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जानिये उम्र बढ़ने के साथ-साथ मेटाबोलिज्म पर क्या असर पड़ता है
शरीर को सुचारू रूप से चलने के लिए मेटाबोलिज्म का ठीक तरीके से काम करना बहुत ज़रूरी है। मेटाबोलिज्म के धीमे होने पर इसका असर बाकी कई अंगों पर पड़ता है और आपको कई तरह की बीमारियाँ भी होने लगती हैं।
खासतौर पर आप जो खाते हैं उसे पचाने में मेटाबोलिज्म का अहम रोल है और इसी वजह से डॉक्टर हर किसी को ऐसी चीजें खाने की सलाह देते हैं जिससे बॉडी का मेटाबोलिज्म बढ़ा रहे।
उम्र बढ़ने के साथ साथ मेटाबोलिज्म भी धीमा पड़ता जाता है। इस आर्टिकल में हम आपको उम्र के साथ मेटाबोलिज्म में होने वाले बदलावों के बारे में बता रहे हैं।

20 की उम्र तक :
जब आप किशोरावस्था में होते हैं उस समय मेटाबोलिज्म काफी तेज होता है और यही कारण है कि इस दौर में आप जितना मर्जी चाहे उतनी कैलोरी खर्च कर सकते हैं। इस दौर में बॉडी का एनर्जी लेवल अपने चरम पर होता है।

30 की उम्र तक :
इस दौर में मेटाबोलिज्म सबसे ज्यादा परिवर्तित होता है। यंग ऐज की तुलना में इस समय आकर आपका मेटाबोलिज्म थोड़ा धीमा पड़ने लगता है और इसी वजह से खाना पचने से लेकर फैट बर्न होने की प्रक्रिया तक सब कुछ धीमा पड़ जाता है।

40 की उम्र तक :
उम्र के इस पड़ाव में आकर मेटाबोलिज्म काफी धीमा पड़ जाता है। मेटाबोलिज्म के अलावा इस समय शरीर में हार्मोनल बदलावों में भी कमी आ जाती है। इस दौरान पुरुष और महिलायें दोनों में सेक्स की इच्छा में भी कमी आ जाती है। शरीर में फैट ठीक से बर्न ना हो पाने के करण इकठ्ठा होने लगता है जिससे वजन बढ़ने लगता है।

50 की उम्र तक :
इस उम्र में आकर महिलायें मेनोपॉज के दौर में पहुँच जाती हैं और इस समय उनका वजन तेजी से बढ़ने लगता है। वहीँ पुरुषों में इस उम्र में मसल्स कम होने लगती हैं जिससे वे कोई भी काम करने में जल्दी थक जाते हैं। जैसे जैसे मेटाबोलिज्म धीमा होता जाता है वैसे वैसे शरीर का मोटापा बढ़ता जाता है।

उम्र बढ़ने के साथ क्या करें :
अब तक आपको यह पता चल गया है कि उम्र बढ़ने के साथ साथ मेटाबोलिज्म धीमा पड़ता जाता है लेकिन इसे नियंत्रित रखने के लिए आपको अपने लाइफस्टाइल में कई परिवर्तन लाने होंगे। इसके लिए आप खुद को एक्टिव रखें रोजाना सुबह और शाम को एक्सरसाइज ज़रूर करें। खाने में प्रोटीन और पानी की मात्रा बढ़ा दें और समय समय पर डॉक्टर से अपनी जांच करवाते रहें।



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