Latest Updates
-
Gandhi Jayanti 2026 Essay, Speech: गांधी जयंती पर ऐसे करें भाषण और निबंध की तैयारी, मिलेगा इनाम -
Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में खीर बनाते समय न करें ये गलती, नहीं तो नाराज हो सकते हैं पितर, जानें सही विधि -
Koffee With Karan 9: करण जौहर का ‘कॉफी विद करण’ 22 साल बाद होगा खत्म, जानें कब और कहां स्ट्रीम होगा आखिरी सीजन -
Jitiya Vrat 2026: कब है जितिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत? जानें सही तारीख, और नहाय-खाय से लेकर पारण तक का समय -
लाखों में बिकती है दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, लेकिन बनाने का प्रोसेस जानकर फ्री में भी पीने से करेंगे तौबा! -
पाम ऑयल क्या होता है और इसे खाने से क्या नुकसान होते हैं? जानिए इससे शरीर पर क्या असर होता है -
October 2026 Vrat Tyohar List: नवरात्रि, दशहरा से करवा चौथ तक, यहां देखें व्रत-त्योहारों की पूरी लिस्ट -
जुबिन नौटियाल बने पापा, पत्नी ने दिया बेटे को जन्म, गणेश चतुर्थी पर घर आया नन्हा मेहमान -
'मन की बात' में PM मोदी ने बताया क्यों इतना खास है आंवला, जानिए इसके 5 जबरदस्त फायदे और सेवन का सही तरीका -
World Heart Day 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस बन सकता है हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके
Sharda Sinha Death: इस बीमारी से जंग लड़ रही थी भोजपुरी सिंगर शारदा सिन्हा, छठ पर ली आखिरी सांस
Sharda Sinha Died: बिहार की मशहूर भोजपुरी लोक गायिका शारदा सिन्हा का छठ के मौके पर ही दिल्ली स्थित एम्स में निधन हो गया। दुनियाभर में छठ के लोकगीतों की वजह से मशहूर हुई शारदा सिन्हा जिन्हें बिहार की स्वर कोकिला के नाम से भी जाना जाता था। शारदा सिन्हा ने अपने मधुर छठ गीतों और भोजपुरी लोक संगीत के जरिए करोड़ों लोगों के दिलों में खास जगह बनाई है।
शारदा सिन्हा न सिर्फ भोजपुरी संगीत इंडस्ट्री की जाना माना चेहरा है, वो 'हम आपके हैं कौन', मैंने प्यार किया और 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' जैसी फेमस फिल्मों के लिए सिंगिग कर चुकी हैं। बता दें कि शारदा सिन्हा साल 2018 से मल्टीपल मायलोमा से पीड़ित थी। ये बीमारी कैंसर का ही एक रूप है जो रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है। फिलहाल वो पिछले कुछ दिनों से ऑक्सीजन सपोर्ट पर थी। आइए जानते हैं कि ये बीमारी कितनी खतरनाक है और जिसकी वजह से हमने देश के इतनी बहुमूल्य आवाज को खो दिया।

मल्टीपल मायलोमा कैंसर क्या है?
मल्टीपल मायलोमा एक प्रकार का ब्लड कैंसर है जो प्लाज्मा सेल्स से संबंधित होता है, जो कि हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। ये कोशिकाएँ बोन मैरो (हड्डी का मज्जा) में पाई जाती हैं और इम्युनोग्लोबुलिन (एंटीबॉडी) का उत्पादन करती हैं। इस रोग में, अनियंत्रित रूप से वृद्धि होने वाली ये कैंसर कोशिकाएँ (मायलोमा सेल्स) शरीर में विभिन्न समस्याएँ उत्पन्न करती हैं।
मल्टीपल मायलोमा के प्रमुख लक्षण
- रोगी अक्सर पीठ, पसलियों, और कूल्हों की हड्डियों में दर्द महसूस करता हैं।
- रक्त में एनीमिया के कारण रोगी को थकान महसूस हो सकती है।
- इम्युनोग्लोबुलिन का स्तर कम होने से रोगी को संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
- मायलोमा कोशिकाएँ गुर्दे पर दबाव डाल सकती हैं, जिससे गुर्दे की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
- हड्डियों की कमजोरी के कारण फ्रैक्चर होने का जोखिम बढ़ जाता है।
- रक्त में उच्च कैल्शियम का स्तर या प्रोटीन का स्तर बढ़ना।
वजह
मल्टीपल मायलोमा का सटीक कारण अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं गया है, लेकिन कुछ जोखिम कारकों में शामिल हैं:
- यह अधिकतर 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के व्यक्तियों में होता है।
- यदि परिवार में किसी को यह बीमारी है, तो जोखिम बढ़ सकता है।
इलाज
मल्टीपल मायलोमा का उपचार विभिन्न तरीकों से किया जा सकता है, जिनमें शामिल हैं:
- कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए कीमोथेरपी की उपयोग की जाने वाली दवाएं ।
- रोगी के बोन मैरो को पुनर्स्थापित करने के लिए स्टेम सेल ट्रांसप्लांट किया जाता है।
- प्रतिरक्षा प्रणाली को कैंसर से लड़ने में मदद करने वाली दवाएं।
- दर्द को कम करने और कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए।
- मल्टीपल मायलोमा में चेस्ट इन्फेक्शन कंट्रोल करके भी मरीज को काफी हद तक बचाया जा सकता है।
इन टेस्ट से पता कर सकते हैं
मल्टीपल मायलोमा का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट और बोन मैरो टेस्ट के जरिए भी इस बीमारी का पता कर सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
