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न सिर्फ मैगी में ही बल्कि इन चीज़ों में भी होता है घातक लेड
आज पूरे भारत में बच्चों की मन-पसंद मैगी में भारी मात्रा में लेड होने पर बवाल मचा हुआ है। वहीं दूसरी ओर अगर देखा जाए तो हमारी रोज मर्रा की कई चीजों में लेड की मात्रा अच्छी-खासी पाई जाती है।
डॉक्टरों का कहना है कि एमएसजी एक टेस्ट बढाने वाला फूड प्रोडक्ट है, जिसे खाने में ऊपर से छिड़का जाता है। किसी फूड में लेड ऊपर से नहीं मिलाया जाता। लेड वातावरा में यानी पानी, मिट्टी या इंडिर्टियल वेस्ट से निकलता है।
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इसलिये अगर खाने में लेड की मात्रा पाई गई है तो, इसका मतलब है कि या तो लेड पानी दृारा या फिर खेती के जरिये अनाज में चला गया हो और फिर वह प्रॉडक्ट में भी चला गया हो।
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लेड हमारे शरीर के लिये काफी घातक होता है इसलिये ना केवल मैगी ही बल्कि हमारे आस-पास और रोजमर्रा की कई ऐसी चीज़ें हैं, जो हमें रोज लेड से सामना कराती हैं। आइये जानते हैं कौन सी हैं वे चीज़ें, जिनको आप रोज प्रयोग करते हैं।

पीने वाले पानी में भी लेड
क्या आप जानते हैं कि लेड यानी सीसा, घर में पानी की पाइप से भी आता है। जी हां ट्यूबवेल्स में लगाए गए घटिया पाइप की वजह से उसमें से लेड रिसता रहता है और आप तक पहुंचता है।

आंखों का काजल
जी हां, आंखों को खूबसूरत लुक देने वाले काजल में भी लेड की कुछ मात्रा मौजूद होती है। अलगी बार जब आप अपना फेवरेट काजल खरीदने जाएं तो ध्यान रखें कि उसमें लेड की मात्रा तो नहीं मिली हुई है।

लिपस्टिक
लिपस्टिक में भी थोड़ी मात्रा में लेड पाया जाता है। यह होंठो पर लगाते ही त्वचा से शरीर में चला जाता है। अगर आप कोई नॉन ब्रांडेड लिपस्टिक लगाती हैं तो सावधान हो जाएं।

दीवारों पर लगा हुआ पेंट
घरों को रंगने के लिये जो पेंट का प्रयोग किया जाता है उसमें भी लेड की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब पेंट दीवारों से निकलना शुरु हो जाता है और उस पर गंदगी जमने लगती है तब आप के चारों ओर की हवा में केवल लेड ही रहता है।

सिरेमिक के बर्तन
क्या आप अपना खाना सिरेमिक की कोटिंग वाली खूबसूरत प्लेट में खाते हैं? पर क्या आप जानते हैं कि सिरेमिक के बर्तनों को बनाते वक्त ढेर सारे लेड का प्रयोग किया जाता है, जिसपर अगर एसिडिक खाद्य पदार्थ या पेय डाला जाए तो यह लेड सीधे खाद्य पदार्थ में मिल कर पेट में जाएगा।

सब्जियां
सब्जियों जिस ज़मीन पर उगाई जाती हैं, उस जमीन पर भारी मात्रा में लेड मौजूद होता है जो कि खाद आदि से उसमें प्रवेश करता है। और जब हम इन सब्जियों को खाते हैं तो यह हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाती हैं। सब्जियों को धोने या उबालने से भी लेड की मात्रा कम नहीं हो पाती।

मछली
बडे़-बडे़ कारखानों से निकलने वाले कूड़े और पानी में ढेर सारा लेड निकलता है जो कि सीधे नदियों और नहरों में मिलता है। इन नदियों में मछलियां भी होती हैं, जिनके शरीर में पानी दृारा लेड चला जाता है। बाद में अगर आप मछली या कोई भी सी फूड खाते हैं, तो वह सीधे आपके शरीर पर प्रभाव डालता है।

खिलौंने में लेड
आज कल तो खिलौने भी जहरीले हो चुके हैं। ट्रैफिक सिगन या चीनी खिलौनों में लेड और अन्य कैमिकल्स की मात्रा अधिक होती है। इनके ज्यादा संपर्क में रहने से कई तरह की जानलेवा बीमारियां हो सकती हैं।



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