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facts Vs myths: मिर्गी के दौरों से जुड़ी इन 5 बातों को न मानें सच, जानें इससे जुड़े मिथक
facts Vs myths : मिर्गी यानी एपिलेप्सी दिमाग का एक गंभीर डिसऑर्डर है, जो किसी भी उम्र में हो सकता है। मिर्गी के मरीज को जब भी दौरे आते है, तो वो दो या उससे ज्यादा बार आते हैं। मिर्गी आने के पीछे कई वजह हो सकती हैं, जैसे ये जन्मजात हो सकता है। इसका मतलब पैदाइश के पहले बच्चे के दिमाग को कोई नुकसान हुआ हो या जन्म के समय ऑक्सीजन कम हो गई हो।
इसके अलावा, दिमाग पर कोई चोट आने के सालों बाद भी इंसान को मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। मिर्गी आने की वजह ब्रेन में सिकुड़न या अनुवांशिक कारण भी हो सकती है। आइए मिर्गी से जुड़े कुछ सामान्य मिथकों की सच्चाई जानते हैं।

ये है लक्षण
- अचानक गुस्सा आना
- कंफ्यूजन फील होना
- डर
- एंग्जाइटी
- अचानक खड़े-खड़े गिर जाना
- कुछ समय के लिए कुछ भी याद नहीं रहना
- चक्कर आना
- लगातार ताली बजाना या हाथ रगड़ना
- चेहरे, गर्दन और हाथ की मांसपेशियों में बार-बार झटके आना।
मिथक: मिर्गी एक मानसिक विकार है?
फैक्ट: एपिलेप्सी फाउंडेशन के अनुसार, मिर्गी एक मानसिक बीमारी नहीं है। यह एक विकार है जो किसी को भी हो सकता है। हालांकि, इससे जूझने वालों को तनाव, एंग्जाइटी और डिप्रेशन होने का खतरा ज्यादा होता है।
मिथक: मिर्गी आजीवन विकार है?
फैक्ट: मिर्गी लाइलाज बीमारी है, यह एक मिथक है। हां वर्तमान में इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन मिर्गी से पीड़ित कई लोग दवा के जरिए ठीक हो जाते हैं। बच्चे जैसे-जैसे बड़े होते हैं, वैसे-वैसे मिर्गी से छुटकारा पा लेते हैं।
मिथक: मिर्गी का दौरा पड़ते ही उसे रोकने की कोशिश करनी चाहिए?
फैक्ट: एपिलेप्सी फाउंडेशन के अनुसार, मिर्गी का दौरा पड़ने पर उसे रोकने की कोशिश कभी नहीं करनी चाहिए। इससे मरीज या आपको नुकसान पहुंच सकता है। रोकने से न तो दौरा रुकेगा और न ही धीमा होगा। साथ ही, हर दौरे में हॉस्पिटलाइजेशन की जरूरत नहीं होती है।
मिथक: मिर्गी के दौरे सिर्फ बच्चों को ही आते है?
फैक्ट: मिर्गी किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकती है। इसके साथ ही ये हर नस्ल के लोगों को हो सकती है। हालांकि जॉन होपकिंस मेडिसिन के मुताबिक, इससे बच्चों को गंभीर दौरे पड़ सकते हैं। यह नर्वस सिस्टम के सबसे आम विकारों में से एक है।
मिथक: मिर्गी से पीड़ित महिला को कंसीव करने में दिक्कत आती है?
फैक्ट: यह गलतफहमी है, मिर्गी से पीड़ित महिला आसानी से मां बन सकती है। प्रेग्नेंसी के पहले मिर्गी को कंट्रोल कर लिया जाए, तो प्रेग्नेंसी में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है। प्रेग्नेंसी के सालभर पहले से ही सही दवाइयां शुरू कर देने से बच्चे पर भी बुरा असर नहीं पड़ता है। आज ऐसी दवाएं उपलब्ध है, जिनसे गर्भ के समय मां और बच्चे को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता है।
मिथक: मिर्गी संक्रामक है?
फैक्ट: WHO के अनुसार, मिर्गी असंक्रामक विकार है। हालांकि कई अज्ञात कारणों से व्यक्ति को मिर्गी का दौरा पड़ सकता है। आज भी विश्व में 50% मिर्गी के मरीज इसकी वजह से अंजान हैं।
(Disclaimer: यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के लिए है। कोई समस्या होने पर या अधिक जानकारी के लिए चिकित्सीय सलाह जरूर लें।)



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