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डिजिटल डिमेंशिया क्या है? कैसे मोबाइल और टीवी से चिपककर रहने वाले हो रहे हैं इसके शिकार?
Digital Dementia Meaning: क्या आपने कभी डिजिटल डिमेंशिया के बारे में सुना है? नहीं तो जान लें ये एक मेंटल डिसऑर्डर हैं, जिसके दुनियाभर के युवा शिकार हो रहे हैं। इस बीमारी की चपेट में वो लोग आ रहे हैं जो मोबाइल और टीवी स्क्रीन के इस्तेमाल पर जरुरत से ज्यादा समय बिताता है।
आमतौर पर डिमेंशिया बुजुर्गों को होने वाली बीमारी है जिसमें व्यक्ति को भूलने की बीमारी हो जाती है। वहीं डिजिटल डिमेंशिया मोबाइल, लेपटॉप, गैजेट्स आदि का ज्यादा इस्तेमाल की वजह से भूलने की बीमारी को जन्म दे रहा है, हालांकि डिजिटल डिमेंशिया डिमेंशिया की तुलना में ज्यादा खतरनाक है क्योंकि इसमें दिमाग के साथ-साथ शरीर में भी कई तरह की बीमारियां हो जाती है। डिजिटल डिमेंशिया आईक्यू पर बुरा असर डालता है।

दिमाग पर इसका असर
जर्मन न्यूरोसाइंटिस्ट और मनोचिकित्सक मैनफ्रेड स्पिट्जर ने 2012 में पहली बार इस शब्द का इस्तेमाल किया था। स्क्रीन पर व्यस्त रहने से याददाश्त की कमजोर होती है।ब्रिटेन में 2023 में किए गए अध्ययन के मुताबिक, दिन में 4 घंटे से अधिक के स्क्रीन टाइम से वैस्कुलर डिमेंशिया और अल्जाइमर का खतरा बढ़ सकता है। यह डिमेंशिया दिमाग की कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है। इस समस्या की वजह से ब्रेन हेल्थ प्रॉब्लम जैसे चिंता और अवसाद का खतरा बढ़ सकता है।
कैसे इस बीमारी से बचें
- फोन के नोटिफिकेशन की सैटिंग्स कंट्रोल करें, अगर कोई नोटिफिकेशन जरूरी नहीं है, तो उसे पूरी बंद करने पर विचार करें।
- आजकल लोग समय गुजारने के लिए फोन का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। इस बीमारी से बचने के लिए किताब पढ़ने, व्यायाम, टहलने आदि पर जाने का प्रयास करें।
- फोन पर समय बिताने से ज्यादा बाहरी लोगों से मिले-जुले। ध्यान और मेडिटेशन जैसी गतिविधियां में समय बिताएं।
- अच्छी नींद ले इससे दिमाग डिजिटल डिटॉक्स होगा।
- डिजिटली डिटॉक्स के लिए कहीं घूमकर आए लेकिन फोन का कम से कम इस्तेमाल करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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