Latest Updates
-
Aaj Ka Rashifal 28 March 2026: शनिवार को इन 4 राशियों की पलटेगी किस्मत, जानें मेष से मीन तक भविष्यफल -
Yoga For PCOS: पीसीओएस से परेशान महिलाएं रोज करें ये 5 योगासन, हार्मोन संतुलन में मिलेगी मदद -
Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती कब है? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, धार्मिक महत्व और पूजा विधि -
अमेरिका में तेजी से फैल रहा कोरोना का नया 'Cicada' वेरिएंट, जानिए लक्षण, कितना खतरनाक और कैसे करें बचाव -
इस दिन झाड़ू खरीदने से घर आती हैं लक्ष्मी, जानें झाड़ू से जुड़े जरूरी वास्तु नियम -
बैड कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में रामबाण हैं ये 5 हरे पत्ते, रोजाना सेवन से हार्ट भी रहेगा हेल्दी -
Navratri Day 9: नवरात्रि के नौवें दिन करें मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानें पूजा विधि, मंत्र, भोग और आरती -
Navratri Day 9 Wishes: मां सिद्धिदात्री का आशीष मिले...इन संदेशों से अपनों को दें महानवमी की शुभकामनाएं -
Ram Navami 2026 Wishes Quotes: भए प्रगट कृपाला...इन चौपाइयों के साथ अपनों को दें राम नवमी की शुभकामनाएं -
Aaj Ka Rashifal 27 March 2026: जानें आज किन राशियों की चमकेगी किस्मत, किन्हें रहना होगा सावधान
International Day of Sign Languages: मूक-बधिरों का संवाद का जरिया है साइन लैंग्वेज, जानें इतिहास और महत्व
International day of sign languages : हर साल 23 सितम्बर का दिन दुनियाभर में इंटरनेशनल डे ऑफ साइन लैंग्वेज के तौर पर मनाया जाता है। जिसका मकसद न बोल और सुन पाने वाले लोगों को शरीर के हाव-भाव से बातचीत करना सिखाना है। संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) के मुताबिक यह दिन दुनिया के सभी मूक-बधिर लोगों और बाकी साइन लैंग्वेज इस्तेमाल करने वाले लोगों को भाषाई पहचान और सांस्कृतिक विविधता का समर्थन करने व उनकी रक्षा करने के लिए मनाया जाता है।
मुख्य तौर पर साइन लैंग्वेज में उंगलियों और हाथों का इस्तेमाल किया जाता है। जो लोग सुन या बोल नहीं पाते वे इस भाषा के माध्यम से समझ और समझा सकते हैं। यह प्राकृतिक सांकेतिक भाषा की तरह जटिल नहीं है और इसका एक सीमित शब्दकोष है। आइए जानते हैं साइन लैंग्वेज डे के बारे में।

साइन लैंग्वेज क्या है?
वैसे तो साइन लैंग्वेज डेफ़ एंड डम्ब यानी मूक बधिर लोगों के लिए कम्युनिकेशन का तरीका है जो उन्हें देश-दुनिया की मुख्यधारा से जोड़ता है। यह प्राकृतिक सांकेतिक भाषा की तरह जटिल नहीं है और इसका एक सीमित शब्दकोष है। अपनी बात कहने या समझाने के लिए साइन लैंग्वेज जितनी मुश्किल दिखती है असल में उतनी मुश्किल नहीं है। अगर आपके पास कोई अच्छा प्रोफेशनल टीचर है तो इस भाषा को सीखने में कोई दिक्कत नहीं आती है। दिव्यांगों के अधिकारों (CRPD) पर कन्वेंशन द्वारा सांकेतिक भाषाओं के उपयोग को मान्यता दी गई है।
300 तरह की साइन लैग्वेंज
वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ डेफ के अनुसार दुनिया में 70 मिलियन से ज्यादा लोग नहीं सुन सकते हैं और लगभग 300 तरह की साइन लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है। जिन लोगों को सुनाई नहीं देता या फिर वह बोल नहीं सकते, जिनकी सुनने की क्षमता बहुत ही कम होती है। उन सभी लोगों के लिए साइन लैग्वेंज ही बातचीत का बेस्ट जरिया होता है। यही बताना इस दिन को मनाने का उद्देश्य है।
सबसे पहले कब इस्तेमाल हुई साइन लैंग्वेज?
पहली बार 16वीं शताब्दी में स्पेनिश व्यक्ति पेड्रो पोंस डी लियोन ने बाधित लोगों के लिए औपचारिक तौर पर साइन लैंग्वेज क्रिएट की थी। कहा जाता है कि यह उन्होंने जानबूझकर नहीं किया था, बस हो गया था। जिसे बाद में डेफ लोगों ने इस्तेमाल किया और अपनी बात समझाने में आसानी महसूस करने लगे।

यूके में सबसे ज्यादा इस्तेमाल में ली जाती है साइन लैंग्वेज
आज यह यूके में चौथी सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है। यूके में 125,000 से अधिक लोग साइन लैंग्वेज का इस्तेमाल करते हैं, और बहुत से लोग जानते है कि इसका इस्तेमाल करके कैसे बातचीत करनी है। वास्तव में, इंग्लैंड और वेल्स में रहने वाले 15,000 लोग अपनी मुख्य भाषा के रूप में ब्रिटिश साइन लैंग्वेज का इस्तेमाल करते है। हालांकि अलग-अलग देशों में अपनी अलग साइन लैंग्वेज हैं।
इंटनेशनल डे ऑफ साइन लैंग्वेज थीम
हर साल एक नई थीम या विचार के साथ इंटरनेशनल डे ऑफ साइनल लैंग्वेज डे मनाया जाता है। इस साल भी नई थीम के साथ साइन लैंग्वेज की थीम "A World Where Deaf People Everywhere Can Sign Anywhere!" है।
यहां से कर सकते है इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) ऑनलाइन कोर्स
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एंड हियरिंग - इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) ऑनलाइन कोर्स भारत का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्पीच एंड हियरिंग (NISH) आपके लिए 6 सप्ताह का फ्री ऑनलाइन कोर्स ऑफर करता है जो इंडियन साइन लैंग्वेज (ISL) के बारे में अच्छी जानकारी देता है। यह इंस्टीट्यूट केरल में स्थित है। इस कोर्स के तहत हर सप्ताह 10 - 15 मिनट्स के वीडियोज़ उपलब्ध करवाए जाएंगे। यह कोर्स करने के बाद आप भारत में स्पेशल बच्चों को पढ़ा सकते हैं या फिर, उनकी अच्छी देख-भाल कर सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications











