Latest Updates
-
किस विटामिन की कमी से चक्कर आते हैं? जानें कैसे करें कमी को पूरा -
दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह दूसरी बार बने माता-पिता, एक्ट्रेस ने राधा अष्टमी पर दिया बेटी को जन्म -
Oscars 2027: सिर्फ 90 लाख कमाने वाली ‘गोंधल’ ने 33 फिल्मों को पछाड़ा, बनी भारत की ऑफिशियल एंट्री -
Mahalaxmi Vrat Katha: महालक्ष्मी व्रत में जरूर पढ़ें ये कथा, मां लक्ष्मी पूरी करेंगी हर मनोकामना -
Mahalaxmi Vrat 2026: महालक्ष्मी व्रत आज से शुरू, जानें पूजा विधि, नियम और महत्व -
Radha Ashtami Vrat Katha: राधा अष्टमी पर पढ़ें यह व्रत कथा, किशोरी जी के साथ श्री कृष्ण का मिलेगा आशीर्वाद -
Radha Ashtami Wishes in Sanskrit: इन संस्कृत श्लोकों और संदेशों से अपनों को दें राधा अष्टमी की शुभकामनाएं -
Radha Ashtami 2026 Wishes: राधा रानी की कृपा...इन संदेशों के जरिए अपनों को दें राधा अष्टमी की शुभकामनाएं -
खाना खाने के बाद 10 मिनट वॉक करना क्यों है जरूरी? जानें इसके 5 जबरदस्त फायदे -
राधा अष्टमी का व्रत क्या दोपहर तक रखा जाता है? जानें राधा अष्टमी व्रत नियम, विधि और पारण का समय
Janmashtami 2023 : कान्हा को अति प्रिय है धनिए की पंजीरी का भोग, जानें इसे ग्रहण करने के फायदे और रेसिपी
Janmashtami 2023 : जन्माष्टमी के मौके पर भगवान कृष्ण की जन्म की तैयारियां पूरे देशभर में उल्लास और जोश से की जाती है। साज-सज्जा के साथ भगवान के लिए कई तरह के प्रसाद और भोग बनाए जाते हैं।
माना जाता है कि श्रीकृष्ण को धनिया अति प्रिय है, जिसके कारण उन्हें आज भी उनके जन्मोत्सव के दिन पर धनिया पंजीरी का प्रसाद भोग के रूप में चढ़ाया जाता है। धनिया पंजीरी भोग में चढ़ाया जाने वाला प्रसाद है और इसे खासतौर से जन्माष्टमी के अवसर पर ही बनाया जाता है। जिसे बनाने में धनिया का इस्तेमाल होता है जो कई मायनों में सेहत के लिए लाभकारी है।
आइए जन्माष्टमी के मौके पर जानते हैं कि भगवान को क्यों लगाई जाती है सबसे पहले धनिए की पंजीरी का भोग।

धनिए की पंजीरी का भोग लगाने का वैज्ञानिक तर्क
जन्माष्टमी में भगवान कृष्ण को मुख्य प्रसाद के तौर पर सबसे पहले धनिए की पंजीरी का भोग लगाया जाता है। इसके पीछे वजह ये है कि भगवान कृष्ण का जन्म वर्षा ऋतु के दौरान हुआ था। इस मौसम में वात, कफ, पित्त इन चीजों की समस्याएं बहुत ज्यादा देखने को मिलती हैं। साथ ही साथ संक्रमण भी तेजी से फैलता है। ऐसे में धनिए का सेवन इन सभी समस्याओं में लाभकारी है। धनिया बारिश में जल के दूषित होने से शरीर में बढ़े विषैले तत्वों का नाश करता है। इसके अलावा धनिए में मौजूद गुण बारिश के दौरान रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। इस वजह से जन्माष्टमी पर खासतौर से धनिया पंजीरी का प्रसाद बनाया जाता है।
ये भी एक वजह
जन्माष्टमी में पूरे दिन व्रत रखा जाता है। रात्रि 12 बजे भगवान कृष्ण जन्म के बाद ही कुछ ग्रहण किया जाता है। यह समय सामान्यतः कुछ भी खाने योग्य नहीं होता। ऐसे में यदि कोई भारी या गलत आहार लेने से स्वास्थ्य खराब होने का डर रहता है। धनिया पंजीरी मीठी और सुस्वाद होकर भी कफ एवं वात के दोष को नियंत्रण करती हैं। ये भी एक कारण है कि सेहत को देखते हुए भगवान को धनिए की पंजीरी सबसे पहले अर्पित की जाती है।

धनिए की पंजीरी खाने के सेहत को फायदे
- धनिया चबाने से पाचन दुरुस्त रहता है। इसे खाने से गैस और अपच की समस्या नहीं होती है।
- शुद्ध घी में धनिया भूनकर पंजीरी बनाई जाती है और इसमें ड्राई फ्रूट्स मिक्स किए जाते हैं जिससे यह और ज्यादा हेल्दी प्रसाद बन जाता है। इसे खाने से ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रोल कंट्रोल रहते हैं।
- नई मांओं को तो धनिए की पंजीरी जरुर खानी चाहिए। इसका सेवन करने से मांओं में दूध बढ़ाने का काम भी करती है। महिलाओं की इम्यूनिटी पावर को मजबूत बनती है पंजीरी।
- धनिए की पंजीरी दिमाग को शांत रखने के साथ ही इसे बेहतर तरीके से फंक्शन करने में भी मदद करती है। यह पंजीरी दिमागी तरावट, मस्तिष्क संबंधी समस्याओं के लिए फायदेमंद है ।
- आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए नियमित रूप से पंजीरी का सेवन करना लाभप्रद है। इससे आंखें स्वस्थ रहती हैं।
रेसिपी
सामग्री : 2 कप धनिया पाउडर, आधा कप कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल, चौथाई कप घी, 10-12 काजू, 10-12 बादाम, आधा कप मखाना, आधा कप पिसी हुई चीनी।
इसे बनाने की रेसिपी : कड़ाही में मीडियम आंच पर 1 चम्मच घी गर्म करें और इसमें काजू- बादाम डाल कर हल्का ब्राउन होने तक भून लें। इन्हें अलग कर लें। अब इसे पैन में मखाना डालकर क्रिस्पी होने तक भून लें और हल्का क्रश कर लें। अब पैन में बचा हुआ घी डालें। इसमें धनिया पाउडर डालकर धीमी आंच पर सुनहरा और खुशबू आने तक भूनें। लगातार चलाते रहें। इस बात का विशेष ख्याल रखें कि ये जलना भी नहीं चाहिए और न ही कच्चा रहें। दोनों ही स्थितियों में इसका स्वाद कड़वा हो जाता है। धनिया भूनने के बाद इसमें भुने हुए मेवे डालकर अच्छी तरह मिलाएं। पैन को आंच से उतारकर मिश्रण को अच्छे से ठंडा होने दें। अब इसमें सूखा नारियल, पिसी चीनी और भूने हुए मेवे डालकर अच्छी तरह मिला लें और तैयार पंजीरी में तुलसी का पत्ता डालकर भगवान कृष्ण को भोग लगाएं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जानकारी और शैक्षणिक उद्देश्य के लिए है। यह किसी भी तरह की मेडिकल सलाह, जांच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर या किसी योग्य व अनुभवी स्वास्थ्य प्रदात्ता से सलाह लें।



Click it and Unblock the Notifications
