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Hand Transplant : ट्रेन हादसे में दोनों हाथ गवां चुके शख्स को सर्जरी से मिले नए हाथ, जानें पूरा मामला
Delhi Hand Transplant News : ऑर्गन ट्रांसप्लांट की वजह से कई जिंदगियों के बचने के किस्से हमने सुने होंगे। अब इसी से जुड़ा हैरतअंग्रेज मामला सामने आया है। जहां एक 45 वर्षीय शख्स के ट्रेन एक्सीडेंट में दोनों हाथ कटने के बाद ट्रांसप्लांट प्रोसेस की वजह से उसे दोबारा नए हाथ मिल गए हैं। ये चमत्कार दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में हुआ हैं।
जहां डॉक्टरों की एक टीम ने इस ऑपरेशन को सफलता पूर्वक अंजाम दिया है। पेशे से पेंटर इस शख्स को जिंदगी ने फिर से ब्रश थामने का दूसरा मौका दिया हैं।

इस तरह के दुलर्भ हैंड ट्रांसप्लांट को बाइलेटरल हैंड ट्रांसप्लांट कहा जाता है। आइए जानते हैं इस सर्जरी के बारे में-
ब्रेन डेड महिला की हाथ को किया ट्रांसप्लांट
डॉक्टर्स ने बताया है कि जनवरी में यह सर्जरी की गई थी। उसके बाद से ही मरीज मेडिकल टीम की निगरानी में था। उसकी सेहत में लगातार सुधार हो रहा है अब वो पूरी तरह फिट हैं और जल्द ही उसे छुट्टी मिल जाएगी। मिली जानकारी के मुताबिक इस सर्जरी की सफलता का श्रेय एक महिला को जाता है जिसकी ब्रेन हेमरेज की वजह से मौत हो गई थी। डॉक्टर्स ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इस महिला की वजह से तीन जिंदगियां संवरी हैं। इस महिला ने न सिर्फ हाथ बल्कि दो अन्य मरीजों को आंखें और किडनी भी दी हैं।

कैसी होती है बाइलेटरल हैंड ट्रांसप्लांट?
इस ट्रांसप्लांट में ब्रेन-डेड व्यक्ति के हाथ किसी जरूरतमंद को प्रत्यारोपित किए जाते हैं। इस ट्रांसप्लांट से पहले मरीज की काउंसलिंग की जाती है। सारे मेडिकल टेस्ट के बाद ही प्रोसेस को आगे बढ़ाया जाता है। इस सर्जरी में मांसपेशियों, हड्डियों, नसों और रक्त वाहिकाओं को आपस में जोड़कर इसे सफल बनाया जाता है। इस प्रोसेस को करने के लिए मेडिकल टीम में प्लास्टिक सर्जन, आर्थोपेडिक सर्जन, नेफ्रोलाजिस्ट, पैथोलाजिस्ट, मनोचिकित्सक और ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेडर की आवश्यकता होतीहै। सर्जरी होने के बाद मरीज को मेडिकल ऑब्जर्वेशन में रखा जाता है। जहां उसकी रिकवरी को डॉक्टर मॉनिटर करते हैं।
साइड इफेक्ट
इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा साइडइफेक्ट यह है कि मरीज को जीवनभर दवाइयां लेनी पड़ती हैं ताकि जो कृत्रिम हाथ लगे हैं वो शरीर के साथ आसानी से कॉर्डिनेड कर सकें। ये दवाईयां तंत्रिका तंत्र की कोशिकाओं को मंद कर देती है जो इस बात का अहसास नहीं होने देती है कि ये हाथ ट्रांसप्लांट के जरिए जोड़ा गया है। इसके अलावा इन दवाईयों से शरीर की इम्यूनिटी कम हो जाती है जिसकी वजह से इंफेक्शन का खतरा बना रहता है।
केरल में हुआ था पहला हैंड ट्रांसप्लांट
भारत में पहला बाइलेटरल हैंड ट्रांसप्लांट प्रोसेस 2022 में केरल के कोच्चि में हुआ था।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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