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इस ऑटोइम्यून बीमारी का शिकार हो गए हैं डायरेक्टर विक्रम भट्ट, हड्डियां जुड़ने से होता है कमर में तेज दर्द
Filmmaker Vikram Bhatt Struggling With Axial Spondyloarthritis : बॉलीवुड के मशहूर फिल्म मेकर और डायरेक्टर विक्रम भट्ट ने हाल ही में खुलासा किया कि वह एक्सियल स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस (Axial Spondyloarthritis) नाम की गंभीर ऑटोइम्यून बीमारी से जूझ रहे हैं। यह एक प्रकार का गठिया (arthritis) है, जिसमें हड्डियां आपस में जुड़ने लगती हैं और शरीर में तेज़ दर्द होता है। यह मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी और कमर के जोड़ों को प्रभावित करता है, जिससे लंबे समय तक दर्द और अकड़न बनी रहती है।
इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही ट्रीटमेंट और लाइफस्टाइल में बदलाव से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

क्या है एक्सियल स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस?
एक्सियल स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस एक ऑटोइम्यून डिजीज है, जिसका मतलब है कि यह बीमारी शरीर की इम्यूनिटी के कारण होती है। इसमें इम्यून सिस्टम गलती से शरीर के जोड़ों पर हमला करने लगता है, जिससे हड्डियों में सूजन और दर्द होता है। यह समस्या 45 साल से पहले ही शुरू हो सकती है और कई बार किशोरावस्था में ही इसके लक्षण दिखने लगते हैं।
एक्सियल स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस के लक्षण
इस बीमारी के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और लंबे समय तक बने रहते हैं। इनमें शामिल हैं:
- कमर और पीठ में लगातार दर्द और जकड़न, खासतौर पर सुबह के समय
- आराम करने के बाद भी दर्द में कोई राहत न मिलना
- सांस लेने में कठिनाई, क्योंकि यह बीमारी छाती के जोड़ों को भी प्रभावित कर सकती है
- आंखों में जलन और तेज़ रोशनी के प्रति संवेदनशीलता
जोड़ों में सूजन और अकड़न
एक्सियल स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस के कारण
इस बीमारी का कोई एक निश्चित कारण नहीं है, लेकिन यह आनुवंशिक (genetic) और लाइफस्टाइल से जुड़ा हो सकता है। जिन लोगों में HLA-B27 नामक जीन पाया जाता है, उनमें इस बीमारी का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा, गलत पोश्चर, धूम्रपान, अत्यधिक तनाव और असंतुलित आहार भी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
किन लोगों को इस बीमारी का खतरा ज्यादा होता है?
- जिनकी फैमिली हिस्ट्री में यह बीमारी रही हो
- 45 साल से कम उम्र के पुरुषों में अधिक खतरा
- जिन लोगों में HLA-B27 जीन पाया जाता है
- धूम्रपान करने वाले और अत्यधिक तनाव लेने वाले लोग
इस बीमारी का इलाज क्या है?
डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही ट्रीटमेंट से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।
दवाईयां
- नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) दर्द और सूजन को कम करने के लिए दी जाती हैं।
- यदि पेन किलर्स असर नहीं करतीं, तो इम्यूनिटी बूस्टर दवाएं दी जाती हैं, जिससे इम्यून सिस्टम को नियंत्रित किया जा सके।
फिजियोथेरेपी और एक्सरसाइज
योग और स्ट्रेचिंग से रीढ़ की हड्डी को फ्लेक्सिबल बनाए रखा जा सकता है।
एक्टिव रहना इस बीमारी में बहुत जरूरी है, ताकि हड्डियों की अकड़न कम हो।
लाइफस्टाइल में बदलाव
- रोज़ 7-8 घंटे की नींद लें और सही पोश्चर बनाए रखें।
- धूम्रपान और शराब का सेवन न करें, क्योंकि ये सूजन को बढ़ा सकते हैं।
- तनाव कम करें, क्योंकि अधिक स्ट्रेस से ऑटोइम्यून बीमारियां बढ़ सकती हैं।
सर्जरी (यदि आवश्यक हो)
कुछ गंभीर मामलों में हड्डियों के जुड़ने की स्थिति में सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
इस बीमारी से कैसे बचा जाए?
हालांकि इस बीमारी को पूरी तरह से रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियों से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है।
सही पोश्चर बनाए रखें: बैठते और खड़े होते समय पीठ सीधी रखें, ताकि स्पाइन हेल्दी रहे।
संतुलित आहार लें: कैल्शियम, विटामिन D, ओमेगा-3 और एंटी-इंफ्लेमेटरी फूड से भरपूर डाइट लें।
नियमित एक्सरसाइज करें: योग और हल्की स्ट्रेचिंग इस बीमारी के प्रभाव को कम करने में मदद कर सकती है।
डॉक्टर से नियमित जांच कराएं: अगर लंबे समय से कमर या पीठ में दर्द बना हुआ है, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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