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डायबिटीज रोगियों को जरुर करवाने चाहिये ये जरुरी टेस्ट
यदि आप मधुमेह से पीडित हैं तो केवल बल्ड शुगर की जांच व ब्लड शुगर के स्तर को बनाए रखना आपके लिए पर्याप्त नहीं है। आपको मधुमेह से होने वाले अन्य रोग जैसे डायबिटिक रेटिनोपैथी, मधुमेह नेफ्रोपैथी, मधुमेह न्युरोपटी व हृदय रोग से बचने के लिए नियमित रूप से जांच कराने की जरूरत है।
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ऐसा ना करने पर आपकी ज़िंदगी की घडियां कम हो सकती हैं। आज मधुमेह एक बड़ी बीमारी उभर कर सामने उभर आ रही है। स्वस्थ रहने के लिए नीचे दिए गए 7 आसान परीक्षणों को नियमित रूप से कराते हैं।

1.HbA1C टेस्ट:
यह एक आम ब्लड टेस्ट नहीं है। इस टेस्ट को हर तीन महीने में एक बार कराना होगा। यह टेस्ट आपके डॉक्टर को उपचार के प्रभावी परिणामों को निर्धारित करने में मदद करती है। HbA1C टेस्ट पिछले कुछ महीनों के साथ आपके रक्त शर्करा के स्तर का विस्तृत ब्यौरा प्रदान करती है।

2.रक्तचाप:
उच्च रक्तचाप के लक्षण कभी स्पष्ट नहीं होते हैं तथा यह रोग आपको हृदय रोग व स्ट्रोक के दरवाजे पर खडा कर सकता है। इसलिए जब भी आप डॉक्टर के पास चेक-अप के लिए जाएं अपने रक्तचाप के स्तर का जांच जरूर कराएं। इसके स्तर को बनाए रखने के लिए दवा व सही आहार का सेवन करें।

3. लिपिड प्रोफाइल:
यदि आप मोटापे से परेशान है और आपकी जीवनशैली खास क्रियाशील नहीं है, तो आपको साल में एक बार कोलेस्ट्रॉल व ट्राइग्लिसराइड के स्तर की जाँच करनी चाहिए। चूंकि रक्त शर्करा स्तर आपके कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढा सकता है और यह हृदय रोग का कारण बन सकता है। अतः अपने रक्त शर्करा व कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने के लिए रोज कसरत करें।

4. आंखों की जांच:
अनियंत्रित रक्त शर्करा स्तर रेटिना की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। जिससे डायबिटिक रेटिनोपैथी, ग्लोकोमा एवं मोतियाबिंद हो सकता है। इसलिए साल में एक बार अपने आंखों की जांच कराएं।

5. गुर्दे का परीक्षण:
यदि आप मधुमेह के रोगी हैं, तब वर्ष में एक बार अपने गुर्दे का परीक्षण कराना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उच्च रक्त शर्करा स्तर आपके गुर्दे की रक्त वाहिकाओं को हानि पहुंचा सकता है। इसके अलावा यदि आप उच्च रक्तचाप से भी ग्रस्त हैं तब खतरा और बढ़ सकता है।

6. तंत्रिका तंत्र की जांच:
उच्च रक्त शर्करा स्तर से तंत्रिका तंत्र प्रभावित होने पर रोगी को दस्त, मूत्राशय पर अनियंत्रण व चक्कर आते हैं। यदि आप में इनमें दिया गया को भी लक्षण मौजूद है तो तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क करें। शारीरिक जांच कराने पर तंत्रिका तंत्र की हानि की बात सामने आए तो ईएमजी (इलेक्ट्रोमग्राम) जैसा नैदानिक परीक्षण भी कराएं।

7. डेंटल चेक-अप:
दांत दर्द को शुरू होने में एक पल नहीं लगता लेकिन इसे ठीक होने में लंबा समय लग जाता है। संभावना है कि मधुमेह के कारण आपको मसूडों की परेशानी भी हो सकती है। इसलिए मधुमेह के रोगियों को हर छह महीन में अपने दांतों की जांच करानी चाहिए।



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