Latest Updates
-
Devshayani Ekadashi 2026: देवशयनी एकादशी कब है? जानें सही तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि -
शाम होते-होते फूल जाता है आपका पेट? ये बैली फैट नहीं ब्लोटिंग है, जानें 5 बड़े कारण और सही डाइट -
Jagannath Rath Yatra 2026: पुरी की रथ यात्रा में जा रहे हैं? इन 7 मशहूर लोकल फूड्स का स्वाद लेना न भूलें -
PM मोदी ने दिखाई भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी, जानें स्पीड, रूट और कितना होगा किराया -
Relationship Tips: लाइफ पार्टनर से कभी न बोलें ये 5 बातें, वरना टूट सकता है आपका रिश्ता -
कितने पढ़े-लिखे हैं सोनम वांगचुक और कितनी है उनकी नेट वर्थ? जानें कहां-कहां से होती है कमाई -
Sonam Wangchuk की 20वें दिन भी भूख हड़ताल जारी, बिना खाना खाए कितने दिन जीवित रह सकता है इंसान? -
Jagannath Rath Yatra 2026: कौन हैं भगवान जगन्नाथ की मौसी? जिनसे मिलने के लिए हर साल रथ से निकलते हैं महाप्रभु -
World Emoji Day 2026: क्यों मनाया जाता है वर्ल्ड इमोजी डे, कैसे पड़ा 'Emoji' नाम? जानिए इसका दिलचस्प इतिहास -
Jagannath Rath Yatra 2026 Wishes: जगन्नाथ रथ यात्रा पर अपनों को भेजें ये दिल छू लेने वाले शुभकामना संदेश
क्या कभी सोंचा है कि वजन कम होने के बाद सारा फैट कहां जाता है?
मोटापा एक गंभीर समस्या है। इससे कई रोगों का खतरा होता है। क्या आपने कभी सोचा है कि आप जो फैट कम करते हैं आखिर वो जाता कहां है? जाहिर है अधिकतर लोग केवल इतना जानते हैं कि फैट एनर्जी या हीट में कन्वर्ट हो जाता है। लेकिन ऐसा नहीं है।
जब आप कभी सुनते होंगे कि किसी व्यक्ति का वजन 100 किलो था और उसने 50 किलो कम किया, तो आपके जहन में जरूर यह सवाल उठता होगा कि 50 किलो वजन कहां गया?
इस सवाल का जवाब शोधकर्ता डॉक्टर रूबेन मेरमैन और डॉक्टर एंड्रयू जम्मू ब्राउन ने खोज निकाला है और वो सबको हैरान करने वाला है।
इनके अनुसार, जो फैट आप कम करते हैं, वो पसीने, पेशाब आदि के जरिए बाहर नहीं निकलता है बल्कि यह आपकी सांस से कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में बाहर निकलता है।

बॉडी फैट का यूज कैसे करती है
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, डायट में जब कार्बोहाइड्रेट या प्रोटीन अधिक होता है, तो मानव शरीर उन्हें ट्राइग्लिसराइड्स में बदल देता है और उन्हें लिपिड ड्रॉपलेट्स जमा करता है। इसलिए जब आप कम फैट वाली डायट लेते हैं और वर्कआउट करते हैं, तो आपकी बॉडी ट्राइग्लिसराइड्स या फैट का उपयोग करती है।
इस प्रोसेस में जहां ट्राइग्लिसराइड्स ऑक्सीडेज में कई एंजाइम और बायोकेमिकल शामिल हैं। शोधकर्ताओं ने इस स्टेप को कुछ इस तरह समझाया है-
सी55H104O6 + 78O2 → 55CO2 + 52H2O + ऊर्जा
शोधकर्ताओं के अनुसार, 10 किलो फैट बर्न करने के लिए 29 किलो इन्हेल्ड ऑक्सीजन की जरूरत होती है। इस प्रक्रिया में 28 किलो कार्बन डाइऑक्साइड और 11 किलोग्राम पानी उत्पन्न होता है। उन्होंने यह भी पता लगाया कि परमाणु शरीर को कैसे छोड़ देते हैं और पाया गया कि कुल 10 किलोग्राम फैट का 8.4 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में छोड़ा जाता है। शेष 1.6 किलो पानी मूत्र, पसीना और अन्य शारीरिक द्रवों के माध्यम से उत्सर्जित होता है।

फेफड़े वजन घटाने का कारण बनते हैं
वैज्ञानिकों ने निष्कर्ष निकाला है कि आपके वजन घटाने के लिए आपको अपने अंगों का आभार व्यक्त करना चाहिए इसलिए जितनी अधिक श्वास आप लेते हैं उतना अधिक वजन आपको खोते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप आलसी हो जाएं और जिम जाना या डायट लेना छोड़ दें।
क्योंकि जब आप काम करते हैं, तो आप अधिक सांस लेते हैं। और जितना अधिक आप सांस लेते हैं, उतना अधिक ही फैट सेल्स को कार्बन डाइऑक्साइड और पानी में परिवर्तित मदद मिलती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications