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बारिश के मौसम में क्यूं नहीं खानी चाहिये मछली? कारण जान कर हैरान हो जाएंगे

मौनसून के मौसम में हमें खाने पीने की चीज़ों पर बड़ा ध्यान देना चाहिये। इन दिनों अगर आप बिन सोचे समझे मछली का सेवन करेंगे तो आपकी सेहत को भारी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
बहुत से लोंगो के अंदर यह सवाल होता है कि क्या मौनसून के दिनों में हम मछली खा सकते हैं? मौनसून के सीज़न में आप को ताज़ी मछली मिले यह कोई जरुरी नहीं है।
इसके अलावा एक बात नैतिकता भी आती है, क्योंकि इस मौसम में मछलियां अंडे देती हैं और इन्हें मारना बिल्कुल सही नहीं है। हां, इस समय और प्रॉन्स आदि आराम से खा सकते हैं।
आइये अब जानते हैं एक न्यूट्रीनिश्ट की जुबान से मौनसून में मछलियां खाना क्यूं नहीं अच्छा माना जाता।

ये होता है प्रजनन का मौसम
मौनसून के मौसम में मछलियां और अन्य समुद्री जीव अंडे देते हैं। अंडों वाली मछली खाने से पेट में इन्फेक्शन और फूड पोइजनिंग हो सकती है।

प्रदूषित होती हैं मछलियां
मौनसून में सीवेज की काफी समस्या होती है जिससे नदी या तालाब का पानी काफी प्रदूषित हो जाता है। इसलिए इस दौरान आप मछली की बजाय चिकन या मटन खा सकते हैं।

फ्रेश मछली की संभावना कम रहती है
इस मौसम में पहले से ही पैक या स्टोर की हुई मछलियां ही मिलती हैं। 10 दिनों से स्टोर की हुई मछली अपनी पौष्टिकता खो देती है तथा वह जल्द खराब भी हो सकती है।

जल जनित रोग होने का खतरा ज्यादा
मौनसून की वजह से जल जब प्रदूषित हो जाता है तब, मछली की नस्ल भी दूषित हो जाती है। गंदी मछली खाने से टाइफाइड, पीलिया और डायरिया जैसे जल जनित रोग होने की संभावना बढ़ जाती है।

जानलेवा कैमिकल्स का छिडकाव
बारिश के मौसम में स्टोर की हुई मछलियां खराब होना ना शुरु हो जाएं इसलिये उन पर सल्फेट्स और पोलीफोस्पाफेट जैसे प्रीज़र्वटिव का छिड़काव किया जाता है। ऐसी घातक मछलियों के सेवन से सांस लेने में कठिनाई और हृदय रोग का खतरा होता है।



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