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Wolrd Cancer Day 2026: कैंसर का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट किए जाते हैं? जानें डॉक्टर से
Test For Early Cancer Detection: आज के समय में कैंसर दुनियाभर में एक प्रमुख स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। अनियमित खानपान, खराब जीवनशैली, तनाव, प्रदूषण और बढ़ते रेडिएशन इसके कुछ प्रमुख कारण हैं। पहले जहां कैंसर एक दुर्लभ बीमारी मानी जाती थी, वहीं अब यह हर आयु वर्ग में तेजी से फैल रही है। राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम (एनसीआरपी) के अनुसार, पुरुषों में सबसे अधिक कैंसर के मामले फेफड़ों, मुंह, प्रोस्टेट, जीभ और पेट से जुड़े पाए जाते हैं। वहीं, महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे प्रमुख रहता है, उसके बाद गर्भाशय ग्रीवा, अंडाशय, गर्भाशय निकाय और फेफड़े के कैंसर आते हैं। हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक, कैंसर की समय पर पहचान बेहद जरूरी है। कैंसर होने पर शरीर में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं। लेकिन अक्सर इसके शुरुआती लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोग उन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। जब तक पता चलता है, तब तक बीमारी आखिरी चरण में पहुंच चुकी होती है। हालांकि, कुछ टेस्ट्स होते हैं, जो कैंसर के शुरुआती संकेतों की पहचान कर सकते हैं। साथ ही, इसके प्रकार और स्टेज को भी समझने में मदद करते हैं। आज इस लेख में गुरुग्राम स्थित नारायणा हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट एवं डायरेक्टर, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, डॉ. ज्योतिका जैन से जानते हैं कैंसर का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ टेस्ट्स के बारे में -

कैंसर का जल्दी पता लगाने वाले टेस्ट
कैंसर का जल्दी पता लगाने के लिए कई प्रकार के टेस्ट उपलब्ध हैं, जो स्क्रीनिंग, इमेजिंग और पुष्टि के चरणों में विभाजित होते हैं। ब्लड टेस्ट ट्यूमर मार्कर जैसे PSA (प्रोस्टेट), CA-125 (अंडाशय), CEA (कोलोरेक्टल) और AFP (लीवर) की जांच करते हैं, जो असामान्य स्तर पर कैंसर का संकेत देते हैं।
इमेजिंग टेस्ट में एक्स-रे फेफड़े या हड्डी कैंसर दिखाता है, अल्ट्रासाउंड लिवर या थायरॉइड गांठों का पता लगाता है, जबकि सीटी स्कैन, एमआरआई और पीईटी-सीटी ट्यूमर का आकार, स्थान और स्टेज निर्धारित करते हैं।
बायोप्सी सबसे निश्चित टेस्ट है, जिसमें संदिग्ध ऊतक का नमूना लेकर पैथोलॉजी जांच की जाती है। एंडोस्कोपी पेट, कोलन या अन्नप्रणाली कैंसर के लिए आंतरिक दृश्य प्रदान करती है।
लक्षणों के आधार पर किए जाने वाले टेस्ट
कैंसर के पता जगाने के लिए विशिष्ट लक्षणों के आधार पर कुछ टेस्ट किए जाते हैं। मुंह में अल्सर या गांठ रहने पर (तंबाकू से जुड़े मुंह कैंसर के लिए सामान्य) बायोप्सी और ओरल एग्जामिनेशन सुझाया जाता है। लगातार खांसी, खून वाली बलगम या सीने में दर्द (फेफड़े कैंसर, प्रदूषण से बढ़ता भारत में) पर सीटी स्कैन या ब्रॉन्कोस्कोपी। स्तन में गांठ या निप्पल से डिस्चार्ज पर मैमोग्राफी और अल्ट्रासाउंड, विशेषकर 40 वर्ष से ऊपर महिलाओं के लिए। अनियंत्रित मल-मूत्र, पेट दर्द या मल में खून (कोलोरेक्टल कैंसर) पर कोलोनोस्कोपी। बिना कारण वजन घटना, थकान या भूख न लगना पर ब्लड टेस्ट (सीबीसी) और पीईटी स्कैन। गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के लिए अनियमित रक्तस्राव पर पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट, जो भारत में दूसरा सबसे आम है। त्वचा पर नया तिल या बदलाव पर डर्माटोस्कोपी और बायोप्सी किया जाता है।
शुरुआती पहचान के लाभ
लक्षणों की शुरुआती पहचान और समय पर जांच करवाने से उपचार की सफलता दर 90% तक बढ़ सकती है। प्रारंभिक चरण में कैंसर का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी जैसे उपचारों से प्रभावी रूप से किया जा सकता है, जिससे कई मामलों में रोग पूरी तरह नियंत्रित या ठीक हो सकता है। वहीं उन्नत स्टेज में पहुंचने पर उपचार विकल्प सीमित हो जाते हैं और उत्तरजीविता दर केवल 20-30% रह जाती है। भारत में, जहां लगभग 70% कैंसर मामलों का पता देर से चलता है, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर इलाज से अनुमानतः 1.5 लाख मौतें रोकी जा सकती हैं। उदाहरण के तौर पर, पैप स्मीयर जैसी सरल जांच से गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के मामलों को 80% तक रोका जा सकता है। शुरुआती पहचान से इलाज की लागत भी काफी कम रहती है। जहां प्रारंभिक चरण में इलाज 1-2 लाख रुपये में संभव हो सकता है, वहीं देर से पता चलने पर सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी सहित उपचार का खर्च 10-20 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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