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पिज्जा और बर्गर के पैकेटों पर भी दर्ज हो पोषण संबंधी जानकारी

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की महासचिव सुनीता नारायण ने कहा, स्वास्थ्य पर जंक फूड के प्रतिकूल प्रभावों को देखते हुए उनकी जगह पोषक खाद्य पदार्थो के इस्तेमाल की जरूरत है। जंक फूड को स्कूलों में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। स्कूल प्रशासन को चाहिए कि स्वास्थ्यवर्धक और ज्यादा पोषक विकल्पों को बढ़ावा दें ताकि विद्यार्थी हानिकारक जंक फूड से दूर रहें। इस सप्ताह के शुरू में (सीएसई) ने एक गोलमेज बैठक आयोजित की थी, जिसमें चेतावनी दी गई कि बर्गर, फ्रैंच फ्राई, समोसा और कोल्ड डिंक तथा अन्य जंक फूड किशोरों में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों जैसे मोटापा, मधुमेह और उच्च रक्तदाब का कारण हैं।
पोषण और आहार विशेषग्य चारू सरदाना ने कहा कि विग्यापनों में पिज्जा, हॉट डॉग और बर्गर आदि के महिमा मंडन पर अंकुश लगना चाहिए। प्रचार और विग्यापन के कारण इस प्रकार के जंक फूड के प्रति आकर्षण में बढ़ोतरी हो रही है। उन्होंने एक हालिया अध्ययन का जिक्र किया, जिसमें कहा गया है कि करीब 5.1 करोड़ भारतीय मधुमेह से पीडि़त हैं और वर्ष 2025 तक यह आंकड़ा बढ़ कर 8.7 करोड़ हो जाने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि मधुमेह मोटापे की देन है और मोटापे का कारण अक्सर जंक फूड होता है।
चारू ने कहा कि जिस प्रकार सिगरेट और तंबाकू निर्मित अन्य उत्पादों के बारे में स्वास्थ्य संबंधी विशेष दिशा र्निदेश पैक पर लिखे होते हैं, उसी प्रकार जंक फूड के बारे में भी उनपर पोषण संबंधी जानकारी दर्ज होनी चाहिए क्योंकि इन उत्पादों के पैक पर पोषण के बारे में बढ़ा चढाकर बातें लिखी होती हैं। पिछले माह दिल्ली उच्च न्यायालय ने देशभर में स्कूलों और उनके आसपास जंक फूड की बिक्री पर रोक की मांग कर रही एक जनहित याचिका पर केंद्र के जवाब को महज खानापूर्ति करार देते हुए इस दिशा में ठोस कदम उठाने को कहा था। गैर सरकारी संगठन उदय फाउंडेशन की ओर से दायर इस याचिका में शैक्षणिक संस्थानों के आसपास जंक फूड और बोतलबंद शीतल पेय पर रोक लगाने की मांग की गयी है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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