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अब किसी भी फूड ब्रांड्स पर नहीं कर सकेंगे 'ORS' शब्द का इस्तेमाल, FSSAI ने लगाई रोक
FSSAI Bans ORS: भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने फूड प्रोडक्ट्स के नामों और लेबल्स में "ORS" शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। एफएसएसएआई के नए आदेश के मुताबिक, अब कोई भी कंपनी तब तक अपने उत्पाद पर "ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट (ORS)" नहीं लिख सकेगी, जब तक वह विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित मानकों पर आधारित न हो। यह निर्देश फलों पर आधारित पेय, रेडी-टू-ड्रिंक ड्रिंक्स और नॉन-कार्बोनेटेड पेय पदार्थों पर भी लागू होगा। इस कदम का उद्देश्य बाजार में फैली गलतफहमियों को दूर करना और उपभोक्ताओं को असली और नकली ORS उत्पादों के बीच स्पष्ट अंतर समझाने में मदद करना है।
ORS शब्द के इस्तेमाल पर आदेश
एफएसएसएआई ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य आयुक्तों को एक नया निर्देश जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि किसी भी खाद्य उत्पाद ,चाहे वह फ्रूट-बेस्ड, नॉन-कार्बोनेटेड या रेडी-टू-ड्रिंक बेवरेज हो के नाम या ब्रांड में ओआरएस शब्द का प्रयोग अब पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। एफएसएसएआई ने जारी आदेश में कहा कि यह आदेश पहले के दो आदेशों (14 जुलाई 2022 और 2 फरवरी 2024) को सुपरसिड करता है, यानी अब वे आदेश रद्द माने जाएंगे।

क्यों हटाया गया ORS शब्द?
एफएसएसएआई ने स्पष्ट किया है कि कई पेय कंपनियां अपने जूस या फलों पर आधारित ड्रिंक्स में "ORS" शब्द का उपयोग कर उपभोक्ताओं को भ्रमित कर रही थीं। लोग ऐसे उत्पादों को WHO द्वारा अनुमोदित ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन समझ लेते हैं, जबकि वास्तव में ये सिर्फ फूड या ड्रिंक प्रोडक्ट हैं। नियामक संस्था का कहना है कि ऐसा लेबल उपभोक्ताओं को गुमराह करता है और यह स्वास्थ्य से जुड़ी गलत धारणा फैलाता है।
पुराने आदेश को किया गया रद्द
पहले एफएसएसएआई ने 14 जुलाई 2022 और 2 फरवरी 2024 को जारी आदेशों में उत्पादों के नाम के साथ "ORS" जोड़ने की अनुमति दी थी, बशर्ते उत्पाद पर यह चेतावनी दी जाए कि यह WHO द्वारा अनुशंसित ORS फॉर्मूला नहीं है। उस समय ब्रांड्स को यह शब्द नाम की शुरुआत या अंत में जोड़ने की छूट थी। लेकिन अब यह अनुमति पूरी तरह से रद्द कर दी गई है।
उल्लंघन पर होगी कार्रवाई
एफएसएसएआई ने साफ कर दिया है कि अब किसी भी फूड कंपनी द्वारा "ORS" शब्द का उपयोग, चाहे नाम में कहीं भी किया जाए, कानूनी उल्लंघन माना जाएगा। ऐसा करना उपभोक्ताओं को गुमराह करने के समान है और इसे FSSAI Act, 2006 की धारा 23 और 24 के अंतर्गत अपराध माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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