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'कॉफ़ी से प्रॉस्टेट कैंसर का ख़तरा कम'
शोध का दावा कि कॉफ़ी से कम होता है प्रॉस्टेट कैंसर का ख़तरा. एक नए शोध से पता चला है कि कॉफ़ी पीने वालों की प्रॉस्टेट कैंसर से मौत होने की संभावना कम हो जाती है. पुरुषों में प्रॉस्टेट कैंसर काफ़ी आम है.
क़रीब 50,000 अमरीकी पुरुषों पर अध्ययन के बाद इस शोध के परिणाम को नेशनल कैंसर इंस्टिट्यूट ने छापा है. इस शोध के अनुसार जो पुरुष छह या इससे ज़्यादा कप कॉफ़ी दिन भर में पीते हैं, उनमें इस बीमारी के होने की संभावना 20 प्रतिशत कम हो जाती है. कॉफ़ी पीने वाले पुरुष इस बीमारी का एक उग्र रूप, जो पूरी देह में फ़ैल जाता है, उससे भी 60 प्रतिशत तक महफूज़ रहते हैं. द प्रॉस्टेट कैंसर चैरिटी की डॉक्टर हेलेन रिप्पो का कहना है कि शोध की बातों से जुड़े सबूत इतने पुख्ता नहीं हैं कि पुरुष ज़्यादा कॉफ़ी की आदत पाल लें.
इस शोध के लिए अमरीका में स्वास्थ्य क्षेत्र में काम कर रहे 48, 000 पुरुषों की सहायता ली गई थी. वर्ष 1986 से लेकर 2006 तक हर चार साल में उन्हें ये बताना होता था कि वो रोजाना औसतन कितनी कॉफ़ी पीते हैं. दो दशकों के इस अवधि में 5035 पुरुषों में प्रॉस्टेट कैंसर पाया गया. इन मामलों में 642 मामले घातक थे.
कैफ़ीनेटेड और डीकैफ़ीनेटेड कॉफ़ी के परिणामों में कोई अंतर नहीं पाया गया, जिससे ये साफ़ हुआ कि कैफीन की तो कम से कम इसमें कोई भूमिका नहीं है. यहाँ तक पाया गया कि कम मात्रा में, एक से तीन कप तक कॉफ़ी रोज़ पीने वालों में 30 प्रतिशत तक इस बीमारी के होने का ख़तरा कम हो गया. शोधकर्ताओं का मानना है कि कॉफ़ी में कुछ अनजाने मिश्रण मौजूद हैं, जिनके कारण इस बीमारी की संभावनाएं कम हो जाती हैं.
बोस्टन में मौजूद हारवर्ड स्कूल ऑफ़ पब्लिक हेल्थ से प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर कैथरीन विल्सन का कहना है, "हम उन कारणों को नहीं समझ पाए हैं, जिनके कारण ये सब होता है." उनका कहना है कि अगर शोध के परिणाम तय हो जाते हैं, तो कॉफ़ी एक ऐसा बदली जा सकने वाली चीज़ होगी, जिससे सबसे घातक किस्म के प्रॉस्टेट कैंसर को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी.
डॉक्टर कैथरीन विल्सन ने आगे कहा कि ये एक सकारत्मक अध्ययन है, लेकिन इसके नतीजे पूरी तरह से पुख्ता नहीं हैं. उन्होंने कहा, "हम कॉफ़ी नहीं पीने वाले पुरुषों को कतई ये सलाह नहीं देते कि वो प्रॉस्टेट कैंसर से बचने के लिए कॉफ़ी पीने की आदत डाल लें." ब्रिटेन में कैंसर रिसर्च यूके की अधिकारी यिनका इबो का भी कहना है, "गैलनों से कॉफ़ी पीना शुरू करने की कोई ज़रुरत नहीं है."
इबो ने आगे कहा कि ऐसे भी कई अध्ययन हैं जिनसे कॉफ़ी पीने से प्रॉस्टेट कैंसर के कम होने की संभावनाओं की कोई पुष्टि नहीं होती. और इस अध्ययन में भी सिर्फ़ बढ़ चुके कैंसर की संभावनाओं में कमी की बात है. और अभी इस तरह के और बहुत बड़े अध्यनों की ज़रुरत है.
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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