जानिये महिला वेटलिफ्टिंग के बारे में महत्वपूर्ण मिथक

आजकल वेट ट्रेनिंग लोगों के बीच में काफी पॉपुलर एक्‍सरसाइज बन चुकी है, जो कि परफेक्‍ट फिगर और फिट रहने के लिये अच्‍छी मानी जाती है। महिलाएं और पुरुष दोनों ही अच्‍छा फिगर पाने और स्‍टैमिना बिल्‍ड करने के चक्‍कर में जिम फ्रीक बन चुके हैं। लेकिन वेटलिफ्टिंग यानी की भार उठाने के बारे में कई ऐसी गलत धारणाएं हैं जो कि महिलाओं के मन में बनी हुई हैं। तभी तो जिम में महिलाएं केवल कार्डियो और एक्‍सरसाइज करने पर ज्‍यादा जोर देती हैं और वेटलिफ्टिंग से दूर रहती हैं।

वेटलिफ्टिंग के बारे में कुछ मिथक जिसे जानना जरुरी है।

1. वेटलिफ्टिंग भारी और मर्दाना बनाता है
महिलाएं पुरुषों की तरह टेस्टोस्टेरोन पैदा नहीं कर सकती जिस वजह से वे मर्दो से बिल्‍कुल भिन्‍न हैं और उनकी तरह बॉडी नहीं बना सकती।

Women Weightlifting

2. वेटलिफ्टिंग से स्‍तन का आकार बढ जाता है
वेट ट्रेनिंग से कंधे और पीठ शेप में आते हैं ना कि छाती। यदि आपके स्‍तनों का आकार बढ गया है तो यह उसमें मौजूद चर्बी की वजह से है ना कि वेटलिफ्टिंग करने की वजह से।

3. वेटलिफ्टिंग बंद करने पर मासपेशियां चर्बी में बदल जाती हैं
मासपेशियां कभी भी चर्बी में नहीं बदल सकती। जिम छोड़ने के बाद मोटापा ना बढे इसके लिये आपको अपनी खाने की आदत में बदलावा लाना पडेगा।

4. वेटलिफ्टिंग करने से बवासीर हो जाता है
वेटलिफ्टिंग करते वक्‍त सही विधि से सांस ना लेने की वजह से ऐसा होना मुमकिन है। भार उठाते वक्‍त अपनी सांसो को रोकिये और उसे ग्‍लॉटिस के प्रतिकूल छोड़िये। इससे पेडू पर प्रेशर पडे़गा ना की पीछे।

5. वेटलिफ्टिंग करने से ब्‍लड प्रेशर की समस्‍या पैदा होती है
जब आप काफी वजन उठाती हैं तो ब्‍लड प्रेशर बढ जाता है और भार रखने के तुरंत बाद वह सामान्‍य हो जाता है। वजन उठाने वाले व्‍यक्‍तियों को बहुत कम ही दिल का रोग होता है क्‍योंकि यह सिस्‍टोलिक और डिस्‍टोलिक ब्‍लड प्रेशर को लो करता है।

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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