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'हर दिन एक नई परीक्षा जैसा था, लेकिन हार नहीं मानी', ये है ब्रेस्ट कैंसर को मात दे चुकी डॉ गुंजन की कहानी
कहते हैं, ज़िंदगी अपने असली मायने तब समझाती है, जब वो हमें परखती है। कुछ ऐसा ही हुआ डॉ गुंजन मल्होत्रा के साथ, एक ऐसी महिला जिन्होंने पूरी ज़िंदगी दूसरों को ठीक करने में बिताई, लेकिन जब कैंसर जैसी बीमारी ने उन्हें खुद घेरा, तो उन्होंने वही हिम्मत, वही विश्वास और वही मुस्कान अपनी सबसे बड़ी दवा बना ली। डॉ गुंजन मल्होत्रा ने ब्रेस्ट कैंसर जैसी गंभीर बीमारी को न सिर्फ हराया, बल्कि वर्तमान में ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित महिलाओं का हौसला बढ़ाने और उन्हें जागरूक करने में लगी हुई हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर महिलाओं में होने वाला सबसे आम कैंसर है। पिछले कुछ सालों में ब्रेस्ट कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। हर साल लाखों महिलाएं ब्रेस्ट कैंसर की चपेट में आकर अपनी जान गंवा देती हैं। ऐसे में, इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने और बचाव के तरीके बताने के उद्देश्य से हर साल अक्टूबर महीने को ब्रेस्ट कैंसर अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है. आइए, इस ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता महीने में जानते हैं ब्रेस्ट कैंसर सर्वाइवर डॉ गुंजन मल्होत्रा की जर्नी के बारे में -

खुद डॉक्टर होकर भी कर बैठी गलती
डॉ गुंजन मल्होत्रा भारतीय सेना में वरिष्ठ डॉक्टर रही हैं। उन्होंने वर्षों तक बतौर स्त्री रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) काम किया और अनगिनत महिलाओं की जिंदगी बेहतर बनाने में मदद की। अनुशासन, आत्मविश्वास और सेवा उनके जीवन की पहचान थे। लेकिन ज़िंदगी की असली परीक्षा तब शुरू हुई, जब एक दिन उन्होंने अपने शरीर में एक हल्की सी गांठ महसूस की। पहले तो उन्होंने इसे अनदेखा किया, जैसे हम में से कई महिलाएं करती हैं। डॉ गुंजन बताती हैं कि मैं भी वही गलती कर बैठी जो ज्यादातर महिलाएं करती हैं, खुद के शरीर के संकेतों को नजरअंदाज करना। एक डॉक्टर होने के बावजूद मैंने इसे हल्के में लिया और तुरंत जांच नहीं कराई।
कोरोना काल में कैंसर डायग्नोज हुआ
हालांकि, जब लक्षण बढ़ने लगे और उन्होंने गांठ की जांच करवाई, तो रिपोर्ट में स्टेज 3 के ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई। डॉ गुंजन बताती है कि उस समय जैसे पल भर में सब कुछ जैसे थम गया। उनके जहन में तरह-तरह के ख्याल आने लगे। उन्होंने बताया कि उस समय कोरोना का समय चल रहा था। ऐसे में, मेरे दिमाग में ख्याल आता है कि मैं कोरोना से मरूंगी या कैंसर से। एक तरफ कोरोना का कहर था, तो दूसरी तरह कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का डर। लेकिन उन्होंने टूटने के बजाय, अपनी हिम्मत को अपना हथियार बनाया। उन्होंने ठान लिया कि वो इस बीमारी को खुद पर हावी नहीं होने देंगी।
खुद को पॉजिटिव रखने की कोशिश की
उसके बाद, उनका इलाज शुरू हुआ। 6 महीने तक दवाइयां, कीमोथेरेपी और फिर सर्जरी। बाल झड़ना, थकान, कमजोरी।।। हर दिन एक नई परीक्षा जैसा था। लेकिन उन्होंने हार मानने से इनकार कर दिया। इलाज के दौरान भी वो मुस्कुराती रहीं और खुद को हमेशा सकारात्मक बनाए रखा। वे कहती हैं कि "कैंसर से लड़ाई सिर्फ शरीर की नहीं होती, ये मन की भी होती है। अगर मन जीत गया, तो शरीर खुद ठीक हो जाता है।"
परिवार का सपोर्ट मिला
डॉ गुंजन बताती हैं कि इस पूरे सफर में उनके परिवार ने उनका सबसे बड़ा साथ दिया। उनका बेटा उनकी सबसे बड़ी ताकत बना। डॉ गुंजन ने बताया कि जब मेरे बेटे ने मेरा बाल्ड लुक देखा तो कहा, मम्मी, आप तो सुपरहीरो लग रही हैं। उस पल उन्हें महसूस हुआ कि इंसान की असली जीत उसके अंदर से शुरू होती है।

खुद को मानसिक तौर पर मजबूत रखने की कोशिश की
डॉ गुंजन का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर के इलाज के दौरान शारीरिक समस्याओं को बर्दाश्त करने के साथ-साथ अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर रखना भी बेहद मुश्किल होता है। डॉ गुंजन बताती हैं कि, "सिर्फ इलाज के दौरान ही नहीं, बल्कि इलाज के बाद भी मैं अपनी मेंटल हेल्थ पर खास ध्यान देती हूं। क्योंकि अगर आप एक बार अपने दिमाग से जीत गए, तो किसी भी कठिनाई से आसानी से जीत सकते हैं।" उन्होंने बताया कि अपने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए वे नियमित रूप से योग और मेडिटेशन करती हैं। इससे वे खुद को मानसिक रूप से स्वस्थ और मजबूत महसूस करती हैं।

कैंसर के मरीजों को करती हैं जागरूक
आज डॉ गुंजन सिर्फ एक कैंसर सर्वाइवर हैं, बल्कि एक ऐसी प्रेरक शख्सियत हैं जो लगातार महिलाओं को जागरूक कर रही हैं। वह कैंसर अवेयरनेस कैंप्स में जाकर लोगों को समझाती हैं कि ब्रेस्ट कैंसर का समय पर पता चल जाए, तो उसे हराया जा सकता है। वह कहती हैं, "हम महिलाएं हमेशा दूसरों की चिंता में खुद को भूल जाती हैं। लेकिन अब वक्त है खुद से प्यार करने का, खुद का ख्याल रखने का।" वे कहती हैं कि "मुश्किलें आएंगी, डर लगेगा, लेकिन अगर हिम्मत और उम्मीद साथ हो तो कोई भी बीमारी, कोई भी तकलीफ बड़ी नहीं होती। डॉ गुंजन मल्होत्रा का मानना है कि, "अंधेरा चाहे कितना भी घना क्यों न हो, आशा की एक किरण हमेशा रहती है।"
डॉ गुंजन मल्होत्रा का ब्रेस्ट कैंसर से लड़ रही महिलाओं के लिए यह संदेश है कि किसी भी बीमारी से ठीक होना संभव है, अगर आप सही इलाज, डाइट और हेल्दी लाइफस्टाइल फॉलो करें। साथ ही, इससे बचाव के लिए सेल्फ-एग्जामिनेशन करते रहना बहुत जरूरी है। उनका कहना है कि कैंसर होने पर हौसला नहीं हारना चाहिए, बल्कि खुद को पॉजिटिव रखें और जितना संभव हो इस बीमारी से लड़ने की कोशिश करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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