Latest Updates
-
चेहरे पर पड़े चेचक के दाग हटाने के 5 घरेलू उपाय, जिद्दी गड्ढों और माता के निशान से पाएं छुटकारा -
क्यों मनाया जाता है World Rat Day? सबसे पहले किस देश में पैदा हुए चूहे, कैसे पूरी दुनिया में पहुंचे? -
International Carrot Day 2026: 4 अप्रैल को ही क्यों मनाया जाता है विश्व गाजर दिवस? जानें रोचक कहानी -
Bridal Blouse Designs: लेटेस्ट ब्राइडल ब्लाउज बैक डिजाइन, डोरी से लेकर हैवी एम्ब्रॉयडरी तक, देखें 7 पैटर्न्स -
कंडोम की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? जानें ईरान-इजरायल युद्ध का असर और कपल्स के लिए सेफ्टी टिप्स -
Musibat ki Dua: दुख, तंगी और गम से निजात की इस्लामी दुआएं, इनके जरिए होती है अल्लाह से सीधी फरियाद -
कहीं आप प्लास्टिक राइस तो नहीं खा रहे आप? इन 5 आसान तरीकों से करें असली-नकली की पहचान -
Good Friday 2026: 'सब पूरा हुआ'... इन खास संदेशों और कोट्स के साथ अपनों को भेजें गुड फ्राइडे की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 3 April 2026: आज इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें अपनी राशि का हाल -
गुड फ्राइडे पर घर पर बनाएं रुई जैसे सॉफ्ट 'हॉट क्रॉस बन्स', यहां देखें सबसे आसान रेसिपी
विटामिन डी की कमी से महिलाओं को हो सकता है मल्टीपल स्केलेरोसिस का खतरा
एक अध्ययन के अनुसार जिन महिलाओं का विटामिन डी लेवल बिल्कुल कम हो जाता है, उन्हें मल्टीपल स्केलेरोसिस (एमएस) विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है। यह रोग मुख्य रूप से मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करता है।
निष्कर्ष बताते हैं कि ब्लड में विटामिन डी के स्तर में 50 नैनोमोल्स प्रति लीटर (एनएमओएल / एल) बढ़ने से जीवन में बाद में एमएस के विकास के जोखिम में 39 फीसदी की कमी आई है।
इसके अलावा, जिन महिलाओं को विटामिन डी की कमी थी, उन्हें उन महिलाओं की तुलना में एमएस विकसित होने का 43 फीसदी अधिक जोखिम था, जिनका लेवल पर्याप्त था।

अध्ययन के मुख्य डॉक्टर कैसंद्रा मुंगेर के अनुसार, अध्ययन से पता चलता है कि युवा और मध्यम आयु वाली महिलाओं में विटामिन डी की कमी को सुधारने से भविष्य में एमएस के खतरे को कम किया जा सकता है।
एमएस की स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली कोटिंग पर हमला करती है और तंत्रिका कोशिकाओं की रक्षा करता है।
पिछले शोध के अनुसार, विटामिन डी और एमएस के बीच का संबंध प्रतिरक्षा प्रणाली पर विटामिन डी के सकारात्मक प्रभाव से जुड़ा हो सकता है।
इस अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने फिनलैंड में 800,000 से अधिक महिलाओं से ब्लड सैंपल का उपयोग किया था। इनमें से, 1,092 महिलाओं को एमएस के साथ निदान किया गया था और 2,123 महिलाओं के साथ तुलना की गई जिन्हें बीमारी विकसित नहीं थी।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











