिस तक हो सकता है। सिरोसिस के बाद स्थिति इतनी बिगड़ सकती है कि मरीज को लिवर ट्रांसप्लांट तक की जरूरत पड़ सकती है।
भारत में बीते दशक में लिवर संबंधी बीमारियों के मामले तेजी से बढ़े हैं। लिवर फेलियर और ट्रांसप्लांट के लिए इंतजार कर रहे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। ऐसे में जरूरी है कि समय रहते लिवर का ध्यान रखा जाए और अल्कोहलिक तथा नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर के बारे में सही जानकारी हो।

अल्कोहलिक फैटी लिवर (AFLD) क्या है?
अल्कोहलिक फैटी लिवर उन लोगों में होता है जो नियमित और अत्यधिक शराब का सेवन करते हैं। शराब के सेवन से लिवर की कोशिकाएं फैट को पचाने में असमर्थ हो जाती हैं, जिससे फैट जमा होने लगता है। यदि शराब पीना जारी रहे तो यह स्थिति तेजी से अल्कोहॉलिक हेपेटाइटिस, फाइब्रोसिस, और फिर सिरोसिस या लिवर फेलियर में बदल सकती है। यह एक जानलेवा स्थिति बन सकती है।
अल्कोहलिक फैटी लिवर के खतरे
- अत्यधिक शराब पीना
- पोषण की कमी
- हेपेटाइटिस बी या सी का संक्रमण
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर (NAFLD) क्या है?
नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर का शराब से कोई लेना-देना नहीं है। यह मुख्यतः जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं के कारण होता है। इसके प्रमुख कारण हैं:
- मोटापा
- टाइप 2 डायबिटीज
- उच्च कोलेस्ट्रॉल
कौन सा ज्यादा खतरनाक है?
एक्सपर्ट के मुताबिक दोनों ही स्थितियां खतरनाक हैं और लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर तथा मृत्यु तक का कारण बन सकती हैं। हालांकि, आज के समय में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसके लक्षण तब तक सामने नहीं आते जब तक बीमारी गंभीर न हो जाए।
लोग अक्सर यह सोचकर लापरवाह रहते हैं कि शराब नहीं पीने से उनका लिवर सुरक्षित है, जबकि अस्वस्थ खानपान और मोटापा भी लिवर को उतना ही नुकसान पहुंचा सकते हैं।
लिवर को स्वस्थ कैसे रखें?
- शराब का सेवन सीमित करें या पूरी तरह छोड़ दें, विशेष रूप से यदि पहले से लिवर की समस्या है।
- नियमित रूप से व्यायाम करें और स्वस्थ वजन बनाए रखें।
- अपने आहार में ताजे फल, सब्जियां और फाइबर युक्त चीजें शामिल करें।
- अधिक मात्रा में मैदा और प्रोसेस्ड फूड से परहेज करें।
- लिवर हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है, इसे स्वस्थ रखना एक जिम्मेदारी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications