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फैटी लीवर की समस्या से निपटने के लिए इन मिथक से रहें दूर

फैटी लिवर एक ऐसी बीमारी है, जिसमें लिवर में फैट जमा हो जाता है। हाल ही में, फेमस इंटरनेशनल विशेषज्ञों के एक समूह ने स्थिति की चयापचय उत्पत्ति को प्रतिबिंबित करने और शराब पर परिभाषा के स्पष्ट जोर को संतुलित करने के लिए NAFLD से चयापचय से जुड़े फेट यकृत रोग के रोग के संक्षिप्त नाम को बदलने की वकालत की जाती है। एक साथ उपापचयी सिंड्रोम के रूप में संदर्भित बीमारियों से टाइप 2 डायबिटीज, दिल की बीमारी और स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ जाता है। इनमें से कुछ मुद्दों में हाई बल्ड प्रेशर, कमर के आसपास शरीर में फेट का जमा होने के साथ कोलेस्ट्रॉल का असामान्य स्तर शामिल हैं। लेकिन इसके बारे में ज्यादा जानकारी होना आपको भ्रमित कर सकता है। आज हम इस आर्टिकल के जरिए आपके लिए फैटी लिवर को लेकर कुछ मिथक लेकर आए हैं।
मिथक 1: NAFLD मुख्य रूप से है लिवर की स्थिति
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, दिल की बीमारी और किडनी की बीमारी ये सभी फैटी लिवर से जुड़े होते हैं। आंतों की खराबी, ऑस्टियोपोरोसिस, सोरायसिस, स्लीप एपनिया और पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम जैसी कई हार्मोनल समस्याएं भी इसके साथ जुड़ी हुई हैं। वास्तव में, NAFLD के 93 प्रतिशत रोगियों में अन्य चयापचय संबंधी विकार मौजूद होते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि ऊपर बताई गई सभी बीमारियों के लिए फैटी लीवर डायबिटीज, इंसुलिन प्रतिरोध और क्रोनिक किडनी रोग का मूल कारण है।
मिथक 2: पेट में दर्द, आंखों का पीला पड़ना हैं इसके लक्षण
NAFLD रोग धीरे-धीरे बढ़ता जाता है। ज्यादातर लोगों में इसका कोई भी लक्षण नहीं होते हैं। वे चक्कर आना, मतली और पेट के दाहिने हिस्से में दर्द जैसे लक्षणों का अनुभव कर सकते हैं। फैटी लिवर के सभी मामलों का सीधा लिवर फंक्शन टेस्ट द्वारा पता नहीं लगाया जा सकता है। ऐसे में पेट के अल्ट्रासाउंड से फैटी लिवर का पता चल सकता है, लेकिन लिवर की क्षति की गंभीरता को सटीक रूप से निर्धारित करने के लिए अन्य प्रक्रियाएं, जैसे कि हेपेटिक इलास्टोग्राफी और लिवर बायोप्सी, जरुरी हैं।
मिथक 3: प्रोफेशनल काउंसलिग की जरूरत नहीं!
फैटी लिवर बीमारी का बहु-विषयक प्रबंधन बहुत जरूरी है। लिवर के नुकसान पहुंचने की मात्रा का सटीक आकलन करने, विकास और रोग का पूर्वानुमान लगाने, लिवर की बीमारी के वैकल्पिक कारणों का पता लगाने, अद्वितीय जोखिम प्रोफाइल के लिए चिकित्सा को अनुकूलित करने और अनजाने में पता चलने पर गंभीर लिवर रोग का प्रबंधन करने के लिए एक विशेषज्ञ से सलाब जरूर लें।
मिथक 4: मोटे लोग NAFLD के प्रति होते हैं संवेदनशील
केवल 34 प्रतिशत NAFLD पेशेंट मोटापे से ग्रस्त होते हैं। अन्य व्यक्ति सामान्य वजन या ज्यादा वजन वाले होते हैं। NAFLD के रोगी जो दुबले होते हैं उनमें आंत का मोटापा ज्यादा होता है, और उनका चयापचय असामान्य होता है। उन लोगों में अन्य मोटे लोगों की तरह गंभीर यकृत रोग विकसित होने के उच्च जोखिम में भी हैं।
मिथक 5: फैटी लिवर है नॉर्मल
भारत में हाल ही में किए गए रिसर्च के मुताबिक कई राज्यों में ग्रामीण आबादी की तुलना में शहरी आबादी ज्यादा प्रभावित होती है। जिसमें आधी से ज्यादा आबादी पीड़ित है। लीवर की बीमारी के लिए प्रत्यारोपण की जरूरत का यह दूसरा सबसे बड़ा कारण है। यह देखना चिंताजनक है कि किशोरों में घटनाएं बढ़ रही हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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