Latest Updates
-
Rajasthani Village Style Besan Kadhi Recipe: पारंपरिक स्वाद वाली कढ़ी अब घर पर बनाएं -
Nautapa 2026: 25 मई से शुरू हो रहा नौतपा, भीषण गर्मी और लू से बचने के लिए जरूर अपनाएं ये असरदार उपाय -
कॉफी से चेहरा कैसे साफ करें? कॉफी में मिलाकर लगाएं ये 5 चीजें तो निखर उठेगी त्वचा -
Traditional Rajasthani Bajra Roti Recipe: सर्दियों के लिए सेहतमंद और स्वादिष्ट रोटी बनाने का आसान तरीका -
Brother's Day 2026 Wishes: बचपन की शरारतें...ब्रदर्स डे पर अपने भाई को भेजें ये खास शुभकामना संदेश -
Aaj Ka Rashifal 24 May 2026: रविवार को इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन लाभ के साथ मिलेगी बड़ी खुशखबरी -
Sunday Morning to Night Nihari Recipe: धीमी आंच पर पकाएं और पाएं रेस्टोरेंट जैसा लजीज स्वाद -
Kainchi Dham जाने का है प्लान तो रुकने की टेंशन करें खत्म, जानिए कहां मिलेंगे सबसे सस्ते और बेस्ट होटल्स -
Happy Brother's Day 2026 Shayari: प्यारा भाई यह मेरा, ब्रदर्स डे पर अपने भाई को भेजें ये शायरियां -
Restaurant Style Papdi Chaat Recipe: घर पर बनाएं बाजार जैसी चटपटी और कुरकुरी चाट
सावधान! भारत में बैन हुई ये खतरनाक मछली, खाने से हो सकता है कैंसर, जानिए नाम
Cancer-causing fish: बरसात के मौसम में मछली और चावल का कॉम्बिनेशन खाने में बेहद लुभावना लगता है। मछली खाने के शौकीन लोग इसे अपनी डेली डाइट में शामिल करते हैं। भारतीय बाजार में कई तरह की मछलियां मिलती हैं, जिनके अलग-अलग स्वास्थ्य लाभ होते हैं। लेकिन कुछ मछलियां इंसानों के लिए खतरनाक भी साबित हो सकती हैं। ऐसी ही मछली है थाई मांगुर (Thai Mangur)। इस मछली को खाना जानलेवा हो सकता है और यह कैंसर जैसी घातक बीमारी का कारण बन सकती है। भारत में इसकी बिक्री और पालन पर बैन लगा हुआ है।
थाई मांगुर मछली न केवल इंसानों की सेहत के लिए खतरा है, बल्कि जलीय जीवों के लिए भी बेहद हानिकारक है। भारत सरकार ने इसके पालन, बिक्री और सेवन पर प्रतिबंध लगा रखा है।
इस मछली में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कार्सिनोजेनिक (cancer-causing) माने जाते हैं। इसका सेवन करने से शरीर में हानिकारक टॉक्सिन्स प्रवेश करते हैं, जो लंबे समय में गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। यही कारण है कि इसे कैंसरकारक मछली भी कहा जाता है।

क्यों इस मछली पर लगाया बैन
साल 2000 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने थाई मांगुर मछली पर प्रतिबंध लगाया था। यह मछली मूल रूप से थाईलैंड से भारत लाई गई थी। इसका स्वभाव मांसाहारी (carnivorous) है और यह अन्य छोटी मछलियों को खा जाती है। इसके कारण स्थानीय प्रजातियों की संख्या में भारी गिरावट आई है। रिसर्च के अनुसार, थाई मांगुर के कारण कुछ क्षेत्रों में स्थानीय मछलियों की संख्या में 70 प्रतिशत तक कमी आई है। यह जलीय जीवन के लिए गंभीर खतरा है।
थाई मांगुर मछली को पालते समय मछुआरे अक्सर इसे सड़ा हुआ मांस और पालक खिलाते हैं। इससे जलाशय प्रदूषित हो जाते हैं और पानी में मौजूद अन्य जीवों के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, इस मछली में पाए जाने वाले परजीवी (parasites) अन्य मछलियों में गंभीर बीमारियों को फैला सकते हैं।
क्यों बैन हैं थाई मांगुर मछलियां
मत्स्य विभाग समय-समय पर छापेमारी कर अवैध तरीके से पाली गई थाई मांगुर मछलियों को नष्ट करता रहता है। इसके बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि इस मछली को न खरीदें और न ही खाएं। बाजार में अगर थाई मांगुर जैसी मछली दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल न खरीदें। इसे खाने से न केवल आपकी सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है, बल्कि जलीय जीवन को भी खतरा पहुंचता है।
मछली खरीदते हुए न करें ये गलती
मछली खाने के शौकीन लोगों को हमेशा पक्का और सुरक्षित स्रोत से मछली खरीदनी चाहिए। इसके अलावा, स्थानीय और पारंपरिक मछलियों को प्राथमिकता दें, जो स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित और पौष्टिक होती हैं। थाई मांगुर मछली सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में एक गंभीर पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरा मानी जाती है। इसकी निगरानी और जागरूकता बेहद जरूरी है। इसलिए, थाई मांगुर से दूर रहें और केवल स्वच्छ, स्वास्थ्यप्रद मछलियों का सेवन करें।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications