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Yoga Day 2023: गैस बनने से पेट बन गया गुब्बारा, बाहर निकालने के लिए करें ये योगासन
कुछ खाते ही आपके पेट में गैस बन जाती है? पेट फूला हुआ सा लगता है? गलत खान-पान की वजह से पेट में सूजन और गैस्ट्रिक समस्याएं होने लगती हैं।
कई बार, जब आंत के बैक्टीरिया भोजन को ठीक से नहीं तोड़ पाते हैं, तो गैस्ट्रिक समस्या होने लगती है। नतीजा एसिडिटी, ब्लोटिंग और गैस के रूप में सामने आता है। अगर पेट में फंसी हुई गैस बाहर नहीं निकल पाती है, तो पेट दर्द और बदहजमी जैसी दिक्कत होने लगती है। गैस से राहत पाने के लिए कुछ योग मुद्रा का सहारा लिया जा सकता है। हम यहां आपको कुछ योगासन बता रहे हैं, जो आपको गैस निकालने में मदद करती हैं।

1. पवनमुक्तासन को द विंड रिलीविंग पोज के नाम से भी जाना जाता है। ये पेट की सूजन और गैस्ट्रिक परेशानियों को कम करने में फायदेमंद है। कोई भी योग आसन या व्यायाम जिसमें आपके निचले शरीर और रीढ़ की हड्डी में मरोड़ शामिल है, गैस्ट्रिक बीमारियों और सूजन में सहायता करता है। यह आसन मोटापा दूर करता है और गैस,भूख न लगना,कब्ज,ह्रदय रोग ,गठिया आदि विकारों को दूर करता है, पेट की बढ़ी हुई चर्बी को कम करता है। इसे करने से आंते सुचारु रुप से काम करने लगती है।
ऐसे करें
- सबसे पहले समतल जमीन पर मैट या कंबल बिछाकर उस पर पीठ के बल लेट जाएं
- गहरी सांस लें और छोड़ते हुए दाएं घुटने को मोड़ते हुए उसे छाती पर ले आएं।
- ठीक इसी प्रकार बाएं घुटने को भी छाती के करीब ले आएं।
- अब दोनों हाथों को घुटनों के ठीक नीचे पिंडली के अगले भाग पर रखें।
- इसके बाद गर्दन उठाएं और ठोड़ी को घुटनों से मिला लें
- अब बाहों के जोर की मदद से जांघों का दबाव पेट पर पड़ने दें।
इस मुद्रा को अपने क्षमता के अनुसार अवधि तक करें और फिर धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में आ जाएं।

वज्रासन
यह काफी सरल योगासन है। इसे सिटिंग योग पोज भी कहते हैं।
यह आसन आपको पेट के डाइजेस्टिव सिस्टम को सही करता है। इसे करने से अपच और बदहजमी की समस्या नहीं होती है।
करने का तरीका
- सबसे पहले अपने दोनों पैरों को जमीन पर फैलाकर बैठें।
- दाहिने पैर को घुटने से मोड़ें और दाहिने कूल्हे के नीचे रखें।
- इसी प्रकार से बाएं पैर को मोड़ें और अपने बाएं कूल्हे के नीचे रखें।
- अब कूल्हों को एड़ियों के बीच में लाएं।
हाथों को घुटनों पर रखें और रीढ़ की हड्डी को बिलकुल सीधा रखें।
- सांस लेने व छोड़ने की प्रक्रिया जारी रखें और शांत रहने का प्रयास करें।
- रेस्ट की पॉजिशन में आने के लिए दाहिने पैर को आगे लाए फिर बाएं पैर को।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



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