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योग करने के जादुई फायदे
योग, अपने शरीर को असम्भव सी लगने वाली मुद्राओं में मोड़ने से कहीं बढ़कर है। इसमें मस्तिष्क और शरीर का संगम होता है जिससे दिमागी कसरत से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। उच्च रक्तचाप का सामान्य होने, तनाव के कम होने, मोटापे और कोलेस्ट्राल पर नियन्त्रण जैसे अपने विस्तृत सकारात्मक प्रभावों के कारण योग व्यायाम का वैश्विक स्वरूप हो गया है। वजन को कम करने के साथ-साथ इससे शरीर सुन्दर और चुस्त-दुरुस्त होता है। योग से आप को मन की शाँति प्राप्त होती है।
आप समझ भी नहीं सकते हैं कि सिंपल सा योगआसन करने से आपको कितने लाभ पहुंच सकते हैं। अगर आप मोटे हैं तो भी इसका फायदा उठा कर पहले हो सकते हैं। शरीर और मन को तरोताजा करने, उनकी खोई हुई शक्ति की पूर्ति कर देने और आध्यात्मिक लाभ की दृष्टि से भी योगासनों का अपना अलग महत्त्व है। आइये जानते हैं योगासन के गुण और लाभ के बारे में।

गर्भावस्था में योग
यदि आप गर्भवती हैं और स्वस्थ रहना चाहती हैं तो नियमित रूप से योग करें। गर्भावस्था के दौरान योग करने से आप में मजबूती आयेगी। नियमित रूप से योग करने पर थकावट दूर होगी, तनाव कम होगा, पेशियों में खिंचाव से लचीलापन आयेगा, और बेहतर रक्त संचार, पाचन, श्वसन और स्नायु तन्त्र पर नियन्त्रण जैसे आन्तरिक लाभ होते हैं। इसके अलावा इससे नींद न आना, पीठ का दर्द, पैरों में खिचाव और अपच जैसी गर्भावस्था के दौरान होने वाली समस्याओं से भी राहत मिलती है। लेकिन जटिलताओं से बचने के लिये बेहतर है कि आप अपने चिकित्सक से सलाह ले लें।

मन की शाँति
योग के सम्पूर्ण रूप से साँस लेने और सन्तुलन वाले आसनों पर केन्द्रित होने के कारण मस्तिष्क शांत होता है और शरीर सन्तुलित होता है। इसके कारण हम अपने मस्तिष्क के दोनों भागों से काम लेते हैं जिससे आन्तरिक संचार बेहतर होता है जो शायद हम दैनिक कार्यों से हासिल नहीं कर पाते हैं। योग करने से आप अपने मस्तिष्क के सोचने और सृजनात्मकता वाले हिस्सों में सन्तुलन स्थापित कर सकते हैं।

सम्पूर्ण स्वास्थ्य को बढ़ावा
अच्छा स्वास्थ्य केवल बीमारियों से दूर रहना ही नहीं है बल्कि अपने मन और भावनाओं के बीच सन्तुलन स्थापित करना है। योग से आपको सम्पूर्ण स्वास्थ्य प्राप्त होता है, इससे न केवल बीमारियाँ दूर होती हैं बल्कि यह आपको गतिशील, खुश और उत्साही बनाता है।

बेहतर रक्त संचार
विभिन्न योग मुद्राओं और श्वास क्रियाओं के सामंजस्य के कारण योग से शरीर में बेहतर रक्त प्रवाह होता है। बेहतर रक्त संचार से शरीर में ऑक्सीज़न और पोषक तत्वों को बेहतर संवहन होता है जिसके कारण त्वचा और आन्तरिक अंग स्वस्थ रहते हैं।

सपाट पेट के लिये योग
इससे पहले कि आप यह पढ़े कि योग से सपाट पेट कैसे पा सकते है, आपका यह जानना बहुत जरूरी है कि किसी एक कसरत से यह सम्भव नहीं है। अगर आपको कोई धीरे-धीरे किये जाने वाले, सतही कार्य वाली कसरत से पूरे शरीर से मोटापा कम करने का वादा करता है तो समझ लीजिये कि विशेषज्ञ बदलने का समय आ गया है।

स्वस्थ हृदय
ऐसे विभिन्न आसन, जिनमें आप थोड़े समय के लिये साँस रोकते हैं, आपके हृदय और धमनियों को स्वस्थ रखते हैं। योग से बेहतर रक्त संचार होता है जिससे रक्त का ठहराव नहीं होता और हृदय स्वस्थ होता है।

पीड़ा से दूर रखता है
योग से लचीचापन और शक्ति बढ़ती है जिससे पीठ का दर्द और जोड़ों का दर्द जैसी समस्यायें दूर होती हैं। सुनीता कहती हैं कि जिन लोगों को मेज पर काम करना होता है या लम्बे समय के लिये गाड़ी चलानी होती है, उन्हें नियमित रूप से योग करना चाहिये क्योंकि इससे रीढ़ की हड्डी में दबाव और जकड़न से राहत मिलती है। इसके साथ ही यह आपकी संरचना को सुधारता है जिससे खराब मुद्रा से होने वाले दर्द से बचा जा सकता है।

बेहतर साँस की प्रक्रिया
योग की विभिन्न गहरी और मन्द साँस की प्रक्रियाओं के कारण फेफड़ों और उदर भाग की क्षमता बढ़ती है। इससे आपकी दैनिक कार्यक्षमता और सहनशक्ति में बढ़ोत्तरी होती है। गहरी साँस लेने से आराम मिलता है जिससे विभिन्न प्रकार के भौतिक और मानसिक तनावों से मुक्ति मिलती है।

सन्तुलन सुधारता है
खराब शारीरिक मुद्रा से वृद्धावस्था के साथ सन्तुलन खोने की सम्भावना रहती है। ऐसा हमारे स्थानबद्ध दैनिक जीवन शैली में कम या न के बराबर काम करने के कारण होता है। जिसके कारण गिरकर चोट लगने, हड्डी के टूटने, पीठ सम्बन्धी समस्यायें और अन्य कठिनाइयाँ होती हैं। योग से इस खोये सन्तुलन और नियन्त्रण को वापस पाया जा सकता है। योग से आपका सन्तुलन की इन्द्रिय बेहतर होती है जिससे शक्ति और लचीलेपन की क्षमता में विस्तार होता है। इस सुधार से आपका दिमाग तेज चलता है और आप अपनी प्रतिक्रियाओं को बेहतर रूप से नियन्त्रित करने में सक्षम होते हैं।

तनाव कम होता है
योग से तनाव कम होता है। आपाधापी वाली दिनचर्या के बाद योग करने से आप अपने तनाव को पिघलकर खत्म होते महसूस कर सकते हैं। ऐसा नहीं है कि केवल योग से ही ऐसा सम्भव है। यदि किसी भी प्रकार का व्यायाम ध्यान केन्द्रित कर सही रूप में और सटीक साँस की प्रक्रिया अपनाते हुये बुद्धिमता से किया जाय तो तनाव से मुक्ति मिलती है।



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