Jagannath Rath Yatra : रथ यात्रा से पहले ही क्‍यों हो जाती है भगवान जगन्‍नाथ की तबीयत खराब, जानें कारण और इलाज

आपने इंसानों या जानवरों को अक्सर बीमार होते देखा या सुना होगा, लेकिन क्या कभी आपने किसी देवी-देवता को बीमार होते हुए सुना है। जी हां भगवान भी बीमार हो सकते हैं, दरअसल भगवान जगन्नाथ रथ यात्रा से ठीक 15 दिन पहले बीमार पड़ गए हैं।

जगन्नाथ मंदिर में हर साल कपाट खुलने और रथ यात्रा निकलने से 15 दिन पहले भगवान जगन्नाथ बीमार पड़ जाते हैं और एकांत वास में चले जाते हैं। जिस दौरान मंदिर का वह हिस्सा बंद कर दिया जाता है। जहां भगवान जगन्नाथ अपनी बहन और भाई के साथ अपने एकांत वास में रहते हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि भगवान जगन्नाथ यात्रा से पहले बीमार पड़ते हैं, और इसके पीछे क्या मान्याताएं छिपी हैं।

Jagannath Rath Yatra

भगवान जगन्नाथ की तबियत होती है खराब
ओडिशा में जगन्नाथ पुरी मंदिर में ज्येष्ठ मास के पूर्णिमा तिथि को भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ गर्भगृह से बाहर लाए जाते हैं। जहां स्नान के बाद उनकी तबियत खराब हो जाती है और उन्हें बुखार हो जाता है। जिसके बाद उन्हें शयन कक्ष यानि आराम करने वाले कमरे में रखा जाता है। इस कमरे में उनका इलाज किया जाता है। इतना ही नहीं भगवान जगन्नाथ को भोग में भी सादा खाना लगाया जाता है।

15 दिन के एकांतवास में रहते हैं भगवान जगन्नाथ

भगवान जगन्नाथ की यात्रा शुरू होने से 15 दिन पहले उन्हें बुखार आ जाता है, जिसके बाद उन्हें एकांतवास में रखकर उनका इलाज किया जाता है। इस दौरान भक्त भगवान जगन्नाथ के दर्शन भी नहीं कर सकते हैं। इस दौरान भगवान के पास मुख्य पुजारी रहते हैं और उनकी देखभाल करना, भोग लगाना, श्रृंगार करते हैं। भगवान जगन्नाथ पूरी तरह तैयार होने के बाद ही तैयार होकर एंकातवास से बाहर आते हैं।

भगवान जगन्नाथ को बुखार आने का क्या है कारण
ऐसी मान्यता है कि स्नान यात्रा के दिन भगवान जगन्नाथ पूरे दिन धूप में रहते हैं और ठंडे पानी से स्नान करते हैं, जिस कारण उनको बुखार आ जाता है। जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए एकांतवास में रखा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान जगन्नाथ भक्तों के प्रेम और ज्यादा देखभाल पाने के लिए बीमार हो जाते हैं। भगवान जगन्नाथ के बीमार होने के कारण भक्त और भगवान का रिश्ता और गहरा हो जाता है।

भगवान के बीमार होने का वैज्ञानिक कारण
अगर हम इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों की बात करें तो पुरी में इस समय बहुत गर्मी होती हैं, भक्त गर्मी में परेशान ना हो, और बीमार न पड़े इसलिए मुख्य मंदिर को कुछ दिनों के लिए बंद किया जाता है।

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