Heat-wave: मौसम विभाग की चेतावनी, इन राज्यों में हैं तो न निकलें बाहर

गर्मी ने अपने तीखे तेवरों से हर क‍िसी को बेहाल कर रखा है। आलम ये है क‍ि कुछ जगहों पर तापमान 43 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है और इस कहर ढाती गर्मी से बचने के ल‍िए घरों में एसी और कूलर शुरु हो चुके हैं।

मौसम विभाग (IMD) ने बंगाल, बिहार और आंध्र प्रदेश में भीषण गर्मी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। साथ ही झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और सिक्किम में हीट वेव का अनुमान जाहिर किया है।

हीटवेव को देखते हुए अलग-अलग राज्य सरकारों ने दिशा निर्देश जारी करके कहा है क‍ि इस दौरान बहुत जरूरी काम होने पर ही बाहर निकले। यू‍ँ तो हीटवेव ने हर क‍िसी का हाल-बेहाल कर रखा हैं, लेक‍िन जानते हैं इससे सबसे ज्‍यादा खतरा क‍िसे है और कैसे इससे बचाव करें?

Heat Wave Alert: Who Is Most At Risk During A Heat Waves

क्‍या होती है हीटवेव
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, जब मैदानी इलाकों का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक और पहाड़ी क्षेत्रों का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो लू चलने लगती है। 47 डिग्री टेम्‍परेचर को खतरनाक हीटवेव की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं तटीय क्षेत्रों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस हो जाता है तो हीट वेव चलने लगती है।

इन्‍हें हैं सबसे ज्‍यादा हीटवेव से खतरा
डब्‍लूएचओ के मुताबिक बच्चे, बुजुर्ग, प्रेग्नेंट महिलाएं और बीमार व्यक्तियों को बढ़ते तापमान से सबसे ज्यादा खतरा है। इसके अलावा एथलीट और बाहर मजदूरी का काम करते हैं, उन्हें भी भीषण गर्मी से शरीर प्रभावित होने का खतरा है। अगर आपके पास पालतू जानवर है, तो उनका भी खास ख्‍याल रखने की जरुरत होती है।

Heat Wave Alert: Who Is Most At Risk During A Heat Waves

क्‍या क्‍या है खतरा
गर्मियों में जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है। इसके कारण बॉडी के अंदर के तापमान में भी इजाफा होता है। इससे शरीर का मेटाबोलिक प्रोसेस पर असर पड़ता है। सामान्‍य से ज्यादा तापमान होने पर शरीर में तापमान को संतुलित करने की क्षमता कमजोर होने लगती है। इस कारण कई बीमारियों का असर एक साथ होने लगता है। इसके कारण हीट क्रेंप (हाथ, पैरों या पेट की मांसपेशियों में ऐंठन), हीट एक्जॉसेशन, हीट स्ट्रोक और हाइपरथर्मियां का खतरा बढ़ जाता है। 8 घंटे तक मूत्र न आना या गर्मियों में उच्च बुखार - ये सभी लू के खतरे के संकेत हैं और तुरंत आपको मेडिकल हेल्‍प लेनी चाह‍िए।

हाइड्रेट रहें और ऐसे बचाव करें
गर्मियों में शरीर के अंदर पानी की कमी न होने देना यह सबसे ज़रूरी होता है। आप जितना ज्‍यादा तरल पदार्थों का सेवन करेंगे, शरीर में जरुरी इलेक्‍ट्रॉलाइट्स बरकार रहेंगे और इससे गर्मी में शरीर को लड़ने के ल‍िए ताकत मिलेगी। गर्मियों में ज़्यादातर बीमारियां जैसे डायरिया, एसिडिटी इत्यादि पानी कम पीने और गलत खान पान के कारण होती हैं। इसल‍िए इन बातों का ध्‍यान रखें-
* गर्मी में जब भी घर से बाहर निकले अपने पास पानी की बोतल जरूर रखें।
* गर्मी के मौसम में मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा आदि का सेवन अधिक करें।
* सब्‍जी में लौकी, तोरी, टिंडा, कद्दू आदि गर्मियों की सब्जियां हैं, जो बेलों पर उगती हैं, इन सभी में पानी की मात्रा अधिक होती है और ये मूत्रवर्धक होती हैं।
* ज्‍यादा तला-भुना न खाएं।
* कोल्‍ड ड्रिंक और कैफीन के सेवन से बचें।

( डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई सभी जानकारी और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। Boldsky Hindi इसकी पुष्टि नहीं करता है। इन चीजों पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। )

Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्‍वास्‍थ्‍य प्रदात्ता से सलाह लें।

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