दिल्ली-NCR में भारी बारिश: सड़कों पर भरा पानी, डेंगू-मलेरिया का बढ़ा खतरा! जानें स्वास्थ्य का कैसे रखें ख्याल

Delhi-NCR Heavy Rain: दिल्ली-NCR में लगातार हो रही भारी बारिश ने मौसम को खुशनुमा कर दिया है, मगर शहर की सड़कों को जलमग्न कर दिया है। कई जगहों पर सड़कें, कॉलोनियों और गली-मोहल्लों में पानी भर गया है, जिससे आवाजाही में परेशानी हो रही है। इसी के साथ डेंगू, मलेरिया और कई तरह की बीमारियों का भी खतरा बढ़ गया है। दरअसल, बारिश के बाद होने वाले जलभराव की वजह से मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ जाता है।

ऐसे में जरूरी है कि लोगों को अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। आइए जान लेते हैं कि बारिश में मच्छरों को पनपने से कैसे रोकें और बीमारियों से कैसे बचें?

दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश

दिल्ली-एनसीआर में सुबह से ही लगातार झमाझम बारिश हो रही है। इस बारिश ने तपिश भरी गर्मी को कम कर दिया है और मौसम सुहाना बना दिया है। मगर तेज बारिश की वजह से जगह-जगह जलभराव की समस्या हो गई है जिस वजह से लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। आलम ये है कि सड़कों पर लंबा जाम लग रहा है। बारिश दिल्ली के कोने-कोने में हो रही है तो ऐसे में पूरे दिल्लीवासी एक तरफ ठंडक से खुश हैं तो दूसरी तरफ जलभराव से टेंशन में भी हैं।

Delhi NCR Rains

बारिश से बढ़ा बीमारियों का खतरा

बेशक बारिश ने दिल्ली-एनसीआर में मौसम सुहाना कर दिया है लेकिन इससे बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। जगह-जगह जलभराव से मच्छरों के पनपने का खतरा बढ़ गया है। ये तो आप जानते ही हैं कि दिल्ली में पहले से ही H3N2 इन्फ्लुएंजा ने अपने पैर पसारे हुए हैं। अब बारिश के बाद मच्छरों के होने से डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का खतरा भी बढ़ गया है। ये वही मौसम है जब अस्पतालों में सबसे ज्यादा इन बीमारियों के केस आते हैं।

मच्छरों से बचाव के लिए क्या करें?

घर के आस-पास पानी न जमा होने दें - फूलदान, टंकी, बाल्टी, गमले आदि का पानी हर रोज खाली करें।
मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें - सोते समय मच्छरदानी लगाएं और बाहर जाते समय रिपेलेंट लगाएं।
साफ-सुथरी जगह पर खाना और पानी रखें - बारिश में नमी बढ़ने से संक्रमण का खतरा बढ़ता है।
गंदगी और कचरे को तुरंत निपटाएं - जलजमाव को रोकने के लिए कचरे को सही जगह फेंकें।
सावधानी से चलें - पानी भरे रास्तों पर गड़बड़ी और फिसलन से चोट लगने का खतरा रहता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

Story first published: Tuesday, September 30, 2025, 14:02 [IST]
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