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इन पांच वजहों से बच्चे को नहीं लगती भूख, कुछ यूं करें यह प्रॉब्लम सॉल्व
अच्छी सेहत के लिए अपनी डाइट पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है। चाहे बच्चे हों या बड़े, हर किसी को अपनी डाइट का ख्याल रखना चाहिए। हालांकि, अधिकतर घरों में यह देखा जाता है कि बच्चों को बहुत कम भूख लगती है और वे खाने के नाम से बचते हैं। ऐसे में पैरेंट्स उनकी हेल्थ व ग्रोथ को लेकर बहुत अधिक चिंतित हो जाते हैं।
दो से पांच साल की उम्र के बच्चों को भूख ना लगना या फिर बहुत कम भूख लगना बेहद आम है। लेकिन फिर भी कभी-कभी यह उनके लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है। हालांकि, किसी भी डॉक्टर को दिखाने से पहले आपको उनके भूख ना लगने के पीछे की वजह को जानना चाहिए। तो चलिए आज इस लेख में हम ऐसे ही कुछ कारणों व उपायों की चर्चा कर रहे हैं-

ग्रोथ रेट का स्लो होना
बच्चे के विकास के अनुसार उनकी भूख में भी बदलाव आता है। पहले वर्ष के दौरान, बच्चे तेजी से बढ़ते हैं। लेकिन उसके बाद उनकी ग्रोथ धीमी हो जाती है। इस स्थिति में वे कम खाना खा सकते हैं। ऐसे में पैरेंट्स को परेशान होने की जरूरत नहीं होती है। अमूमन इस स्थिति में बच्चे कम ही खाते हैं। हालांकि, कुछ समय बाद उनकी भूख फिर से सामान्य होने लगती है।
बीमार होना
छोटे बच्चे अक्सर बीमार हो जाते हैं और इस स्थिति में उनका कुछ भी खाने का मन नहीं करता है। यहां तक कि तबियत ठीक होने के एक दो दिन बाद तक भी वे खाने से थोड़ी दूरी ही बनाते हैं। यदि आपका बच्चा गले में खराश, पेट के फ्लू, दस्त, सिरदर्द, बुखार आदि के कारण परेशान हैं तो हो सकता है कि वे सामान्य से कम ही खाएं।
अत्यधिक तनाव होना
आज के समय में तनाव सिर्फ बड़ों के जीवन का ही हिस्सा नहीं है, बल्कि बच्चे भी इससे प्रभावित हैं। जब बच्चे तनाव में होते हैं तो हो सकता है कि खाने के प्रति उनकी रुचि कम हो जाए। तनाव में बच्चे या तो सामान्य से बहुत अधिक खाना शुरू कर देते हैं या फिर वे खाने से काफी दूर हो जाते हैं। ऐसे में पैरेंट्स की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे बच्चे तनाव के कारण की पहचान करने और उसे कम करने की कोशिश करें।
ईटिंग डिसऑर्डर जैसे एनोरेक्सिया नर्वोसा
कई बार बच्चे किसी तरह के ईटिंग डिसऑर्डर जैसे एनोरेक्सिया नर्वोसा का भी शिकार हो जाते हैं। यह एक ऐसी स्थिति होती है, जिसमें बच्चे की रूचि खाने के प्रति लगभग खत्म ही हो जाती है। ईटिंग डिसऑर्डर का सीधा असर बच्चे के दिमाग पर पड़ता है और वे लंबे समय तक बिना खाए रहने की कोशिश करते हैं। यहां तक कि जब वे खाते हैं, वे कम वसा वाले खाद्य पदार्थ चुनते हैं और बाद में उन्हें खाने के लिए खुद को दोषी महसूस करते हैं। यदि आपका बच्चा तेजी से वजन कम करते हुए भोजन से परहेज कर रहा है या जरूरत से ज्यादा व्यायाम कर रहा है, तो वह एनोरेक्सिया नर्वोसा से पीड़ित हो सकता है। इस स्थिति से बाहर आने के लिए बच्चे को एक विशेषज्ञ की मदद की जरूरत होगी।
दवाइयों का सेवना करना
बच्चे की भूख में कमी का एक कारण उसके द्वारा ली जाने वाली दवाई भी हो सकती हैं। यदि बच्चा हाल ही में एंटीबायोटिक्स का कोर्स कर रहा है, तो इससे उसकी भूख प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा कई अन्य दवाएं भी भूख को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, यह स्थिति कुछ वक्त के लिए ही होती है।
अपनाएं ये आसान तरीके
अगर आपके बच्चे को बिल्कुल भी भूख नहीं लगती है तो ऐसे में आप इन आसान उपायों को अपनाकर अपनी स्थिति को बेहतर बना सकते हैं-
बच्चे के सामने भोजन को एक नए अंदाज में पेश करने का प्रयास करें। इससे बच्चे का मन खुद पर खुद खाने का करता है।
बच्चे को तय समय पर ही मील्स व मिड मील्स दें। इससे बच्चे को सही तरह से भूख लगती है। जब भोजन का समय हो तो उन्हें नाश्ता न करने दें।
मूंगफली भूख बढ़ाने और प्रोटीन बनाने में मदद कर सकती है, इसलिए अपने बच्चे के आहार में मूंगफली आधारित खाद्य पदार्थों को शामिल करने पर विचार करें।
यदि आपके बच्चे को भूख कम लगती है, तब तक आप उसे छोटे मील्स दें। ऐसे में धीरे-धीरे बच्चा ठीक से खाना शुरू कर देगा। सही समय पर व कम मात्रा में भोजन देने से मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है और इससे बदले में भूख में वृद्धि हो सकती है।
उन हेल्दी फूड आइटम्स की एक लिस्ट बनाएं जिन्हें आपका बच्चा खाना पसंद करता है और उनके स्वाद के अनुरूप भोजन तैयार करें। जब आपका बच्चा थाली में अपना पसंदीदा खाना देखता है, तो उसके खाने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर इन सभी उपायों के बाद भी बच्चा ठीक से भोजन नहीं करता है तो ऐसे में डॉक्टर से कंसल्ट करें। वे आपको कुछ सप्लीमेंट्स या दवाइयों के बारे में बता सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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