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गोमूत्र हानिकारक! आयुर्वेद में बताए इसके फायदे, सेवन से पहले इन बातों का रखें ध्यान, नहीं होगा कोई नुकसान
गो-मूत्र को लेकर कई तरह के रिसर्च सामने आ चुके है। पशुओं को लेकर शोध से जुड़े प्रतिष्ठित संस्थान ICAR-इंडियन वेटेरिनरी रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिसर्च में यह बात सामने आई है कि गाय के ताजा मूत्र में हानिकारक बैक्टीरिया पाया जाता है। इसका सीधा सेवन करना इंसानों के लिए उचित नहीं होता है। हालांकि आयुर्वेद में हिंदू धर्म में गाय को बहुत ही पवित्र माना गया है। अनेक अवसरों पर गाय की पूजा भी हिंदू धर्म में की जाती है। गाय का दूध, गोबर और मूत्र को भी बहुत पवित्र माना गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या गो-मूत्र पीना चाहिए या नहीं। आइए जानते हैं आयुर्वेद में गो- मूत्र के क्या फायदे बताए है और इसे पीते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

आयुर्वेद के अनुसार फायदे
आयुर्वेद के अनुसार, गौमूत्र विष नाशक, जीवाणु नाशक और जल्द ही पचने वाला होता है। इसमें नाइट्रोजन, कॉपर, फॉस्फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम, यूरिक एसिड, क्लोराइड और सोडियम पाया जाता है। गौमूत्र दर्दनिवारक, पेट के रोग, स्किन प्रॉब्लम , श्वास रोग (दमा), आंतों से जुड़ी बीमारियां, पीलिया, आंखों से संबंधित बीमारियां, अतिसार (दस्त) आदि के उपचार में औषधि के साथ प्रयोग में लिया जाता है।

क्या कहता है आयुर्वेद
आयुर्वेद में गो- मूत्र का बहुत महत्व है। सदियों से ही हमारे पूर्वज गाय के गोबर और मूत्र को धार्मिक कार्यों के अलावा औषधीय रुप में इसका इस्तेमाल कर रहे हैं। मान्यता है कि नियमित रूप से गौमूत्र पीने से अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। आयुर्वेद विशेषज्ञ की मानें तो गो-मूत्र को सीधे पीने से बचना चाहिए। गो-मूत्र को अगर अन्य औषधी के साथ मिलाकर सेवन किया जाए, तो ये बेहतर परिणाम देते हैं। मगर आप किसी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के चलते गो-मूत्र का सेवन करना चाहते हैं तो विशेषज्ञों की राय जरुर लें, खासकर गर्भवती और बच्चों के मामले में।
अक्षय कुमार भी पीते है 'गो मूत्र'
बॉलीवुड स्टार ने अक्षय कुमार ने वाइल्ड लाइफ एडवेंचर बेयर ग्रिल्स के साथ इंस्टाग्राम के लाइव सेशन में अपने फिट बॉडी का छोटा सा सीक्रेट शेयर हुए बताया था कि आयुर्वेदिक कारणों के चलते वह रोजाना 'गो मूत्र' पीते हैं।
आयुर्वेद ने बताया कैसे हो गो-मूत्र
- देशी गाय का गोमूत्र ही सेवन करें।
- गर्भवती या रोगी गाय का मूत्र सेवन नहीं करना चाहिए।
- पहाड़ों या जंगल में चरने वाली गाय का मूत्र उतम माना गया है।
- 1 वर्ष से कम की बछिया का मूत्र अमृत से कम नहीं।
- मालिश के लिए 2 से 7 दिन पुराना गोमूत्र अच्छा रहता है।
- गोमूत्र को 4 से 8 बार कपड़े से छानकर ही पीने के प्रयोग में लाना चाहिए
- गो-मूत्र को मिट्टी, कांच या स्टील के बर्तन में ही रखें।
हो सकते हैं ये नुकसान
- गोमूत्र के सेवन से दर्द, दस्त की शिकायत, थकान की समस्या, कंधे का दर्द और बुखार की समस्या हो सकती है।
- गौ मूत्र में उच्च मात्रा में एल्कली नामक तत्व होता है, जो संवेदनशील त्वचा पर रैशेज और एलर्जी का कारण बन सकता है।
- वहीं, 6 से 8 घंटे के बाद गोमूत्र विषैला हो जाता है। इसलिए ताजे गो-मूत्र में पानी मिलाने की सलाह दी जाती है।
- गोमूत्र के सेवन से एलर्जी व खराश की समस्या भी हो सकती है।
( डिस्क्लेमर : इस लेख में दी गई सभी जानकारी और सूचनाएं सामान्य जानकारियों पर आधारित हैं। Boldsky Hindi इसकी पुष्टि नहीं करता है। इन चीजों पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। )
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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