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Dal Makhani vs Butter Chicken: सेहत के लिए दोनों में से कौन है ज्यादा हेल्दी ऑप्शन
Dal Makhani vs. butter chicken: कुछ स्पेशल खाने को मन होता है तो आप क्या खाना पसन्द करते हैं? यदि वेजीटेरियन हैं तो दाल मखनी और नॉन वेज हैं तो बटर चिकन? दोनों ही डिशेज खाने में लाजवाब होती हैं और दोनों में जो कॉमन हैं वो बटर यानी मक्खन।
दाल मखनी और बटर चिकन दोनों इंडियन कुजिन में काफी पॉपुलर हैं, दोनों ही स्वाद के साथ सेहत के मामले में भी बहुत आगे हैं। दोनों ही डिशेज खाने के अलग-अलग फायदे हैं। दाल मखनी, जो मुख्य रूप से काली दाल (उड़द दाल) और राजमा (राजमा) से बनाई जाती है, एक पोषक तत्वों से भरपूर व्यंजन है। वहीं टमाटर सॉस और मक्खन में पका बटर चिकन में भर भरकर प्रोटीन होता है। आइए जानते हैं दोनों में से किसमें हैं न्यूट्रिशियन।

दाल मखनी खाने के फायदे
दाल मखनी, जो मुख्य रूप से काली दाल (उड़द दाल) और राजमा से मिलकर बनाई जाती है, यह एक पोषक तत्वों से भरपूर व्यंजन है। यह प्लांट बेस्ड प्रोटीन का मुख्य स्त्रोत है, जो मांसपेशियों की मरम्मत और शरीर का संपूर्ण तरह से विकास करने के लिए आवश्यक है। दालें फाइबर से भरपूर होती हैं, जो पाचन स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के साथ ही भूख को ज्यादा बढ़ने नहीं देती है। इसमें मैग्नीशियम और पोटैशियम होता है, जो हमारे हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। यह दाल नवर्स सिस्टम को मजबूत बनाती है और जो मस्तिष्क की स्वस्थ कार्यप्रणाली में भूमिका निभाती हैं।
दोनों ही दाल घुलनशील और अघुलनशील दोनों तरह के फाइबर से भरपूर होते हैं जो हमारे पाचन में सुधार के लिए जाना जाता है। इसमें मैग्नीशियम और पोटेशियम होता है, जो हमारे हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है ।
उड़द दाल में आयरन की मात्रा भरपूर पाई जाती है, जिसमें हीमोग्लोबिन कम रहता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को उड़द दाल को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

अपच और कब्ज की समस्या
उड़द और राजमा ऐसी दाल है जो आसानी से नहीं पचती। ऐसे में जब व्यक्ति उड़द दाल का सेवन करते हैं तो यह पचने में काफी समय लगाती है और कई बार तो कब्ज, पेट में गैस, ब्लोटिंग, आदि जैसी परेशानियां का कारण बनती है।
गठिया वाले ज्यादा न खाएं
जिनके ब्लड में यूरिक एसिड पहले से ही बढ़ा हुआ है तो ध्यान रहें की उड़द दाल का सेवन बिलकुल न करें। जिससे कई बार किडनी, गठिया और गुर्दे की परेशानी होनी शुरू हो जाती है।
दाल मखनी मुख्य तौर पर मक्खन में पकाई जाती हैं। आजकल लोग बाजार वाले नमकीन नमक का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इसके अधिक मात्रा में सेवन से कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा रहता है। जिससे हृदय रोग की समस्या भी हो सकती है। मक्खन में वसा की अच्छी मात्रा पाई जाती है। इसलिए, इसके अधिक मात्रा में सेवन करने पर मोटापा बढ़ सकता है।

बटर चिकन खाने के फायदे
चिकन में प्रोटीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। एक दिन में 175 ग्राम तक प्रोटीन ले सकते हैं। एक सर्विंग में 30 ग्राम प्रोटीन होता है, इसलिए प्रोटीन की डेली की जरुरत के आधे से ज्यादा को पूरा चिकन पूरा कर देता है। बटर चिकन की एक सर्विंग में 3 ग्राम फाइबर और लगभग 14 ग्राम कार्बोहाइड्रेट होता है। इसलिए बटर चिकन हमारी हेल्थ के लिए खराब नहीं है।
बहुत ज्यादा होता है फैट और कैलोरी
बटर चिकन में कैलोरी की मात्रा काफी होती है। बटर चिकन की हर एक सर्विंग में 12 ग्राम सैचुरेटेड फैट होता है। डेली रुटीन में एक स्वस्थ आदमी को एवरेज फैट की आवश्यकता 22 ग्राम से कम ही होती है।
बहुत ज्यादा बटर चिकन खाना भी सेहत के लिए अच्छा नहीं हैं क्योंकि जब आप बहुत ज्यादा प्रोटीन का सेवन करते हैं तो आपका शरीर अतिरिक्त प्रोटीन को स्टोर कर लेता है और फैट को बर्न करना आसान नहीं होता है। नजीतजन आपका वजन बढ़ने लगता है।
बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर
वहीं आजकल रेस्त्रां और दुकानों में बटर चिकन में लोग ताजे की जगह प्रोसेस्ड बटर का इस्तेमाल करते हैं जो कि सेहत के लिए अच्छा नहीं हैं। यह ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष
इन दोनों ही डिशेज को खाने के अपने फायदे हैं और अपने नुकसान। दोनों ही कुजिन में कॉमन चीज मक्खन हैं। इसलिए दोनों ही डिशेज को संतुलित मात्रा में खाना चाहिए, ज्यादा खाने से अपच, वजन बढ़ना और कॉलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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